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तकनीकी पेच:नगर विकास ने पैसा नहीं दिया ताे चुनाव बाद जिप के फंड से बनेगा नया बस स्टैंड

भागलपुर7 दिन पहले
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स्टैंड के अभाव में तिलकामांझी-जवारीपुर राेड में खड़ी बस। - Dainik Bhaskar
स्टैंड के अभाव में तिलकामांझी-जवारीपुर राेड में खड़ी बस।
  • निगम क्षेत्र के बस स्टैंड के लिए ग्रामीण इलाके में खाेजी गई जमीन, इसलिए दिक्कत
  • जीराेमाइल से स्टैंड हटने के 5 साल बाद भी नया स्टैंड चालू नहीं हाे पाया

जीराेमाइल से बस स्टैंड के हटने के पांच साल बीत जाने के बाद भी अब तक प्रशासन की ओर से दूसरी जगह उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। हालत यह है कि सड़क पर जहां-तहां बसें खड़ी हाे रही है, जिससे जाम की स्थिति बन रही है। जबकि बस स्टैंड के लिए बाइपास के पास जगदीशपुर प्रखंड रक्शाडीह माैजा में एक एकड़ 75 डिसमिल जमीन भी चिह्नित हाे गई है।

इसके लिए पथ निर्माण विभाग से जमीन के लिए एनओसी भी मिल गया। वहां एक अप्रैल से ही बस स्टैंड काे चालू करने की याेजना थी, लेकिन छह माह हाेने काे है लेकिन अब तक याेजना जमीन पर नहीं उतर सकी है। असल में बस स्टैंड डेवलप करने में तकनीकी दिक्कत आ रही है। इसके डेवलपमेंट के लिए नगर विकास विभाग काे प्रस्ताव भेजा गया। लेकिन वहां से अब तक राशि इसलिए नहीं मिल सकी है, क्याेंकि जमीन ग्रामीण इलाके में हैं।

हालांकि बीते दिनाें जब सूबे के डिप्टी सीएम भागलपुर दाैरे पर आए थे ताे उन्हाेंने भी विभागीय स्तर पर इसके लिए पहल करने की बात कही थी। डीएम के स्तर पर विभाग के प्रधान सचिव से अनुराेध किया गया था। लेकिन तकनीकी पेच के कारण मामला अब तक अटका हुआ है।

अब जिला प्रशासन की ओर से प्रयास किया जा रहा है कि अगर नगर विकास विभाग की ओर से बस स्टैंड काे डेवलप करने के लिए राशि नहीं मिली, ताे जिला परिषद के फंड से उसका विकास किया जाएगा। क्याेंकि जिला परिषद के पास इसके लिए विशेषाधिकार भी है। पंचायत चुनाव के बाद इस दिशा में पहल की जाएगी। चूंकि अभी आचार संहिता लागू है।

बस स्टैंड के लिए अब तक ये प्रयास किए गए

  • सबसे पहले 2014 में बस स्टैंड के डेवलप के लिए प्रयास किया गया था। इसके लिए बुडकाे की ओर से 395 लाख रुपए की स्वीकृति भी हाे गई है। लेकिन जिला प्रशासन की ओर से जमीन चिह्नित की गई। इस कारण से राशि नगर विकास विभाग काे वापस हाे गई।
  • इसके बाद 2016 में भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से तिलकामांझी स्थित सरकारी बस स्टैंड में इसके डेवलप करने की याेजना बनी। इसके लिए पूर्व कमिश्नर अजय कुमार चाैधरी ने परिवहन निगम के प्रमंडलीय प्रबंधक काे एनओसी के लिए पत्र भेजा था। लेकिन एनओसी नहीं मिलने के बाद मामला अटक गया।
  • इसके बाद फिर नए सिरे से जमीन की तलाश शुरू की गई। बाइपास के पास रक्शाडीह के पास एक उकड़ 75 डिसमिल जमीन चिह्नित की गई। वहां एक अप्रैल से बस स्टैंड काे चालू करना था। लेकिन वहां नगर विकास विभाग से अब तक राशि नहीं मिलने के कारण अब तक उसे चालू नहीं किया जा सका है।

बस स्टैंड चालू हाेने से जाम से शहर के लोगों को मिलेगी राहत
बस स्टैंड बनने से शहर काे जाम से राहत मिलेगी। हालत यह है कि अभी बस स्टैंड नहीं हाेने से सड़क पर ही जहां-तहां बसें खड़ी कर जाती हैं। लाेहिया पुल पर भी बसें खड़ी करके यात्री काे चढ़ाते-उतारते हैं। इससे पुल पर भी जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके अलावा तिलकामांझी से जवारीपुर के बीच और जीराे माइल के पास भी सड़क पर ही बसें खड़ी रहती हैं। बस खड़ी रहने से वहां अवैध रूप से टेंपाे स्टैंड भी बन गया है। इससे जाम लगता है। जब स्थायी बस स्टैंड चालू हाे जाएगा, ताे जहां-तहां गाड़ियां खड़ी नहीं हाेंगी और जाम से राहत मिलेगी।

पंचायत चुनाव के बाद तेज हाेगी पहल

  • बस स्टैंड के लिए जमीन चिह्नित है। नगर विकास विभाग से उसे डेवलप करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन वह ग्रामीण क्षेत्र में है, इसलिए तकनीकी दिक्कत आ रही है। अब पंचायत चुनाव के बाद इस दिशा में पहल तेज हाेगी। -सुब्रत कुमार सेन, डीएम
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