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  • In 25 Days, 190 Dead Bodies Were Electrified Due To Lightning, 95 Trees Survived, By Reducing 6175 Kg Of Carbon Monoxide From Entering The Atmosphere And Reduced Pollution

पृथ्वी दिवस पर विशेष:25 दिन में बिजली से हुआ 190 शवों का अंतिम संस्कार तो बच गए 95 पेड़, 6175 किलो कार्बन मोनोऑक्साइड को वातावरण में जाने से रोक कर कम किया प्रदूषण

भागलपुरएक महीने पहले
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  • 16 जुलाई को शुरू हुआ था बरारी विद्युत शवदाह गृह, तब से 43 कोरोना संक्रमित लाशों का भी हुआ अंतिम संस्कार
  • दो शव जलाने के लिए एक पेड़ की देनी पड़ती है बलि, जबकि एक पेड़ जलाने से निकलता है 65 किलो कार्बन

बरारी विद्युत शवदाह गृह के शुरू होने के बाद 25 दिनों में बिजली से 190 शवों का अंतिम संस्कार हुआ। इससे अंतिम संस्कार में इस्तेमाल होने वाले 95 पेड़ बचाए जा सके। इन पेड़ों के सुरक्षित होने से 380 लोगों के लिए ऑक्सीजन मिलने की संभावना बढ़ी। इतना ही नहीं, 95 पेड़ों को जलाने से पैदा होने वाला 6175 किलो कार्बन मोनोऑक्साइड, 2422.5 किलो हाइड्रोकार्बन और 997.5 किलो पर्टिकुलेट मैटर को वायुमंडल में जाने से रोकने में मदद मिली। विद्युत शवदाह गृह के शुरू होने से अब शहर के वायुमंडल में प्रदूषण स्तर कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। दरअसल, 16 जुलाई को इस शवदाह गृह की शुरुआत हुई। तब से अब तक 190 शवों का अंतिम संस्कार बिजली से किया गया। इनमें 43 कोरोना संक्रमितों की भी लाशें थीं। विशेषज्ञों की माने तो एक शव को जलाने में करीब 200-300 किलो लकड़ी की जरूरत पड़ती है। दो शवों के दाह-संस्कार के लिए एक पेड़ की जरूरत होती है।

ये फायदे भी हुए

श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान मोलभाव की स्थिति नहीं बनती। डाेम राजा की मनमर्जी पर कुछ हद तक अंकुश लगा। शव जलाने में महज 45 मिनट लग रहे हैं। बारिश, धूप और आंधी के बीच होने वाली परेशानी खत्म हुई।

यह है प्रदूषण का गणित
बताते हैं, 1 किलो लकड़ी जलाने पर 130 ग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड, 51 ग्राम हाइड्रोकार्बन, 21 ग्राम पार्टिकुलेट मैटर, 0.3 ग्राम पॉलीसाइक्लिक एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन व 10-167 मिलीग्राम डोक्सिन बनता है। कार्बन मोनोऑक्साइड के वायुमंडल में जाते ही कार्बन डायऑक्साइड में बदलने से तापमान बढ़ता है। ऐसे में एक पेड़ जलाने से 65 किलो कार्बन मोनोऑक्साइड, 25.5 किलो हाइड्रोकार्बन, 10.5 किलो पर्टिकुलेट मैटर निकलता है। इस तरह अंतिम संस्कार में जलने से बचे 95 पेड़ों से 6175 किलो कार्बन मोनोऑक्साइड, 2422.5 किलो हाइड्रोकार्बन, 997.5 किलो पर्टिकुलेट मैटर वातावरण में जाने से रुका।

एक पेड़ से चार को मिलती है जिंदगी
मंदार नेचर क्लब के संस्थापक सदस्य अरविंद मिश्रा ने बताया, शवदाह गृह में 45 मिनट में एक शव का अंतिम संस्कार हो जाता है। लकड़ी से दाह-संस्कार में तीन-चार घंटे तक लगते हैं। प्रदूषण नियंत्रित होता है। एक पेड़ से दो शवाें का अंतिम संस्कार हाे सकता है, लेकिन एक पड़े रोज चार लोगों को जीने के लिए ऑक्सीजन देता है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने चाहिए। पेड़ों की कटाई और जलावन में इस्तेमाल कम करें।

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