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न्याय के लिए पहल:केस में सुस्त एपीपी हट सकते हैं, मानदेय रुकेगा; आरोपियों की रिहाई को गंभीरता से लिया

भागलपुर16 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • राज्य स्तरीय समिति ने गंभीर मुकदमों में आरोपियों की रिहाई को गंभीरता से लिया
  • नवादा, बेतिया, औरंगाबाद समेत 5 जिलों के पीपी की विधि विभाग में शिकायत

राज्य सरकार ने सूबे के सभी जिलों की अदालतों में गंभीर मुकदमों में आरोपियों की रिहाई को गंभीरता से लिया है। अपराध के अनुसंधान व अभियोजन की गुणवत्ता तय करने के संबंध में राज्य स्तरीय समिति ने पाया कि कई मुकदमों में अभियोजन पदाधिकारी, लोक अभियोजक, सहायक लोक अभियोजक व स्पेशल पीपी के गंभीर नहीं होने से ही मुकदमों में हार मिलती है।

ऐसे में तय किया गया है कि यदि मुकदमा हारे तो वैसे अभियोजकों की विदाई कर दी जाए। सभी तरह के पीपी के काम की मॉनिटरिंग कर रही सीआईडी ने तमाम अभियोजकों को हर महीने की अंतिम तारीख को पूरे महीने का केसवार जानकारी देने को प्रपत्र भेजा था। लेकिन कई जिलों में इस निर्देशों को तवज्जो ही नहीं दी गई। ऐसे में सरकार ने पांच जिलों के लोक अभियाेजकों पर अनुशासनिक कार्रवाई की तैयारी की है।

पूर्णिया, खगड़िया के पीपी ने स्पष्टीकरण का जवाब भी नहीं दिया

सीआईडी की डीआईजी गरिमा मल्लिक ने विधि विभाग के सचिव से पांच जिलों क्रमश: नवादा, बेतिया, खगड़िया, पूर्णिया व औरंगाबाद के लोक अभियोजकों की शिकायत की है। केसवार उपलब्धि की रिपोर्ट नहीं देने पर इन जिलों के पीपी से स्पष्टीकरण मांगा गया था लेकिन किसी ने स्पष्टीकरण का जवाब तक नहीं दिया। डीआईजी ने गृह विभाग के प्रधान सचिव के पत्रांक अ.नि. (05)11-2014 कोर्ट केस-1081 दिनांक 8 दिसंबर 2014 व क्रिमिनल अपील नं. 169/2014, पेरुमल बनाम जानकी एवं क्रिमिनल अपील नं. 1485/2008, गुजरात राज्य बनाम किशन भाई मामले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायादेश का हवाला भी दिया है।

सरकारी कर्मी की गवाही नहीं होने से हुई रिहाई की मांगी रिपोर्ट

डीआईजी ने कहा कि किसी भी लोक अभियोजक व जिला अभियोजन पदाधिकारी ने मुकदमों में मिली हार को लेकर अपील के लायक केसों की सूची भी नहीं दी है। जिला स्तर पर हुई समीक्षा की रिपोर्ट भी 10 तारीख तक नहीं भेजी जा रही है। डीआईजी ने कहा कि सरकारी कर्मचारी या पदाधिकारियों द्वारा गवाही नहीं देने के कारण यदि किसी केस में रिहाई आदेश मिलता है, तो उसकी रिपोर्ट भी भेजें ताकि उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जा सके। मीटिंग में विधि विभाग के अवर सचिव बलराम मंडल व अभियोजन निदेशालय के प्रभारी उप निदेशक (विधि) फतह बहादुर सिंह भी मौजूद रहे। सभी लोगों ने भी साफ संकेत दिया है कि मुकदमे में सुस्त एपीपी को हटाकर उनकी जगह नए की नियुक्ति होगी। कइयों का मानदेय रुकेगा और उन्हें अभियोजन की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाएगा।

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