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निजी क्लीनिक का फीस 100 रुपए:सरकारी आवास में क्लीनिक चला रहे शाहकुंड सीएचसी के प्रभारी

भागलपुर7 दिन पहले
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सरकारी आवास पर निजी क्लीनिक में मरीज देखते प्रभारी डॉक्टर। - Dainik Bhaskar
सरकारी आवास पर निजी क्लीनिक में मरीज देखते प्रभारी डॉक्टर।

शाहकुंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. जेपी सिंह ने अपने सरकारी आवास में निजी क्लीनिक खोल ली है। अस्पताल परिसर में बने अपने आवास में वे मरीजों से 100 रुपए की फीस लेकर इलाज कर रहे हैं। हर माह अस्पताल में मरीजों के इलाज में लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी रविवार को अस्पताल सूना नजर आया, जबकि प्रभारी डॉ. सिंह अपने आवासीय क्लीनिक में इलाज करते नजर आए।

पूछने पर कहा, यहीं रहता हूं। ऑफ टाइम में आने वाले मरीजों का इलाज कर देता हूं। सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने प्रभारी के इस प्रैक्टिस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कोई भी सरकारी अस्पताल में अपना निजी क्लीनिक नहीं चला सकता। यह गलत है।

सरकारी अस्पताल के निजी क्लीनिक का फीस 100 रुपए
शाहकुंड के भट्टाचक गांव के पांच माह की प्रियांशु के पैर का इलाज कराने उसकी मां सुबह 10 बजे ही अस्पताल अाई। उसे पेड़ के नीचे बैठाया गय। इस बीच महिला ने गार्ड को 100 रुपए देकर अपना नंबर लगाया। उसने बेटी को चबूतरे पर ही लिटा दिया। महिला ने बताया, 16 मई काे उसे इंजेक्शन दिया था। तब से उसका एक पैर काम नहीं करता। वह जमीन पर पैर नहीं रख पा रही, इसलिए दिखाने आई। सुबह 11.36 बजे प्रभारी डाॅ. जेपी सिंह ने अपने अावास में उसे देखा और जरूरी दवा लिख दी। इसी तरह एक चाैकी पर एक वृद्धा काे उल्टी व शाैच, बुखार हाेने पर भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। इस बीच एक गर्भवती भी इलाज कराने पहुंचीं।

हर दिन अपनी लगाई नाइट ड्यूटी
प्रभारी डॉ. जेपी सिंह ने अस्पताल में ड्यूटी का जो रोस्टर बनाया, इसमें सभी 4 एमबीबीएस, 1 डेंटिसस्ट और दो आयुष डॉक्टरों की ड्यूटी दिन में लगाई। लेकिन खुद की ड्यूटी रात में तय की है। सप्ताह के सभी सात दिन रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक उन्होंने अपनी ड्यूटी लगाई है। बाकी डाॅक्टराें की अाेपीडी, इमरजेंसी व अन्य विभागों में ड्यूटी लगाई है।

अस्पताल में कोई भी जानकारी देने को भी तैयार नहीं
अस्पताल में कोई कर्मचारी नजर नहीं आया। एक व्यक्ति कोरोना जांच कराने पहुंचा तो अस्पताल प्रभारी के आवास के बाहर चबूतरे के पास कुर्सी पर उन्हें बैठाया गया। उसने प्रभारी से ही पूछा कि कोरोना जांच कहां होता है। इस पर प्रभारी ने कहा, आज नहीं होगा। जांच टीम क्षेत्र में गई है। कल होगा या टीम के लौटने पर हो सकता है। उसे बिना जांच कराए ही लौटना पड़ा।

सरकारी अस्पताल के डाॅक्टर, सरकारी आवास में निजी क्लीनिक नहीं चला सकते। यह अवैध है।
- ओमप्रकाश तिवारी, सीनियर वकील

यह गलत है। सरकारी अस्पताल में अपना निजी क्लीनिक कोई नहीं चला सकता। अगर शाहकुंड प्रभारी एेसा कर रहे हैं ताे यह गलत है। मैं उनसे बात करूंगा। वे बाहर क्लीनिक बाहर चला सकते हैं, अस्पताल में नहीं।
- डाॅ. उमेश शर्मा, सिविल सर्जन

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