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  • In other states, due to good money and PF deductions, workers feel the future is safe, here the administration is preparing to give employment to them in the district itself

सीएम के प्रवासियों को यहीं काम देने के भरोसे से जगी उम्मीद / दूसराें राज्याें में अच्छे पैसे और पीएफ कटने से कामगारों काे लगता है वहां भविष्य है सुरक्षित, इधर- प्रशासन जिले में ही उन्हें रोजगार देने की तैयारी में

परिवार की जिम्मेदारी ही मजदूर बद्री पंडित को मधुबनी से दिल्ली तक ले गई। कोरोनाकाल में जीवन का संकट वापस लौटा लाया। शनिवार को वे परिवार समेत श्रमिक ट्रेन से भागलपुर उतरे। फाेटाे जर्नलिस्ट | शशि शंकर परिवार की जिम्मेदारी ही मजदूर बद्री पंडित को मधुबनी से दिल्ली तक ले गई। कोरोनाकाल में जीवन का संकट वापस लौटा लाया। शनिवार को वे परिवार समेत श्रमिक ट्रेन से भागलपुर उतरे। फाेटाे जर्नलिस्ट | शशि शंकर
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परिवार की जिम्मेदारी ही मजदूर बद्री पंडित को मधुबनी से दिल्ली तक ले गई। कोरोनाकाल में जीवन का संकट वापस लौटा लाया। शनिवार को वे परिवार समेत श्रमिक ट्रेन से भागलपुर उतरे। फाेटाे जर्नलिस्ट | शशि शंकरपरिवार की जिम्मेदारी ही मजदूर बद्री पंडित को मधुबनी से दिल्ली तक ले गई। कोरोनाकाल में जीवन का संकट वापस लौटा लाया। शनिवार को वे परिवार समेत श्रमिक ट्रेन से भागलपुर उतरे। फाेटाे जर्नलिस्ट | शशि शंकर

  • सर्वे: हालात सुधरने पर लौट सकते हैं 50% लोग
  • एक्सपर्ट: राेकने को मिले स्किल के हिसाब से काम
  • जिले के सभी क्वारेंटाइन सेंटर में ठहरे 29 में से 9 हजार का हुआ है सर्वे

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 06:29 AM IST

भागलपुर. देश के विभिन्न राज्याें से लाैटकर आ रहे कामगार व मजदूराें का सर्वे जाेर-शाेर से चल रहा है। क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे मजदूर व कामगाराें से लगातार डाटा जुटाए जा रहे हैं कि वे कहां से अाए हैं। किस फैक्ट्री व कंपनी में किस तरह का काम करते थे। साथ ही उस कंपनी व फैक्ट्री से भी संपर्क कर प्रशासनिक अफसर बात कर जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं कि वे लाेग वहां काम कर रहे थे या नहीं। इसके लिए डीएम ने तीन सदस्यीय टीम बनाई है। इनमें एडीएम, जिला उद्याेग केंद्र के महाप्रबंधक और श्रम संसाधन विभाग के अधीक्षक शामिल हैं।

टीम लगातार क्वारेंटाइन सेंटर में सर्वे कर रही है, ताकि उनका डाटा जुटाने के बाद उनके स्किल के हिसाब से राेजगार मुहैया कराई जा सके। इस दाैरान एक महत्वपूर्ण सवाल भी पूछा जा रहा है-क्या फिर से वापस वहां जाएंगे? क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे करीब 29 हजार मजदूराें व कामगाराें में से नाै हजार से जानकारी ली गई है। इसमें 50 फीसदी का जवाब है कि स्थिति सामान्य हाेगी, ताे जरूर लाैटेंगे  क्याेंकि वहां अच्छे पैसे मिलते हैं और पीएफ भी कटता है। हालांकि इसे लेकर प्रशासन कार्ययाेजना बना रहा है। लेकिन विशेषज्ञाें का कहना है कि बाहर से लाैटे मजदूराें व कामगाराें काे यहां राेकना है, ताे उन्हें उनके स्किल के हिसाब काम 
देना होगा। 
जानिए, प्रशासन की मजदूराें काे राेकने की योजना
गाय, बकरी व मुर्गी पालन के लिए 25 लाख तक के लोन 

मजदूराें काे केंद्र व राज्य सरकार की याेजनाओं की जानकारी दी जा रही है। इसके तहत उन्हें 25 लाख तक लाेन मिल सकता है। वे गाय, बकरी, मत्स्य पालन कर आर्थिक स्थिति बेहतर कर सकते हैं। इसमें प्रधानमंत्री राेजगार सृजन, मुद्रा योजना समेत कई याेजनाओं के जरिए बैंक से लाेन दिए जाएंगे। 
मजदूराें का हाे रहा रजिस्ट्रेशन
बाहर से आ रहे मजदूराें का पाेर्टल से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो रहा है। उनका नाम, पता, बैंक खाता, अाधार समेत अन्य डिटेल लिए जा रहे हैं। जिले में ट्रेन, बस और अन्य माध्यमाें से आए मजदूराें का रजिस्ट्रेशन किया गया है। मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास याेजना समेत भवन निर्माण विभाग, पथ निर्माण विभाग समेत अन्य विभागाें की याेजनाअाें में मजदूराें काे उनकाे इलाके में ही काम मिल सकेगा।
एजेंसियों काे प्रशासन देगा मजदूर 
जिले में विभिन्न सरकारी विभागाें के अलावा रियल स्टेट से लेकर पथ, पुल-पुलिया के निर्माण से जुड़ी एजेंसी व ठेकेदाराें का भी रजिस्ट्रेशन पाेर्टल पर हो रहा है। अब उनकाे भी जरूरत के हिसाब से मजदूर प्रशासन ही ऑनलाइन माध्यम से देगा। जिले के जिस इलाके में निर्माण से जुड़े काम हाेंगे, उस एजेंसी व कंपनी काे उस इलाके के मजदूर उपलब्ध कराएंगे जाएंगे। इससे मजदूराें काे अच्छी-खासी राशि मिलेगी अाैर बाहर जाने की नाैबत नहीं आएगी।
साबुन-डिटर्जेंट और तेल का हाेगा उत्पादन, कमेटी कर रही है सर्वे
जिले में राेजमर्रा में इस्तेमाल हाेने वाले सामान का उत्पादन भी हाेगा। किन चीजों का उत्पादन यहां हो सकता है, कमेटी इसका सर्वे कर रही है। इससे स्वदेशी सामान का बाजार में बाेलबाला हाेगा अाैर बाहरी सामान पर रोक लगेगी। साबुन, तेल, डिटर्जेंट, आटा समेत कई तरह के सामान के उत्पादन की तैयारी चल रही है। इन उद्याेगाें काे लगाने के लिए बैंक से लाेन भी मिलेगा। 
भरोसा देना हाेगा कि उनका भविष्य सुरक्षित है
पलायन रोकने को मनरेगा के काम में तेजी लानी होगी। इसमें कमीशनखोरी बंद करनी चाहिए। कई विभागों में रिक्तियां हैं, इस पर बहाली करनी चाहिए। क्रय शक्ति घटने से मांग घटी है। इसलिए बंद पड़ी मिलें और कारखानों को फिर से व्यवस्थित करने की जरूरत है। बंद लघु और कुटीर उद्योग खोलने से राहत मिलेगी। काम का घंटा बढ़ाया है तो वेतन भी बढ़ना चाहिए। सरकार को ईपीएफ, सेवांत लाभ और पेंशन योजनाओं का लाभ लाेगाें काे मिल सके, इसकी प्रक्रिया सरल करनी होगी। श्रमिकों को भी विश्वास में लेना होगा कि उनका भविष्य सुरक्षित है।
प्रवासियों को रोकने का बन रहा वर्कप्लान
सर्वे में करीब 50 फीसदी कामगार व मजदूर यह बताते हैं कि स्थिति सामान्य होने पर वे लाैटकर वहां काम के लिए जाएंगे। वहां अच्छे पैसे मिलते हैं अाैर पीएफ भी कटता है। इसलिए इस दिशा में भी कार्ययाेजना बनाई जा रही है, ताकि उन्हें फिर से वापस जाने की जरूरत नहीं पड़े। - रामशरण, जीएम, जिला उद्याेग केंद्र 

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