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  • Jail Constable's Statement On The Death Of The Prisoner Due To Deteriorating Health, There Is Mention Of Wounds In The Panchnama, The Reason Is Unclear

बंदी मनोज चौधरी की मौत मामले:जेल सिपाही का बयान-तबियत बिगड़ने से हुई बंदी की मौत पर पंचनामे में जख्मों का जिक्र, कारण है अस्पष्ट

भागलपुर8 दिन पहले
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  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही खुलेगा मौत का राज-जेल सिपाही के बयान पर यूडी केस दर्ज करने की चल रही तैयारी

सेंट्रल जेल के बंदी मनोज चौधरी की इलाज के दौरान मायागंज अस्पताल में मौत मामले में बरारी थाने में यूडी केस दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। बंदी को लेकर आए जेल सिपाही का कहना है कि तबियत बिगड़ने के बाद बंदी को मायागंज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

उधर, प्रशासन की ओर से तैनात मजिस्ट्रेट सबौर सीओ ने मृतक मनोज चौधरी की मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट में उसके शरीर पर हुए जख्मों का उल्लेख किया है। सीओ ने पंचनामे में लिखा है कि मनोज चौधरी के दोनों ठेहुंना में जहां-तहां जख्म हैं। बायें हाथ में काला धब्बा, दाहिने हथेली में काला जैसा निशान, पीठ के पीछे व जांघ में भी काला धब्बा है। सीओ ने पंचनामे में मनोज चौधरी की मौत का कारण के कॉलम में अस्पष्ट लिखा है।

पिटाई का आरोप लगाने वाले परिजनों ने केस दर्ज नहीं कराया
सीओ द्वारा तैयार पंचनामे में मृतक के जख्मों का उल्लेख और जेल सिपाही के तबियत बिगड़ने वाली बात में भारी विरोधाभास है। हालांकि पूरे मामले में पुलिस और जेल प्रशासन को मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, ताकि मनोज की मौत कैसे हुई, इसका खुलासा हो सके।

उधर, जेल प्रशासन पर मनोज की पिटाई का आरोप लगाने वाले मृतक की पत्नी, बहनोई समेत अन्य परिजनों ने मामले में किसी भी तरह की रिपोर्ट थाने में दर्ज नहीं कराई है। मीडिया के सामने परिजन जेल प्रशासन पर आरोप लगा रहे थे, लेकिन थाने में केस दर्ज नहीं कराया।

कहां हुई मनोज की पिटाई, कैसे बने चोट के निशान, जांच नहीं हुई
मनोज की कहां पिटाई हुई थी, उसके शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान कैसे बने, इसकी पुलिस ने जांच नहीं की। पुलिस का कहना है कि मनोज को जब जेल पहुंचाया गया था तो वह ठीक था, जबकि जेल प्रशासन का कहना है कि गेट से ही मनोज को इलाज के लिए मायागंज अस्पताल भेज दिया था।

खरीक पुलिस ने मनोज को शराब के नशे में गिरफ्तार किया था। मायागंज अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. एके भगत बंदी का इलाज कर रहे थे। डॉक्टर के मुताबिक, टौक्सिक के कारण मरीज शॉक में था और आईसीयू में भर्ती था।

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