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मिली सजा:रिटायरमेंट से एक दिन पहले घूसखोरी में शामिल जमादार नौकरी से बर्खास्त

भागलपुर3 महीने पहले
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  • एसएसपी की अनुशंसा पर रेंज डीआईजी ने की कार्रवाई

रेंज डीआईजी सुजीत कुमार ने बरारी थाने के तत्कालीन जमादार विजय सिन्हा को रिटायरमेंट से एक दिन पहले शनिवार को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। जमादार पर जब्त ट्रकों को छोड़ने के लिए एनओसी के नाम पर घूस लेने का आरोप था। इस मामले में विजय सिन्हा समेत 3 लोगों पर बरारी थाने में रंगदारी का केस दर्ज हुआ था। मामला जून 2016 का है।

जमादार पर विभागीय कार्यवाही चल रही थी, जिसमें वे दोषी पाए गए थे। इसके बाद एसएसपी निताशा गुड़िया की अनुशंसा पर डीआईजी ने जमादार के बर्खास्तगी की कार्रवाई की। 31 जनवरी 2021 को विजय सिन्हा रिटायर होने वाले थे। लेकिन रिटायरमेंट से एक दिन पहले बर्खास्त होने से विभाग में हड़कंप मच गया है। इससे उनको रिटायरमेंट से उपरांत मिलने वाली सुविधा पेंशन, ग्रेच्युटी पर संकट मंडराने लगा है।
जब्त ट्रकों की एनओसी जारी करने को ली थी रिश्वत

विक्रमशिला पहुंच पथ पर नो एंट्री में खड़े ट्रकों को बरारी पुलिस ने पकड़ा था। बाद में कोर्ट ने जब्त ट्रकों को छोड़ने का आदेश दिया था। ट्रकों को छोड़ने के लिए जरूरी एनओसी के एवज में जमादार विजय सिन्हा, बिचौलिया मुकेश सिंह और थाने का प्राइवेट ड्राइवर के जरिए ट्रक मालिकों से घूस ले रहा था।

बिचौलिए के जरिए खाते में मंगवाई घूस की रकम
जमादार विजय सिन्हा ने बिचौलिए के जरिए विपिन चौधरी नामक एक व्यक्ति के आईसीआईसीआई बैंक के खाते में घूस की रकम 13 हजार मंगवाई थी। एक ड्राइवर जो जमशेदपुर का था उसके पास पैसे नहीं थे तो उसे पुलिस और बिचौलिए की ओर से उक्त बैंक एकाउंट उपलब्ध कराया गया था। पैसे आने के बाद ड्राइवर को एनओसी दी गई थी।

...थानेदार का प्रमोशन हुआ था बाधित
घूसखोरी मामले में बरारी के तत्कालीन थानेदार केके अकेला भी जांच में दोषी पाए गए थे। उनका निलंबन हुआ था और विभागीय कार्यवाही भी हुई थी। सजा के तौर पर उनका 3 साल तक प्रमोशन बाधित हुआ था। बाद में सजा खत्म होने के बाद वे इंस्पेक्टर बने और भागलपुर से उनका स्थानांतरण हुआ था। 2015 में कोतवाली थाने में तैनात दारोगा दयाशंकर राय को भी रिटायरमेंट से एक दिन पहले नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। दारोगा पर फर्जी एफआईआर दर्ज करने का आरोप था। बाद में दयाशंकर राय को बर्खास्तगी से मुक्त कर दिया था।

पहले इन केसों में भी हो चुकी है पुलिसवालों की बर्खास्तगी
हत्या:
पुलिस की पिटाई से इंजीनियर आशुतोष पाठक की मौत मामले में नामजद आरोपी तत्कालीन बिहपुर थानेदार रंजीत मंडल बर्खास्त कर दिया था। लेकिन अब तक पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
शराबखोरी: 5 जुलाई 2017 को स्टेशन चौक की पुलिस टीओपी में शराब पीते चार सिपाही शशिकांत, राजीव रंजन, मधुकर सुमन और रोबिन कुमार पांडेय को विभाग ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। बाद में हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें फिर से बहाल कर लिया गया था।
भ्रष्टाचार: सितंबर-2017 में बालू लदे ट्रैक्टर के ड्राइवर से पैसे लेकर उसे छोड़ने में दोषी पाए गए कजरैली थाने के तत्कालीन जमादार दिलीप कुमार सिंह, सिपाही देव कुमार सिंह और मनीष कुमार को विभाग ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया।
शराब की खरीदारी: मई 2020 में बांका नगर थाने में तैनात दारोगा रामप्रीत कुमार को बर्खास्त कर दिया था। दारोगा रामप्रीत कुमार और चौकीदार योगेंद्र पासवान का शराब खरीदते वीडियो वायरल हुआ था।

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