कश्मीर से लौटे बिहारियों का दर्द:बोले- हमले के बाद घर खाली कराने लगे; 24 घंटे पुलिस ने थाने में बंद रखा, अब गांव ही सहारा

भागलपुरएक महीने पहले
लोहित एक्सप्रेस में कश्मीर से घर लौट रहे बिहारी।

कश्मीर से बिहार लौट रहे मजदूरों को ट्रेन में भी आराम नहीं मिल रहा है। लोहित एक्सप्रेस में बोरे की तरह ठुंसे लोग घर लौट रहे हैं। मजदूरों के चेहरे पर आतंकियों का खौफ साफ दिख रहा है। बेगूसराय से नवगछिया तक भास्कर रिपोर्टर ने उनके साथ सफर कर उनके दर्द की लाइव रिपोर्टिंग की। ट्रेन जम्मूतवी से 20 अक्टूबर की रात में निकली थी। 22 अक्टूबर की सुबह 6:45 बजे बेगूसराय पहुंची। वहां से लेकर नवगछिया तक रिपोर्टर ने कई लोगों से बात की। उनके दर्द को जाना। ट्रेन नवगछिया सुबह 9:15 बजे पहुंच गई।

इसमें उन्होंने कश्मीर के हालात को भी बताया। उनका कहना है-"वहां के हालात लगातार खराब हो रहे हैं। बॉर्डर पर फायरिंग हो रही है। मकान मालिक घर खाली करने का दबाव बना रहे हैं। शाम पांच बजे के बाद घर से बाहर निकलना मना है। इस कारण भी वापस लौटना पड़ रहा है। पुलिस ने करीब 800 मजदूरों को थाने में बंद कर दिया, न खाना दिया और न पानी। शोर मचाने पर बिस्कुट दिया। किसी तरह ठेकेदार ने वहां से बाहर निकाला। ऐसे में वापस लौटना ही सही फैसला लगा। अब तो गांव ही सहारा है"।

जम्मू से लौट रहे किशनगंज के शुल्करनैन ने बताया- "वहां कंस्ट्रक्शन का कार्य करते थे। मंडी दालान (पाकिस्तान का बॉर्डर) में इन दिनों फायरिंग हो रही है। गोलीबारी में बिहारी मजदूर भी घायल हुए थे। हालात लगातार बिगड़ रहे थे। इसलिए वहां से भागकर जम्मू आ गए, लेकिन यहां आने के बाद कोई ट्रेन नहीं मिल रही थी। काफी मुश्किल से टीटी से टिकट बनवाया, लेकिन बर्थ नहीं मिला।'

लोहित एक्सप्रेस में कष्ट में सफर करते कश्मीर से लौटे मजदूर।
लोहित एक्सप्रेस में कष्ट में सफर करते कश्मीर से लौटे मजदूर।

मकान मालिक ने खाली करा लिया मकान

किशनगंज लौट रहे फिरोज आलम ने बताया- "मकान मालिक ने कहा कि हालात अच्छे नहीं हैं। आतंकवादी बिहारियों को मार रहे हैं। इसलिए फिलहाल मकान खाली कर वापस बिहार चले जाओ।' असम के जूम दास ने बताया- "अपनी पत्नी और दो मासूम बच्चों के साथ श्रीनगर के मोर कॉलोनी लाल बाजार में रहते थे। वहां 2016 से ही टाइल्स का काम करते थे, लेकिन आतंकवादियों के हमले के बाद हालात बिगड़ने लगे। मकान मालिक ने कहा कि या तो रूम खाली करो या 5 बजे शाम के बाद बाहर मत निकलना। हमें घर से बाहर निकलना ही पड़ता है। 27 अक्टूबर का टिकट लेना था, लेकिन मकान मालिक के दबाव के कारण पहले ही निकलना पड़ा।'

3 दिनों तक जम्मू में टिकट के लिए रुके, फिर भी वेटिंग लेकर लौटना पड़ा

किशनगंज के मसीरुद्दीन ने बताया- "दो महीने पहले कश्मीर गए थे, लेकिन बिहारियों पर हुए हमले के बाद जहां काम करते थे उनलोगों ने हालात की बात कह काम से निकाल दिया। ये कहा कि हालात सुधरने के बाद फिर आ आना। आमदनी नहीं होने और मकान मालिक के दबाव के कारण अब लौटना पड़ रहा है। जम्मू आने के बाद कन्फर्म टिकट के लिए स्टेशन पर 3 दिनों तक रुकना पड़ा। इसके बावजूद कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाया। किसी तरह वेटिंग का टिकट लेकर जा रहे हैं।'

वेटिंग टिकट मिलने के कारण किसी तरह बैठकर सफर करते कश्मीर से लौटे मजदूर।
वेटिंग टिकट मिलने के कारण किसी तरह बैठकर सफर करते कश्मीर से लौटे मजदूर।

पुलिस वाले ले गए उठाकर, 24 घंटे तक भूखे-प्यासे रखा

वहीं, बंगाल निवासी जियाउल हक ने बताया- "जम्मू पुलिस ने लगभग 700-800 बिहारी मजदूरों को उठाकर 24 घंटे तक थाने में रख लिया। उनका कहना था कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से थाने पर लाया गया है, लेकिन इस बीच उन लोगों को न खाना दिया और न पानी। सिर्फ 2-4 बिस्किट दिए। जब शोर मचाया तब जाकर खाना दिया। ठेकेदार ने बात कर वहां से निकाला। अपनी जान बचाने के लिए किसी तरह भाग रहे हैं।'

अररिया निवासी रिजवान ने कहा- "कश्मीर में करीब 16-17 साल से रह रहे थे, लेकिन हालात बिगड़ने के कारण घर अररिया लौट रहे हैं। अगर बिहार सरकार रोजगार मुहैया कर दे, तो परदेस में गोली नहीं खानी पड़ेगी। अब तो गांव ही सहारा है।'

रिपोर्ट : कृष्ण वल्लभ नारायण

खबरें और भी हैं...