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  • Many Famous People Reached The Margins Of Politics In Bhagalpur As Soon As The Coup Was Over, The Children Of The Leaders Thought It Was Right Not To Do Politics But To Do Government Jobs And Business.

नो पॉलिटिक्स:तख्त पलटते ही भागलपुर में राजनीति के हाशिए पर पहुंचे कई नामचीन, नेताओं के बच्चों ने पॉलिटिक्स नहीं सरकारी नौकरी और बिजनेस करना ही ठीक समझा

भागलपुर9 दिन पहले
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  • कई दिग्गजों के बच्चे राजनीति में उतरे, लेकिन चुनावी मैदान में नहीं हो सके सफल तो बदल लिए रास्ते

(संजय कुमार) दो दशक पहले भागलपुर में जिन बड़े राजनेताओं की तूती बोलती थी, आज उनका नाम सिर्फ फाइलों में है। भागलपुर के करीब दर्जन भर ऐसे राजनेता रहे, जो पार्टी के सिंबल के रूप में स्थापित माने जाते थे। लेकिन तख्त पलटते ही ये दिग्गज राजनेता राजनीति के हाशिए पर पहुंच गए।

कई दिग्गजों के बच्चों ने पॉलिटिक्स ज्वाइन करने में रुचि ही नहीं दिखाई। ख्यात संघी विजय कुमार मित्रा, कांग्रेसी शिवचंद्र झा, बिहपुर के सीपीआई नेता प्रभु नारायण राय, ज्ञानेश्वर यादव, राजेंद्र प्रसाद शर्मा, पीरपैंती के अंबिका प्रसाद आदि के बच्चों ने राजनीति में आने से बेहतर सरकारी नौकरी करना या बिजनेस करना ठीक समझा।

वंशवाद के तोहमत से दूर रहे इन दिग्गजों के बेटे राजनीति में आए ही नहीं ...

1) विजय कुमार मित्रा : भागलपुर सीट से 1967, 1969, 1972, 1977 और 1990 में संघी के रूप में भागलपुर का प्रतिनिधित्व किया था। उनके परिवार के लोगों ने राजनीति में आने से तौबा किया।
2) शिवचंद्र झा : भागलपुर सीट से 1968 से 1980 तक दो टर्म एमएलसी रहे। 1980 व 1985 में एमएलए बने। 1985 से 1989 तक विस के अध्यक्ष भी रहे थे।
3) चुनचुन यादव : दो टर्म नाथनगर से विधायक रहे और तीन बार भागलपुर से सांसद रहे। परिवार राजनीति में गुम हैं।
4) मदन प्रसाद सिंह : गोपालपुर से 1968, 72, 80 व 85 तक चार बार कांग्रेस के विधायक रहे मदन सिंह के परिवार का कोई सदस्य राजनीति में सक्रिय नहीं है।
5) मणिराम सिंह : गोपालपुर से ही 57, 67 और 77 यानी तीन टर्म विधायक रहे मणिराम सिंह के बाद उनका कोई पारिवारिक सदस्य राजनीति में नहीं आया।
6) प्रभु नारायण राय: बिहपुर के सीपीआई नेता प्रभु नारायण राय 1957, 69 व 72 में विधायक रहे। इनकी मृत्यु के बाद परिवार के लोगों राजनीति में नहीं आए।
7) ज्ञानेश्वर यादव : 1967 और 1990 में गोपालपुर के विधायक और 1977 में खगड़िया से सांसद रहे। अब राजनीति से इनका परिवार अलग है।
8) राजेंद्र प्रसाद शर्मा : कांग्रेस से 1980 व 1985 तक बिहपुर के विधायक रहे। इनका परिवार भी राजनीति में निष्क्रिय है।
9) ब्रह्मदेव मंडल : बिहपुर से 1990 व 95 में दो टर्म विधायक रहे। इनके परिवार कोई सदस्य अब सक्रिय नहीं है।
10) अंबिका प्रसाद : सीपीआई से पीरपैंती से 6 बार जीते, परिवार राजनीति में नहीं है।
इनके बेट ने राजनीति में अजमा रहे हैं हाथ

1) सुधा श्रीवास्तव : संपूर्ण क्रांति के जनक जेपी की भांजी हैं। नाथनगर से चार बार विधायक रहीं। मंत्री भी बनीं। सेना से रिटायर्ड बेटा पंचम श्रीवास्तव जदयू में है।
2) आरके राणा : गोपालपुर से 1995 व 2000 में एमएलए व खगड़िया से एक बार एमपी रहे। बेटा अमित राणा 2005 में जीता। अगली बार हार गए।
3) अश्विनी चौबे : भागलपुर के 4 टर्म विधायक रहे। वे बक्सर से दो टर्म से एमपी हैं। बेटा 2015 में भागलपुर से चुनाव हार गए थे।
4) सदानंद सिंह : कहलगांव से कांग्रेस से 9 बार विधायक रहे सदानंद बाबू के बेटे राजनीति में इस बार सक्रिय हुए। शुभानंद मुकेश कहलगांव से चुनाव लड़ रहे हैं।

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