सदर अस्पताल / कराहती हुई पैदल व रिक्शा से आई, फिर भी नहीं किया भर्ती सड़क पर प्रसव, बच्चा मरा

Moaning came on foot and rickshaw, still did not recruit delivery on the road, the child died
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Moaning came on foot and rickshaw, still did not recruit delivery on the road, the child died

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

भागलपुर. सदर अस्पताल में प्रबंधकीय लापरवाही से शनिवार को मानवता शर्मसार हो गई। शुक्रवार आधी रात सुरक्षित प्रसव के लिए दिलदारपुर दियारा स्थित कुंती देवी डेढ़ किलोमीटर पैदल चली और फिर ई-रिक्शा से शनिवार तड़के 4.30 बजे अस्पताल पहुंची। प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को नर्सों ने पहले डिलीवरी करवाने की बात कही, फिर घंटेभर बाद ही उसे मायागंज रेफर कर दिया। उसे भेजने के लिए जरूरी एम्बुलेंस तक नहीं दिया। इतना ही नहीं, जिम्मेदारों ने ट्रॉली से गेट तक भिजवाना भी उचित नहीं समझा। विवश महिला पैदल ही निकलने लगी, अस्पताल परिसर में रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास सुबह 6.30 बजे बीच सड़क पर ही उसका प्रसव हो गया। नवजात सड़क पर गिरा और उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन इमरजेंसी से जैसे-तैसे ट्रॉली लाए और महिला को लेबर रूम में भर्ती करवाया और महिला की जान बची। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन घटना से अंजान बना रहा। बेबस आंखों से दादी शकुंतला देवी नवजात के मृत शरीर को गोद में लिए निहारती रही।
घर में डिलीवरी की हुई थी कोशिश
कुंती के साथ आई आशा ने बताया, उसके एक बच्चे की पहले भी डिलीवरी के दाैरान माैत हाे चुकी है। उसे एक बेटी है। यह तीसरा बेटा था, उसकी भी मौत हो गई। अस्पताल की नर्सों का कहना है कि बच्चे की गर्भ में ही मौत हो चुकी थी। उसका पति कोलकाता में रहता है। लॉकडाउन से पहले ही वह घर आया था पर एक बार भी उसकी जांच नहीं हो सकी। महिला और उसके परिवार के अन्य सदस्य जांच नहीं करवाना चाहते थे। घर में ही डिलीवरी की कोशिश शुक्रवार शाम से रात तक की। घर में डिलीवरी न होने पर उसे अस्पताल लेकर आए। 

हमारे पास अब डॉक्टर नहीं हैं। तीन महिला डॉक्टर हैं, वे रात में नहीं रहतीं। डिलीवरी नर्सों को करवानी है। यदि इस मामले में लापरवाही हुई है तो पता लगाता हूं। जो दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होगी। - डाॅ. विजय कुमार सिंह, सिविल सर्जन

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