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लापरवाही:मोबाइल वैन लाई RT-PCR जांच को सैंपल, धूप में ही खोल दिए, ऐसे तो पॉजिटिव की रिपोर्ट आएगी निगेटिव

भागलपुर8 दिन पहले
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मेडिकल कॉलेज के लैब में खुले में रखे सैंपल की जांच करती टीम। - Dainik Bhaskar
मेडिकल कॉलेज के लैब में खुले में रखे सैंपल की जांच करती टीम।
  • मेडिकल कॉलेज परिसर में मोबाइल वैन से बड़ी लापरवाही, एजेंसी बोली-चूक हुई, अब नहीं होगी

काेराेना जांच के लिए जरूरी आरटीपीसीआर जांच में लैब टेक्नीशियन की टीम पलीता लगा रही है। काेराेना संक्रमण की राेकथाम के लिए गांवों में ज्यादा से ज्यादा संक्रमितों की पहचान के लिए विभाग मोबाइल आरटीपीसीआर वैन चला रहा है। गांवों से लोगों के सैंपल लेकर मेडिकल कॉलेज की लैब में इसकी जांच होनी है, लेकिन टीम ने इस सैंपल को खोलने में ही लापरवाही कर दी। शनिवार काे गांवों से सैंपल लेकर लौटी टीम के टेक्नीशियनों ने खुली जगह ही इसे खोल दिया। हल्की धूप में खुले इन सैंपल से जांच के रिजल्ट प्रभावित होने की आशंका बन गई है।

मेडिकल कॉलेज के एक डाॅक्टर ने बताया, सैंपल रूम टेंपरेचर (24 से 25 डिग्री) पर रखने पर वह 24 घंटे सुरक्षित रहेगा। लेकिन तापमान 38 से 40 डिग्री हो और सैंपल एक घंटा तो कोरोना संक्रमित मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आ जाएगी। अब इस लापरवाही की पोल खुली तो एजेंसी कह रही है, तकनीकी चूक हुई है। अब ऐसा नहीं होगा। लेकिन सवाल है कि आखिर इस गलती से संक्रमितों की रिपोर्ट कितनी प्रभावी मानी जाएगी?

2756 के सैंपल लिए, रिपाेर्ट नहीं दी
समय पर संक्रमितों की पहचान के लिए सरकार ने मोबाइल वैन से जांच की तैयारी की। शुक्रवार से शुरू आरटीपीसीआर वैन से गांवों में जाकर लोगों के सैंपल जांच की जिम्मेदारी पीओ सिटी सर्विसेज को दी गई। अब तक नवगछिया, बिहपुर व खरीक प्रखंड के 17 गांवों से 2756 सैंपल लिए गए हैं। इनमें 1300 लोगों की जांच हुई, लेकिन उनकी रिपोर्ट अब तक जारी नहीं गई है। लेकिन एजेंसी की जांच रिपोर्ट में देरी से सरकार की समय पर संक्रमितों की पहचान नहीं हो पा रही है। बता दें कि एजेंसी को डेढ़ घंटे में 480 सैंपल की जांच करनी है।

हमने रुट चार्ट बनाकर एजेंसी काे दिया है। खुले में गर्मी में सैंपल रखा है तो एजेंसी से पूछूंगा। यह लापरवाही है। पूछताछ करूंगा। दोबारा ऐसा न हो, यह भी सुनिश्चित कराऊंगा।
- डॉ. उमेश शर्मा, सिविल सर्जन

हमारे कैंपस में वैन काे रखकर जांच करना है,सिक्यूरिटी व बिजली का कनेक्शन हमे देना है, वह करवा दिए हैं। कुछ दिक्कतें जांच के दाैरान अायी थी, उसे हमने कहा है कि एेसा न करें कि खुले में जांच हाे।
डाॅ. हेमंत कुमार सिन्हा, प्राचार्य, जेएलएनएमसीएच

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