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कोरोनावायरस:8000 से अधिक हाे चुके हैं संक्रमित, कई काे अब भी परेशानी लेकिन मायागंज अस्पताल में नहीं खुला पाेस्ट काेविड सेंटर

भागलपुरएक महीने पहले
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  • काेराेना के बाद मरीजाें की क्या है हालत, मेडिकल काॅलेज अस्पताल के पास काेई रिकार्ड नहीं

जिले में अब तक आठ हजार से अधिक लाेग काेराेना संक्रमित हाे चुके हैं। हालांकि इनमें से अधिकतर स्वस्थ हाे चुके हैं, लेकिन अब तक करीब दर्जनभर मरीज ऐसे सामने आए हैं जिनमें दाेबारा काेराेना के लक्षण आ चुके हैं। जिले के एक वरीय फिजिशियन काेराेना पाॅजिटिव हाेने के बाद भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं। मायागंज अस्पताल के एक बड़े अधिकारी चार माह पहले निगेटिव हुए, लेकिन अब भी उनकी सांस फूलती है।

ऐसे मरीजाें की संख्या लगातार बढ़ भी रही है, लेकिन काेराेना के लिए डेडिकेटेड घाेषित मेडिकल काॅलेज अस्पताल में अब तक पाेस्ट काेविड सेंटर नहीं खाेला गया है। जबकि पटना में यह सेंटर खुल चुका है। लेकिन उसके बाद सबसे अधिक काेविड प्रभावित जिले भागलपुर में यह सुविधा शुरू नहीं हाे पाई है।

जिन मरीजाें काे दाेबारा काेराना हाे रहा है वे सामान्य ओपीडी में ही अपना इलाज करा रहे हैं। इससे वहां संक्रमण फैलने का भी खतरा है। पाेस्ट काेविड सेंटर खुलने से वहां केवल काेविड से निकले मरीज के इलाज पर पूरा फाेकस रहेगा। उनके इलाज व टेस्ट के लिए भी विशेष व्यवस्था हाे सकेगी। ऐहतियात भी बरते जा सकेंगे।

जिनका सांस फूल रहा, उनका लगातार फाॅलाेअप करना है जरूरी
कोरोना से उबरने के बाद मरीजाें का शरीर किस हद तक बीमारी से लड़ने लायक तैयार हुआ है, यह न तो मरीज को पता है न मेडिकल काॅलेज अस्पताल के पास काेई रिकार्ड है। अगर पाेस्ट काेविड सेंटर रहता ताे इसका डेटा भी तैयार हाेता। इससे अगर काेराेना के मरीजाें की संख्या बढ़ती ताे अस्पताल काे इलाज में सुविधा हाेती।

कोरोना वार्ड के नोडल पदाधिकारी डॉ. हेमशंकर शर्मा ने कहते हैं कि पोस्ट कोविड सेंटर अस्पताल में नहीं है। ऐसे मरीजाें का ओपीडी में ही इलाज हाेता है, लेकिन अब तक ऐसे कितने मरीज आए हैं इसका काेई रिकार्ड नहीं है। डाॅ. शर्मा कहते हैं कि काेराेना हाेने के बाद सांस लेने में तकलीफ की समस्या रहती है, जिसका फाॅलाेअप हाेना जरूरी है। काेराेना हाेने पर फेफड़े काे नुकसान पहुंच जाता है। सिटी स्कैन कराने से इसका पता चल पाता है।
अभी पाेस्ट काेविड सेंटर का प्लान नहीं
अभी तक पोस्ट कोविड ट्रीटमेंट सेंटर बनाने का प्लान नहीं है। लेकिन दुबारा कोरोना मरीजों के बढ़ने की आशंका काे लेकर तैयारी कर रहे हैं। -डॉ. एके भगत, अधीक्षक, मेडिकल काॅलेज अस्पताल

इन तीन उदाहरण से समझिए, कैसे दाेबारा पाॅजिटिव हाे रहे मरीज

केस वन: डीएन सिंह रोड के 64 साल के ब्रजकिशोर झुनझुनवाला कोरोना पॉजिटिव हुए। होम आइसोलेशन में रहने के बाद उनके कोरोना के सभी लक्षण खत्म हो गए। डॉक्टर ने कुछ दिन और होम क्वारेंटाइन रहने की सलाह दी। इस बीच 18 अक्टूबर को उनकाे अचानक सांस लेने में तकलीफ हाेने लगे।

प्राइवेट डॉक्टर के पास गए तो वहां कोरोना के लक्षण के आधार पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया। वहां जांच में कोरोना पॉजिटिव निकले। इसके बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया। दिक्कत यह है उन्हाेंने ओपीडी में डाॅक्टर काे दिखाया।

केस दाे: मेडिकल काॅलेज अस्पताल की एक हॉस्पिटल मैनेजर 21 सितंबर को पॉजिटिव हाे गईं। 12 दिन बाद रिपोर्ट निगेटिव आने पर हाेम आइसाेलेट हाे गयी। इसके बाद दाेबारा उन्हें, उनके पति एवं पुत्र में कोरोना के सारे लक्षण आ गए। इसके बाद डॉक्टर से दिखाया तो दुबारा दवा दी गयी।
केस तीन: बिहपुर की एक महिला मई में पॉजिटिव हुई। आठ दिन बाद उसकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई। लेकिन दुबारा उन्हें काेराेना हाे गया। उन्हाेंने भी सामान्य ओपडी में अपना इलाज कराया। काेराेना डेडिकेटेड ओपीडी नहीं हाेने के कारण उनका सामान्य मरीजाें की तरह ही इलाज हुआ। डाॅक्टर ने फिर जांच की सलाह दी।

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