रबीउल अव्वल का दिखा चांद:19 को मनाया जाएगा मोहम्मद साहब का जन्मदिन, ईद मिलादुन्नबी पर हजरत मोहम्मद के मुंए मुबारक की हाेगी जियारत

भागलपुर12 दिन पहले
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चांद दिखने के बाद शहर में हजरत का जन्मदिन मनाने की तैयारी शुरू  । - Dainik Bhaskar
चांद दिखने के बाद शहर में हजरत का जन्मदिन मनाने की तैयारी शुरू ।

ईद मिलादुन्नबी यानी इस्लाम के संस्थापक पैगम्बर हजरत मोहम्मद का जन्मदिन 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। गुरुवार को हिदुस्तान के विभिन्न हिस्सों में रबीउल अव्वल का चांद देखा गया। खानकाह शहबाजिया के सज्जादानशीं सैयद इंतेखाब आलम शहबाजी हुजूर मियां साहब ने बताया कि दूसरे राज्यों में रबीउल अव्वल का चांद दिखा है। शरअई शहादत हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

शहादत मिलने के बाद फाइनल एलान किया जाएगा। इधर चांद होने की जानकारी मिलने के बाद शहर में ईद मिलादुन्नबी की तैयारी शुरू कर दी गई। लोगों में उत्साह और खुशी है। ईद मिलादुन्नबी को लेकर शहर में जुलूस-ए-मोहम्मदी निकालने को लेकर बैठ कर बाद में निर्णय लिया जाएगा।

2020 में कोरोना महामारी को लेकर शहर में जुलूस-ए-मोहम्मदी नहीं निकाला गया था। लेकिन इस साल जुलूस-ए-मोहम्मदी निकालने को लेकर लोगों में अभी से ही धूम है। लेकिन जुलूस-ए-मोहम्मदी निकालने का आखिरी निर्णय खानकाह शहबाजिया में बैठक के बाद ही लिया जाएगा।

खानकाह शहबाजिया में जलसा की भी सजाई जाएगी महफिल

ईद मिलादुन्नबी 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस मौके पर खानकाह शहबाजिया में पैगम्बर हजरत मोहम्मद के मुंए मुबारक यानी दाढ़ी के बाल की जियारत करायी जाएगी। इसके अलावा गिलाफे काबा की जियारत भी श्रद्ध्रालु कर सकेंगे। इस मौके पर शहर के विभिन्न इलाकों में जलसा की महिफल सजायी जाएगी और खानकाह शहबाजिया में भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पैगम्बर साहब दीन-दुखियों के सच्चे सेवक थे : मुफ्ती फारूक

मुफ्ती मौलाना फारूक आलम अशरफी ने बताया कि पैगम्बर हजरत मोहम्मद को अल्लाह ने एक अवतार के रूप में पृथ्वी पर भेजा था, क्योंकि उस समय अरब के लोगों के हालात बहुत खराब हो गए थे। लोगों में शराबखोरी, जुआखोरी, लूटमार, वेश्यावृत्ति और पिछड़ापन भयंकर रूप से फैला हुआ था। कई लोग नास्तिक थे।

ऐसे माहौल में मोहम्मद साहब ने जन्म लेकर लोगों को अल्लाह का संदेश दिया। हजरत को लोगों को इस्लाम धर्म समझाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। दुश्मनों के जुल्मो-सितम को सहन करना पड़ा। वे जरूरतमंदों को कभी खाली हाथ नहीं लौटाते थे। वे दीन-दुखियों के सच्चे सेवक थे। उन्हाेंने औरतों की कद्र करना लोगों को समझाया।

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