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हालात:कोविड सेंटर के आइसाेलेशन में न डाॅक्टर न टेक्नीशियन, मरीज काे कर रहे रेफर

भागलपुर2 महीने पहले
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काेविड केयर सेंटर के आइसाेलशन वार्ड का खाली पड़े बेड।
  • प्रधान सचिव काे दिखाने को 40 बेड पर ऑक्सीजन, 13 दिन में केवल एक मरीज का रातभर इलाज

स्वास्थ्य विभाग ने काेराेना मरीज के इलाज के लिए घंटाघर स्थित काेविड केयर सेंटर में 40 बेड का आइसाेलेशन वार्ड केवल प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत काे दिखाने के लिए बनाया। बताया था कि यहां सभी 40 बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा रहेगी। ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजाें का यहां इलाज हाेगा। अगर जरूरत हाेगी तभी उन्हें मेडिकल काॅलेज अस्पताल के आइसाेलेशन वार्ड में भेजा जाएगा।

31 जुलाई काे भागलपुर पहुंचे प्रधान सचिव के जाने के बाद अब तक केवल एक मरीज का रातभर यहां इलाज हुआ है। जबकि ऑक्सीजन की जरूरत पड़ते ही 36 मरीज काे मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया। काेविड सेंटर में आईसोलेशन वार्ड इसलिए बनाया गया कि मायागंज अस्पताल का लोड कम हाे, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ है। मरीज को इलाज नहीं मिल रहा है।

ऑक्सीजन लेवल 92 से नीचे जाते ही मरीज को मेडिकल कॉलेज अस्पताल करना है रेफर
ऑक्सीजन लेवल अगर 92 के नीचे आना शुरू हो जाए तो तत्काल मरीज काे मायागंज भेज देना है। इसके लिए यह जरूरी है कि लगातार मरीज का ऑक्सीजन लेवल चेक हाेता रहे। आइसोलेशन वार्ड के नोडल पदाधिकारी डॉ. हेमशंकर शर्मा के अनुसार ऑक्सीजन लेवल जैसे ही 92 से नीचे जाता है, मरीज की हालत गंभीर हाेने लगती है। मंगलवार को मुंगेर सदर अस्पताल से जिस मरीज को रेफर किया गया था, उसका ऑक्सीजन लेवल 45 पर था। इसलिए उसे नहीं बचाया जा सका। एक घंटे में ही उसकी मौत हो गयी।

4 नर्स की हर पाली में जरूरत, है केवल एक

मरीजाें काे ऑक्सीजन लगाने के लिए 24 घंटे एमबीबीएस डाॅक्टर की तैनाती हाेनी चाहिए। लेकिन यहां पहले से तैनात दाे आयुष डाॅक्टर ही हैं। जरूरत पड़ने पर दाे एमबीबीएस डाॅक्टर काे बुलाने की सुविधा दी गयी है। हर पाली में एक नर्स हैं। जबकि 10 मरीज पर एक नर्स की जरूरत हाेती है। इसलिए हर पाली में चार नर्स की तैनाती हाेनी चाहिए। लगातार ऑक्सीजन का लेवल चेक करने के लिए टेक्नीशियन हाेना चाहिए, लेकिन उसकी तैनाती ही नहीं की गयी है। वार्ड अटेंडेंट के नाम पर एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी तैनात है। इसलिए इसका भी सहयाेग इलाज में नहीं लिया सकता है। इसलिए जैसे ही किसी मरीज की तबियत ज्यादा खराब हाेती है, उसे रेफर करने की तैयारी शुरू हाे जाती है। यह पता भी नहीं चल पाता है कि मरीज का ऑक्सीजन लेवल क्या है।

24 घंटे में तीन बार चेक हाेना चाहिए ऑक्सीजन

काेविड केयर सेंटर में ऑक्सीजन सिलेंडर व पल्स ऑक्सीमीटर है। 24 घंटे में कम-से-कम तीन बार पल्स ऑक्सीमीटर से मरीजाें का ऑक्सीजन लेवल चेक हाेना चाहिए। लेकिन यह नहीं हाे पा रहा है। बुधवार काे काेविड केयर सेंटर से भर्ती मरीज काे कुछ देर बाद ही मायागंज रेफर किया गया। वह चार अगस्त से सेंटर में था। बुधवार को सांस लेने में तकलीफ पर उसे मायागंज भेजा गया। उसका ऑक्सीजन लेवल 86 प्रतिशत था। यदि उसकी नियमित जांच हाेती ताे 92 से नीचे जाते ही तुरंत उसे मायागंज भेज दिया जाता।

जिले में डाॅक्टर की है कमी, किसी तरह चला रहे काम

विभाग के पास जिले में मात्र 50 डाॅक्टर हैं, इसलिए उसी में किसी तरह काम चला रहे हैं। फिर भी जाे कमियां हैं उसे दूर करने का प्रयास कर रहे हैं।-डाॅ. विजय कुमार सिंह, सिविल सर्जन

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