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सेहत से खिलवाड़:नोडल कह रहे- हम मजदूर टाइप, सीएस कहेंगे तो करेंगे जांच; सीएस बोले- कहीं-कहीं हो रही जांच, कहां, यह नहीं है पता

भागलपुरएक महीने पहले
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माउंट असीसी से छुट्टी के बाद निकलते छात्र-छात्राएं। अब बच्चे स्कूल आने लगे हैं, इसलिए कोरोना की रैंडम जांच जरूरी है, ताकि घर में कोई दूसरा संक्रमित न हो जाए। - Dainik Bhaskar
माउंट असीसी से छुट्टी के बाद निकलते छात्र-छात्राएं। अब बच्चे स्कूल आने लगे हैं, इसलिए कोरोना की रैंडम जांच जरूरी है, ताकि घर में कोई दूसरा संक्रमित न हो जाए।
  • स्कूलों में नौनिहालों को कोरोना संक्रमण से बचाने का आदेश सीएस की फाइल में क्वारेंटाइन
  • 11 जनवरी से जिले के स्कूलों में करनी थी कोरोना की रैंडम जांच
  • विशेषज्ञों का दावा- छात्र बन सकते हैं कोरोना वायरस के कैरियर

स्वास्थ्य विभाग नौनिहालों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। चार जनवरी से स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई शुरू हुई। इसके तीन दिन बाद ही मुंगेर में दो दर्जन स्टूडेंट्स कोरोना संक्रमित हो गए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के निर्देश पर निदेशक प्रमुख डॉ. एनसी प्रसाद ने स्कूलों में रैंडम जांच के जो निर्देश दिए, वह कागजों में ही सिमट गए।

जिम्मेदारों ने स्कूलों में कोरोना की रैंडम जांच ही नहीं करवाई। 11 दिन से आदेश सिविल सर्जन की फाइलों में कैद पड़ी है। जांच तो दूर, इसकी योजना तक नहीं बनी। स्टूडेंट्स पर संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। डॉक्टरों की माने तो वायरस अभी खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में संक्रमितों की पहचान जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टूडेंट्स की इम्युनिटी अच्छी है।

उनकी सेहत पर फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन वे कोरोना कैरियर हो सकते हैं। घर में वे वृद्ध दादा-दादी, नाना-नानी को संक्रमित कर सकते हैं। इस जानलेवा हरकत को सुधारने की बजाय अफसर गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं। कोरोना के नोडल अफसर यह कह रहे हैं कि हम मजदूर टाइप हैं। सीएस बोलेंगे तो जांच शुरू हो जाएगी। सीएस कह रहे हैं, कहीं-कहीं जांच हो रही है, लेकिन कहां? यह उन्हें नहीं पता।
रैंडम जांच जरूरी है, इससे एक डाटा भी बनेगा
सरकार ने स्कूलों में भी काेरोना जांच करने के निर्देश दिए हैं। यह अलग बात है कि यहां 18 साल से कम उम्र के लोगों में संक्रमण कम देखा गया है। लेकिन रैंडम जांच में संक्रमित मिलते हैं। यह पता करना भी जरूरी है कि कितनों में एंटी बॉडी बनी है। यह एक स्टडी भी हो सकती है कि हमारे जिले में कितने बच्चों का इम्युन सिस्टम मजबूत है। -डॉ. हेमशंकर शर्मा, नोडल अफसर, कोरोना

जांच की कोई जानकारी नहीं है
स्कूलों में रैंडम जांच के लिए हमारे पास कोई पत्र नहीं आया है। ऐसी किसी जांच की जानकारी भी नहीं है। स्कूलाें में विद्यार्थी आ रहे हैं। 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई हाे रही है। शनिवार तक 10वीं की प्रैक्टिकल परीक्षा है। 9वीं की पढ़ाई कई स्कूलाें में सस्पेंड है। -संजय कुमार, डीईओ

याद नहीं, लेकिन कहीं कहीं हो रही है जांच -डॉ. विजय कुमार सिंह, सिविल सर्जन
11 जनवरी से स्कूलों में कोरोना जांच होनी थी? कहां-कहां हुई?

-कुछ-कुछ जगहाें पर बच्चाें काे बुलाकर जांच करवाई जा रही है।
कितने स्कूलाें में कहां-कहां जांच हुई?
-यह ताे याद नहीं है। लेकिन कहीं-कहीं हाे रहा है।
यह कैसी जांच है, जो पता ही नहीं चल रही है?
-प्रखंडाें में जाे जांच हाेती है। उसी में जिसे जरूरत है, उन बच्चाें की जांच कराई जाती है।
शहर में ताे कहीं ऐसा नहीं दिख रहा है। यदि जांच हो रही है तो कहां हो रही? बता दीजिए?
- ऐसा नहीं है तो यहां भी हो ही जाएगा। इसके बाद बता देंगे।

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