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सदर अस्पताल में बख्शीश के नाम पर उगाही:लेबर रूम में परिजनाें से वसूले 900 रुपए नर्साें और स्वीपराें ने बांट लिए पैसे, नवजात बुखार से तड़पता रहा पर नहीं देखा

भागलपुर9 दिन पहले
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रजनी देवी के नवजात को 11 घंटे बाद मिली बुखार की दवा। - Dainik Bhaskar
रजनी देवी के नवजात को 11 घंटे बाद मिली बुखार की दवा।
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सदर अस्पताल में बख्शीश के नाम पर मरीजों से उगाही चल रही है। शनिवार शाम 4 बजे अस्पताल में रजनी देवी की नाॅर्मल डिलीवरी हुई। उसने बच्चे को जन्म दिया। जन्म के साथ ही लेबर रूम की नर्साें और स्वीपराें ने 900 रुपए बख्शीश के नाम पर वसूल लिए। तीन नर्सों के लिए 200-200 और तीन स्वीपर के लिए 100-100 रुपए वसूले गए।

इस बख्शीश के बाद भी नवजात को न तो किसी डॉक्टर ने देखा और न ही किसी ने कोई चिकित्सीय सलाह दी। इतना ही नहीं, हद तो तब हो गई, जब रात दाे बजे बच्चे काे तेज बुखार आया। वह रविवार दोपहर 2 बजे तक रोता रहा और लेबर रूम की नर्सें परिजनों को ओपीडी और एसएनसीयू तक दौड़ाती रही।

लेकिन किसी ने भी बुखार की सामान्य दवा पारासिटामाेल नहीं दी। सीएस की पहल पर एसएनसीयू की नर्साें ने अनमने ढंग से बिना बुखार मापे ही अंदाज से दवा पिला इंडोर में भेज दिया। आगे कौन सी दवा चलेगी, इसकी भी सलाह नहीं दी। बता दें कि 21 अगस्त को भी अस्पताल में रजनी को एक महिला दलाल मुंदीचक के निजी जांच घर ले गई थी।

सबने दाैड़ाया पर किसी ने बुखार भी नहीं मापा
रजनी की मां नीलम देवी ने बताया, बुखार हाेने के बाद बच्चा रो रहा है। सुबह नर्स से कहा तो बताया, डाॅक्टर नहीं बैठे हैं। बोलीं-नीम गाछ के पास दिखाइए। यहां भी डॉक्टर नहीं थे। एसएनसीयू में 9 बजे आने को कहा। 10 बजे तक डॉक्टर नहीं आए थे। यहां नर्सों ने ओपीडी में दिखाने को कहा। बोलीं-डॉक्टर बोलेंगे तो भर्ती कर लेंगे। रविवार के कारण ओपीडी बंद थी। जब नर्स से डॉक्टर के न होने की बात कही तो उसने कहा-बाहर दिखा आईए।

वायरल फीवर के दौर में भी ऐसी लापरवाही
बता दें कि वर्तमान में बच्चों में वायरल फीवर बढ़ रहा है। जिस एसएनसीयू में 24 घंटे डाॅक्टर की तैनाती हाेनी चाहिए, वहां 2-4 घंटे भी ही डाॅक्टर मिलते हैं। बच्चाें के डाॅ. कुंदन शर्मा और डाॅ. तरुण कुमार पटना ट्रेनिंग में गए हैं। इमरजेंसी ड्यूटी में आई स्पेशलिस्ट डाॅ. एनके वर्मा सुबह से रात तक की ड्यूटी में हैं पर नर्साें ने परिजनाें काे वहां तक नहीं भेजा और न ही उन्हें सूचना दी। डाॅ. वर्मा ने बताया, मेरे पास मरीज आते तो दवा जरूर दी जाती।

  • किसी की शिकायत नहीं मिली है। रात 2 बजे से दोपहर तक परिजन को क्यों दौड़ाया गया, इसकी जांच करेंगे। पैसे लेने की शिकायत आने पर नर्सों पर कार्रवाई करेंगे। - डाॅ. उमेश शर्मा, सिविल सर्जन
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