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डीआरडीए सर्टिफिकेट केस:बैंकों के पक्ष से अफसर सहमत नहीं, वकीलों की आपत्ति खारिज; सरकारी खाते से सृजन में गए 89.83 करोड़ बैंकों को 30 दिन में लौटाने होंगे

भागलपुर14 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • डीआरडीए ने बैंकाें से राशि वसूली काे 20 मार्च 2020 काे किया था सर्टिफिकेट केस

सृजन घाेटाला में डीआरडीए से दाे बैंकाें के खाते से 89.83 कराेड़ की अवैध निकासी की वसूली को किए गए सर्टिफिकेट केस में मंगलवार काे आदेश जारी हुआ। दाेनाें बैंकाें के वकीलाें के रखे पक्षाें काे स्वीकारयाेग्य नहीं माना गया। बैंकाें की आपत्ति खारिज कर दी। साथ ही इंडियन बैंक काे 49 कराेड़ 64 लाख 9 हजार 674 रुपए और बैंक ऑफ बड़ाैदा काे 40 कराेड़ 18 लाख 99 हजार 737 रुपए 30 दिना में डीआरडीए काे लौटाने के निर्देश दिए। सर्टिफिकेट केस की सुनवाई डीडीसी सह सर्टिफिकेट अफसर सुनील कुमार ने की।

जारी आदेश में 30 अप्रैल तक अभिलेख रखने को कहा है। कहा है कि बैंकाें से उपलब्ध कराए साक्ष्याें से स्पष्ट है कि डीआरडीए ने राशि बैंक में जमा की थी। इसकी सुरक्षा की जवाबदेही बैंकाें की थी। बैंक इसमें फेल रहे। बैंक ने पारदर्शिता व बैंकिंग नियमाें का उल्लंघन किया। इस संबंध में डीआरडीए के कराए केस सीबअीआई के अधीन हैं। 19 मार्च काे हुई सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्याें से स्पष्ट है कि सर्टिफिकेट केस जिन बैंकाें पर हुआ, वे बैंक राशि की भरपाई के लिए जवाबदेह हैं। इसलिए बैंकाें की आपत्ति खारिज की गई। निर्देश दिया गया है कि आदेश जारी हाेने के 30 दिन में राशि डीआरडीए काे लौटाएं।

डीआरडीए ने बैंकाें से राशि वसूली काे 20 मार्च 2020 काे किया था सर्टिफिकेट केस

पिछले साल लाॅकडाउन में नहीं शुरू हो सकी थी मामले की सुनवाई
राशि वसूली को डीआरडीए ने सबसे अंत में केस किया था। सर्टिफिकेट केस के लिए डीआरडीए डायरेक्टर ने जिला नीलाम पत्र शाखा के प्रभारी पदाधिकारी काे 14 मार्च 2020 काे प्रस्ताव भेजा था। इसमें डीआरडीए से सृजन घाेटाले में बैंकाें द्वारा 89 कराेड़ 83 लाख, 9 हजार 411 रुपए की हेराफेरी की बात कही गई थी। मामले में महालेखाकार से हुई जांच और दी गई रिपाेर्ट के आधार पर संबंधित बैंकाें पर सर्टिफिकेट केस किया जाना है। इसके बाद 20 मार्च काे सर्टिफिकेट केस किया गया। लेकिन पिछले साल इसके बाद से ही लाॅकडाउन लगा और मामले में सुनवाई शुरू नहीं हाे सकी। इसकी सुनवाई में गति पिछले साल के अंत में तेज हुई और अंतिम सुनवाई मार्च में हुई। इसके बाद आदेश सुरक्षित रखा गया। अब इस मामले में आदेश जारी किया गया है।

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