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  • On The First Day Of The New Year, If The First Case Is Of Murder, Then Good For The Police Stations, If The Chair Is Shaken During Cleaning, Then The Police Station Is In Danger.

अंधविश्वास की गिरफ्त पुलिस, होते हैं टोने-टोटके:नए साल के पहले दिन पहला केस मर्डर का हो तो थानों के लिए शुभ, सफाई के समय कुर्सी हिली तो खतरे में थानेदारी

भागलपुरएक महीने पहलेलेखक: राकेश पुरोहितवार
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भागलपुर समेत राज्य के अन्य जिलों की पुलिस लंबे समय से अंधविश्वास की गिरफ्त में है। घटनाएं न हो, इसके लिए थानों में पुलिसवाले कई तरह के टोने-टोटके करते हैं। हर थाने में अंधविश्वास इतनी गहरी है कि इसकी शुरुआत कब हुई, किसी पुलिसकर्मी को पता नहीं है। नए साल के पहले दिन यानी पहली जनवरी को अगर पहला केस हत्या का हो तो उसे शुभ माना जाता है।

इतना ही नहीं, थानों में रखा कलम या डंडा गिर जाने पर उसे मुंह से थूक-थूका कर दोष को काटने की कोशिश करते हैं। इलाके में घटनाएं न हो, थानेदार की कुर्सी बची रहे, इसके लिए हर माह थानों में पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की कथा होती है। साफ-सफाई के दौरान अगर थानेदार की कुर्सी अपने स्थान से हट जाता है तो थानेदारी को खतरे में समझा जाता है।

हर महीने सभी थानों में पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की कथा भी होती है

1. खड़ा डंडा या हथकड़ी गिरना, यानी बड़ी घटना होना : थानों में रखा पुलिस का खड़ा डंडा या हथकड़ी जमीन पर गिर जाए है तो इसे मनहूस माना जाता है। कयास लगाया जाता है कि कोई बड़ी घटना होने वाली है। अगर खड़ा डंडा गिर जाए तो उसे तुंरत पानी से धोया जाता है या थूक-थूकाया जाता है।

2. एफआईआर बुक और स्टेशन डायरी सटा तो मुंशी की खैर नहीं : एफआईआर बुक और स्टेशन डायरी अगर सट जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। इसके सटने से माना जाता है कि थाने पर कोई आफत आने वाली है। इसलिए दोनों को थाने में अलग-अलग अलमारी या स्थान पर रखा जाता है।

3. शाम में डकैती हुई तो उसे सिर्फ डी बोलना है : अगर शाम में डकैती हुई तो उसे सिर्फ डी बोलना है। थानेदार अगर किसी सीनियर अफसरों को डकैती की सूचना देते हैं तो सिर्फ यही कहा जाता है कि सर.. डी हो गया है। शाम में पुलिसवाले डकैती नहीं बोलते। ऐसा इसलिए क्योंकि बोलने से घटनाएं हो जाती है।

4. हत्या होने पर पुलिस मौके से कागज भी लौटा कर नहीं लाती है : हत्या, हादसा में मौत या किसी तरह की मौत मामले की जांच में अगर पुलिस को जाना रहता है तो उतने ही कागज, कार्बन, पिन लेकर जाती है, जितने को लौटा कर न लाना पड़े। बचे कागज, कार्बन, पिन, फॉर्म आदि को अछूत माना जाता है।

सोच ही ऐसी हो गई कि मिथक को सच मान लेते हैं : रिटायर्ड डीएसपी
बिहार पुलिस के रिटायर्ड डीएसपी राजवंश सिंह का कहना है, जब तक पुलिसवाले अपने कर्म पर भरोसा नहीं करेंगे, तब तक ऐसी अंधविश्वासी परंपराएं चलती रहेंगी। थाना स्तर पर काम करने वाले पुलिसकर्मी या थानेदारों की ऐसी सोच हो गई कि वे इन मिथकों को सच मान लेते हैं। हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। अगर थाने में रखा खड़ा डंडा गिर जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। जबकि हकीकत में ऐसी कोई बात नहीं है।

5. पहली एफआईआर हत्या की हो तो वह शुभ है : नए साल की पहली एफआईआर अगर हत्या की हो तो पुलिसवाले शुभ मानते हैं। शुभ से आशय है कि हत्या से साल की शुरुआत होने पर आने वाले समय में बड़ी घटनाएं कम होगी, ऐसी मिथक है।

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