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कोविड वार्ड में एंट्री नहीं आसान:नर्सों के भरोसे वार्ड, तीन दिन से नहीं दिखे डॉक्टर, सभी दवा भी नहीं

भागलपुरएक महीने पहलेलेखक: संजय कुमार
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गंभीर मरीजों के परिजन बुलाते हैं तो नर्सें चिल्लाने लगती हैं, तुरंत नहीं आतीं, डॉक्टर नर्सों से ही हालत पूछ दवा लिखकर दूर से ही चले जाते हैं - Dainik Bhaskar
गंभीर मरीजों के परिजन बुलाते हैं तो नर्सें चिल्लाने लगती हैं, तुरंत नहीं आतीं, डॉक्टर नर्सों से ही हालत पूछ दवा लिखकर दूर से ही चले जाते हैं
  • संक्रमण की खौफनाक लहर में मायागंज अस्पताल के कोरोना वार्ड से भास्कर टीम की आंखों देखी हकीकत

मायागंज अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। मरीजों ने तीन दिन से वार्ड में डॉक्टरों को नहीं देखा। नर्सों ने व्यवस्था संभाल रखी हैं। वे इंजेक्शन लगाती हैं। यूरिन पास करने के लिए कैथेटर लगाती हैं। पर्याप्त दवा भी नहीं मिल रही। दैनिक भास्कर की टीम ने आइसाेलेशन वार्ड का जायजा लिया तो पूरी हकीकत सामने आ गई।

अव्यवस्थाओं के बीच मरीज परिजनों की केयर और नर्सों की सहायता से ठीक भी हो रहे हैं, लेकिन कुछ गंभीर मरीजों के मामले में लापरवाही भी गंभीर है। आलम यह है कि परिजनों के 4-5 बार बुलाने पर नर्सें भी झल्ला रही हैं। वे सही ढंग से जवाब तक नहीं देतीं। डॉक्टर नर्सों से मिलते हैं।

नर्सों के जरिए वे मरीजों की हालत जानते हैं और फिर पर्चे पर चंद सलाह लिखकर मरीजों को देखे बिना ही चले जाते हैं। तारापुर के माधोडीह के रहने वाले मिथिलेश कुमार (45) आइसोलेशन वार्ड में हैं। वे किशनगंज में नर्सरी चलाते हैं। होली में घर आए ताे उन्हें बुखार आ गया। दवा ली। ठीक हुए, लेकिन फिर बुखार चढ़ने लगा।

पहले असरगंज में डॉक्टर को दिखाया। टाइफाइड का इलाज चला, लेकिन मर्ज बढ़ता गया। मुंगेर सदर हॉस्पिटल में भर्ती हुए, लेकिन तबीयत बिगड़ती गई तो निजी क्लीनिक में भर्ती हो गए। पांच दिन में 4 लाख फूंक दिए। फेफड़े में 80 प्रतिशत इंफेक्शन बता उसे घर ले जाने को कहा। पत्नी खुशबू ने पति को मायागंज अस्पताल में 29 अप्रैल को भर्ती कराया। कमरा-203 के बेड-44 पर अब मिथिलेश ठीक हो रहे हैं। खुशबू नर्स को धन्यवाद देती हैं, लेकिन अव्यवस्था बताने से नहीं रोक पातीं।

यूरिन पाइप खोलने कोई नहीं आया

खुशबू ने बताय, 17 दिन से पति के साथ हूं। बिना पीपीई किट के रहती हूं। अस्पताल से पति के लिए खाना आता है, उसी में खा लेती हूं। कभी डॉक्टर को इलाज करते नहीं देखा। नर्स ही ऑक्सीजन लेवल देख कमरे में बैठे डॉक्टरों को रिपोर्ट करती थी और सुई देती थी। एक बार बाहर से 600 रुपए की दवा मंगाई। बाकी यहीं मिला।

कहती हैं, नर्स देवता हैं लेकिन उनके व्यवहार से सभी दुखी रहते हैं। बुलाने पर नहीं आती हैं। 5-6 बार दौड़ने पर नर्स चिल्लाने लगती हैं। पति के पेशाब की पाइप में प्रॉब्लम थी। उसे निकालने मिन्नतें कीं, लेकिन मदद नहीं मिली। सुबह झारखंड से भाई को बुलाया तो किसी कर्मचारी को लेकर आया। तब पाइप हटा। 4 मई को लिए ब्लड सैंपल की रिपोर्ट अब तक नहीं मिली।

ग्राउंड फ्लोर पर बेड-6 पर कटोरिया के चंदन शर्मा भर्ती हैं। दो दिन पहले एडमिट हुए। ऑक्सीजन लेवल काफी कम है। एक्सरे रिपोर्ट खराब है। चंदन के दोनों फेफड़े डैमेज हैं। शुक्रवार को एचआरसीटी हुई, रिपोर्ट नहीं मिली। चंदन की मां ने बताया, यहां पर्याप्त दवाई नहीं मिल रही है। इरगोमेट्रिन इंजेक्शन बाहर से खरीदना पड़ा। आज थोड़ा ठीक है। डॉक्टर को तीन दिन से नहीं देखा। नर्स इंजेक्शन लगाती हैं। वही कमरे में डॉक्टर को हालत बताती हैं और डॉक्टर पर्ची पर दवा लिख देते हैं।

परेशानी है, पर न डॉक्टर आ रहे न नर्स

ग्राउंड फ्लोर पर ही पूर्णिया के सधुआ के 67 साल के जयप्रकाश सिंह गुरुवार से बेड-21 पर भर्ती हैं। सांस लेने की दिक्कत थी। दो दिन से ऑक्सीजन कैप मुंह पर लगा है। बेचैनी में उठ कर बैठ जाते हैं। बेचैनी दूर करने को मौके पर ना नर्स होती हैं ना ही डॉक्टर। डॉक्टर मॉर्निंग राउंड में उन्हीं मरीजों की ओर जाते हैं, जो ज्यादा गंभीर होता है। बाकी का इलाज नर्स ही कर रही हैं। परिजन कहते हैं कि नर्स को बुलाने को मिन्नतें करनी पड़ती है।

सिर्फ एक्सा प्रीमियम को छोड़ सभी दवा है

नर्सिंग स्टाफ इंचार्ज सुलोचना ने बताया, कोरोना के इलाज की सभी दवा है। मेनिटोल, मेट्रोन, डीएल, डीएस, एनएल, डीएनएस, एनएस, सीफो, कैडिमोल इंजेक्शन हैं। सिर्फ एक्सा प्रीमियम नहीं है। यह हर्ट में काम आता है। इसकी सप्लाई सरकारी अस्पतालों में नहीं है।

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