अगस्त क्रांति:लाजपत पार्क में क्रांतिकारियों पर बरसी थीं गोलियां, ट्रेन को हाईजैक कर सत्याग्रहियों ने चलाई थी स्वराज गाड़ी

भागलपुर4 महीने पहलेलेखक: शिव शंकर सिंह पारिजात
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लाजपत पार्क - Dainik Bhaskar
लाजपत पार्क

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 8 अगस्त, 1942 को “भारत छोड़ो आन्दोलन’ की घोषणा व “करो या मरो’ का नारा देने के तीसरे दिन 11 अगस्त को पटना सचिवालय पर राष्ट्रीय झंडा फहराने में सात युवकों की शहादत के साथ ही देश में चारों तरफ क्रांति की ज्वाला भड़क उठी थी। बिहार में भी सरकारी इमारतों व थानों को क्षतिग्रस्त करने के साथ टेलीफोन की लाइन और तार काटे गए। रेल की पटरियां उखाड़ी गईं और स्टेशन जलाए गए। भागलपुर में यह आंदोलन अत्यंत उग्र हो उठा था, क्योंकि पटना के सात शहीदों में इस जिले के लाल सतीश झा भी थे। क्रांतिकारियों ने 20-21 अगस्त, 1942 को पीरपैंती, कहलगांव, घोघा, सबौर, नाथनगर, अकबरनगर, सुल्तानगंज और गनगनिया स्टेशनों पर तोड़फोड़ की और कागजातों को जला डाला। रेल इंजनों और लाइनों को भारी क्षति पहुंचाई। पीरपैंती आउटर सिग्नल के पास मजरोही पुल व कहलगांव और घोघा रेलवे स्टेशनों पर भीषण तोड़फोड़ की गई। बीरबन्ना, रामपुर आदि गांवों के पास रेल की पटरियां उखाड़ डालीं।

इससे पहले 16 अगस्त को भागलपुर स्टेशन के मालगोदाम में घुसने को आमादा भीड़ पर गाेराें की पुलिस ने गोली चला दी थी। इसमें कई मारे गए थे। इससे उत्तेजित भीड़ ने स्टेशन, थाना, डाकघर आदि में घुसकर आग लगा दी थी। 17 अगस्त की सुबह भी सशस्त्र पुलिस ने भागलपुर स्टेशन पर जुटे आंदोलनकारियों पर गोली चला दी थी, जिसमें एक व्यक्ति शहीद हो गया और कई घायल हुए थे। 17 अगस्त को क्रांतिकारी सियाराम सिंह के नेतृत्व में सुल्तानगंज स्टेशन पर खड़ी मालगाड़ी को लूटने के लिए हमला हुआ, जिसमें करीब 5 लोग अंग्रेज पुलिस की गोली के शिकार हुए थे।

अगस्त क्रांति के दिनों में भागलपुर में हुई घटनाओं में दो खास उल्लेखनीय हैं। पहली घटना है, आंदोलनकारियों द्वारा “स्वराज ट्रेन’ चलाना। दूसरा लाजपत पार्क में इकट्ठे हुए क्रांतिकारियों पर गोरी हुकूमत द्वारा गोली चलाना। आंदोलनकारी छात्रों ने स्वतंत्रता सेनानी अमृत कौर के नेतृत्व में भागलपुर स्टेशन पर खड़ी गया जानेवाली ट्रेन पर कब्जा कर लिया और इसके इंजन को तिरंगे से सजाकर और इसकी बोगियों पर देशभक्ति के नारे लिख इसे “स्वराज गाड़ी’ का नाम दे दिया।

उस ट्रेन पर सवार अंग्रेज पैसेंजरों को हिंदुस्तानी ड्रेस भी पहना दिया। इतिहासकार रमन सिन्हा बताते हैं कि यह स्वराज गाड़ी नाथनगर स्टेशन तक अमृत कौर के नेतृत्व में चली और जमालपुर से किऊल तक शहीद लक्ष्मी चौधरी ने इसकी कमान संभाली। दूसरी घटना 15 अगस्त, 1942 की शाम की है, जब लाजपत पार्क में हो रही क्रांतिकारियों की सभा पर पुलिस कप्तान स्टाॅक्स ने लाठीचार्ज कराने के साथ गोलियां चलवाईं। इसमें कई लोग जख्मी हाे गए थे।

इस घटना की तुलना लोग जलियांवाला बाग कांड से करते हैं। 13 अगस्त को नाथनगर में उग्र भीड़ ने हजारीबाग सेंट्रल जेल से भागलपुर लाई जा रही क्रांतिकारी सरस्वती देवी को पुलिस कस्टडी से छुड़ा लिया था। इसके बाद लाजपत में उनकी सभा हुई। अगले दिन पुलिस ने सरस्वती देवी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके विराेध में अगले दिन क्रांतिकारियों ने लाजपत पार्क में प्रतिरोध-सभा की थी।

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