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रिपोर्ट से खुलासा:काेराेना हाेने पर फेफड़े में संक्रमण का खतरा, 60% तक खराब होने की आशंका

भागलपुर14 दिन पहले
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59 वर्षीय कोरोना मरीज के फेफड़े में 60 प्रतिशत संक्रमण मिला।
  • मायागंज अस्पताल में 53 प्रतिशत काेराेना मरीजाें के फेफड़े में मिला संक्रमण
  • निगेटिव हाेने के बाद भी मरीज के फेफड़े में लंबे समय तक रहता है संक्रमण का असर

मेडिकल काॅलेज अस्पताल में भर्ती काेराेना मरीजाें में से करीब 53 फीसदी राेगी के फेफड़े में संक्रमण मिला है। मेडिकल काॅलेज अस्पताल की रिपाेर्ट से इसका खुलासा हुआ है। इसमें वहां के 500 से ज्यादा मरीजाें के एक्स-रे व सिटी स्कैन रिपाेर्ट के अध्ययन से इसका पता चला है। इनमें कई मरीजाें की रिपाेर्ट के मुताबिक फेफड़े इस कदर खराब मिले कि सप्ताह भर के अंदर ही स्थिति बिगड़ गई।

सात दिन पहले तक जिसके फेफड़े में संक्रमण नहीं था, उसे काेराेना हाेने के ठीक बाद इतना अधिक संक्रमण हाे गया कि बिना ऑक्सीजन के सांस लेने तक मुश्किल हाेने लगी थी। इसमें से कई मरीजाें की इलाज के दाैरान ही माैत हाे गई। जबकि जाे बच गए, उनका अब भी अलग-अलग डाॅक्टराें की देख-रेख में इलाज चल रहा है।

अब तक 53 प्रतिशत काेराेना मरीजाें में फेफड़े में संक्रमण हाेने की बात अस्पताल की रिपाेर्ट में आई है। इसी अस्पताल से रिटायर हाे चुके एक सर्जरी के पूर्व एचओडी की माैत फेफड़े में ज्यादा संक्रमण की वजह से हाे गयी थी, उनका भी घर में ही इलाज चल रहा था। लेकिन संक्रमण का असर जब ज्यादा हाे गया ताे वेंटिलेटर पर रखा गया...लेकिन जान नहीं बची।

दो माह बाद भी है फेफड़े में संक्रमण
फतेहपुर के एक 60 वर्षीय पुरुष काे काेराेना हाेने के बाद 20 दिनाें तक घर में ही इलाज चला। स्टेराॅयड, खून पतला करनेवाली दवा 20 दिन तक चली। लेकिन काेराेना निगेटिव हाेने के दाे माह बाद भी फेफड़े में संक्रमण है, जिसकी दवा दी जा रही है। 35 वर्ष के एक मरीज के फेफड़े में काेराेना के बाद संक्रमण नहीं हुआ।

क्याेंकि इसके इम्यून पावर उम्रदराज मरीजाें की तुलना में ज्यादा बेहतर थे। 53 वर्षीय काेराेना मरीज के फेफड़े दस दिन के अंदर ही 60 प्रतिशत तक खराब हाे गए। इसमें बीच के हिस्से ज्यादा संक्रमित हुए हैं। 40 वर्षीय काेराेना मरीज के फेफड़े 40 प्रतिशत तक संक्रमित हुए। इसमें फेफड़े का निचला हिस्सा ज्यादा प्रभावित हुआ है।

सांस लेने में तकलीफ हाे ताे नजरअंदाज न करें

रेडियोलॉजिस्ट डॉ एके मुरारका ने बताया कि अबतक करीब पांच सौ काेराेना मरीजों का एक्स-रे हुआ है। इसमें सिटी स्कैन भी कई मरीजों का हुआ है, जिसमें फेफड़े में ज्यादातर संक्रमण मिला है। डॉ हेमशंकर शर्मा ने बताया कि देर से आनेवाले अधिकतर मरीजों के फेफड़े 60 से 70 प्रतिशत तक खराब पाए गए हैं। डॉ राजकमल चौधरी कहते हैं कि सांस लेने में जरा भी तकलीफ हो तो उसे नजरअंदाज न करें, बल्कि अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराएं। डॉ ज्योति चौधरी ने बताया कि कई गर्भवती महिलाओं का भी कोरोना होने पर इलाज किया गया है।

आप जाे जानना चाहते हैं एक्सपर्ट दे रहे जवाब
1. फेफड़े में नुकसान कैसे हाेता है:
फेफड़े में 40 प्रतिशत नुकसान हाेते ही ऑक्सीजन लेवल कम हाे जाता है। सांस लेने में दिक्कत से मरीज काे तत्काल आईसीयू में केयर की जरूरत हाेती है।
2. इलाज कैसे हाेता है: आईसीयू में भर्ती कर तत्काल ऑक्सीजन व दवा दी जाती है, जरूरत के अनुसार वेंटिलेटर और बायपैप मशीन पर भी डाला जाता है।
3. यह स्थायी नुकसान है क्या: फेफड़े में न्यूमाेनिया हाेने के बाद गंभीर असर हाेने लगता है। इससे फेफड़े में स्थायी ताैर पर भी कभी-कभी परेशानी हाे सकती है।
4. निगेटिव हाेने के बाद भी असर: काेराेना निगेटिव हाेने के बाद भी फेफड़े पर कुछ दिनाें तक असर रहता है। इसके अंदरूनी हिस्से में नुकसान हाेने पर सांस लेने की क्षमता भी कम हाेती है।
5. ये उपाय बेहतर: सांस से संबंधित एक्सरसाइज करने से सांस की तकलीफ बहुत हद तक कम हाेती है। इसके लिए बैलून काे भी बार-बार फुलाने से सांस पर कंट्राेल हाेता है।

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