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ब्रेकर से राहगीराें की बढ़ीं मुश्किलें:जिले में एनएच, एसएच और ग्रामीण सड़काें पर मानक की अनदेखी कर बना दिए स्पीड ब्रेकर, हादसों में टूट रहीं हड्डियां

भागलपुर2 महीने पहले
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खरीक के ध्रुवगंज गांव में अमानक स्पीड ब्रेकर। - Dainik Bhaskar
खरीक के ध्रुवगंज गांव में अमानक स्पीड ब्रेकर।

नेशनल हाईवे हाे या स्टेट हाईवे या फिर ग्रामीण सड़कें, सब पर नियम और मानक की अनदेखी कर स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं। गाड़ियाें की स्पीड कम करने और हादसे नियंत्रित करने को ब्रेकर बनाए हैं। लेकिन नतीजा उलट है। ज्यादातर जगहाें पर जहां ब्रेकर बने, वहां इसी ब्रेकर से हादसे हो रहे हैं। मानक के अनुसार ब्रेकर न होने से ऐसा हो रहा है। नियम के मुताबिक दाे तरह हंप और रंबल ब्रेकर बनाने हैं। हंप में डेढ़ मीटर चाैड़ा और माेटा, लेकिन अच्छा स्लाेप के साथ ब्रेकर बनाए जाते हैं। दूसरा रंबल ब्रेकर में 1-1 इंच के 8-10 ब्रेकर हाेते हैं।

लेकिन ग्रामीण और शहर के गली-माेहल्ले में कहीं पाेल ताे कहीं पाइप डालकर ब्रेकर बनाए हैं। गलियाें में 10 इंच चौड़े और 9 इंच ऊंचे ब्रेकर हैं। इससे बाइक सवार अक्सर हादसाें के शिकार हाे रहे हैं। इससे गुजरने पर हिचकाेले खाने से पीठ दर्द की समस्या बढ़ रही है। वाहनों के खराब होने भी आशंका है। डाॅक्टराें के मुताबिक ऐसे स्पीड ब्रेकर्स से गुजरने पर वाहन चालकों की रीढ़ की हड्डी को झटका लगता है। इससे हड्डियां क्रेक या मसल्स डैमेज हो सकती है। यह कुछ दिन बाद कमर दर्द के रूप में सामने आ सकती है।

जानिए, नियम ताेड़कर बनाए गए स्पीड ब्रेकर से हाेने वाली परेशानी

1. कहलगांव: एकचारी-हनवारा सड़क पर रामपुर खड़हरा के पास करीब आधा दर्जन स्पीड ब्रेकर हैं। इस पर कई गाड़ियां उलट चुकी हैं। कहलगांव के सत्कार चौक और एमजीआर सड़क पर भी कई स्पीड ब्रेकर हैं। इस पर पिछले साल टेंपाे से गिरकर महेशामुंडा की एक महिला की मौत हो गई थी।
2. सबाैर: शीतला स्थान गोराडीह मेन रोड पर सरमसपुर से कुशवाहा चौक और जिच्छाे के बीच 2 किलोमीटर के दो जगहाें पर ब्रेकर हैं। ग्रामीण ने बताया, यहां 8 माह पहले चारपहिया वाहन का संतुलन बिगड़ने से हादसे का शिकार हाे गया था और गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। तहबलपुर में एक किलोमीटर में 12 ब्रेकर हैं।
3. सुल्तानगंज : असरगंज-शाहकुंड मेन रोड से जुड़े देवधा-करहरिया ग्रामीण रोड पर शिवमंदिर समेत तीन अन्य जगहों पर बने ब्रेकर मानक के मुताबिक नहीं है। बाहर से आने वाले बाइक सवार दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। पांच साल में ग्रामीण सड़क पर बने ब्रेकर से लगभग दो दर्जन दुर्घटनाएं हाे चुकी हैं।
4. खरीक : ध्रुवगंज की ग्रामीण सड़क पर दो किमी में 31 ब्रेकर है। 8 टूट चुकी है, 23 ब्रेकर बचे हैं। उर्दू मध्य विद्यालय, ध्रुवगंज से दाएं तरफ नागरटोला, अठनिया, बहत्तरा व राघोपुर होते जाह्नवी चौक के पास विक्रमशीला पहुंच पथ पर एनएच से मिलने वाली 8 किमी लंबी सड़क पर ढाई दर्जन से अधिक ब्रेकर हैं।
5. नवगछिया : एनएच-31 पर स्पीड ब्रेकर मानक के मुताबिक है। लाेगाें ने बताया, कई जगहों पर ब्रेकर बने हैं। ऊंचाई ज्यादा हाेने से परेशानी हो रही है। एनएच पर ब्रेकर से पहले बोर्ड नहीं है। पहले वहां लाइट लगाई थी, लेकिन अब वह नहीं जलती है। हाल में ब्रेकर के पास 2 एक्सीडेंट हाे चुके हैं।

स्पीड ब्रेकर के ये हैं मानक
ऊंचाई 10 सेंटीमीटर, लंबाई 3.5 मीटर व वृत्ताकार रेडियस 17 सेंटीमीटर हो।
स्पीड ब्रेकर बनाने का मकसद वाहनों की स्पीड 20 से 25 किलोमीटर करना है।
स्पीड ब्रेकर पर थर्मो प्लॉस्टिक पैंट की पट्टी हो, ताकि रात में दिखाई दे।
चालक को अलर्ट करने को ब्रेकर से 40 मीटर पहले चेतावनी बोर्ड होना चाहिए।

एक्सपर्ट व्यू: कमेटी की मंजूरी के बाद ब्रेकर बनाने का है नियम
पथ निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता सदाशिव प्रसाद सिंह ने बताया, मोहल्ले और गांवाें में लाेग अपने घर के सामने ब्रेकर बनवा लेते हैं। यह गैर कानूनी है। स्पीड ब्रेकर बनाने के लिए डीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनी है। इसमें डीएम, एसएसपी और संबंधित विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हैं। कमेटी स्पीड ब्रेकर के प्रस्ताव पर मंजूरी देगी, तभी निर्माण हाेगा। लेकिन बिना कमेटी की अनुमति के धड़ल्ले से स्पीड ब्रेकर बनाए जा रहे हैं।

सड़काें पर दो तरह के ब्रेकर का प्रावधान है। एसएच पर मानक के मुताबिक ब्रेकर बनाए जाते हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्राें में स्थानीय लाेगाें के दबाव में मानक की अनदेखी कर ब्रेकर बनाए जाते हैं। कहीं नियम ताेड़कर ब्रेकर बनाए हैं, उसे ताेड़ेंगे।
- नवल किशाेर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, पथ निर्माण विभाग

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