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तफ्तीश:निगम में हुए मजदूर घोटाले की जांच में तेजी पुलिस ने शिकायत करने वाले से सबूत मांगे

भागलपुरएक महीने पहले
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  • मेयर के पति जिप अध्यक्ष टुनटुन के पेट्राेप पंप पर काम करने वालाें काे निगम से भुगतान का है आराेप
  • पुलिस मुख्यालय और प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश पर हो रही है जांच

नगर निगम में हुए मजदूर घोटाले की जांच में पुलिस के स्तर पर भी तेजी आ गई है। जोगसर थानेदार अजय कुमार अजनबी ने शिकायतकर्ता अनिल तांती से मामले की आरंभिक जानकारी ली है। पुलिस ने अनिल तांती को सारा सबूत उपलब्ध कराने को कहा है। अनिल ने पुलिस को बताया कि उसके खाते में निगम से पैसे आया था, जबकि वह निगम का कर्मी नहीं है।

इस मामले में अन्य कर्मियों से भी पुलिस मामले की जानकारी लेगी, जिन्हें निगम का सफाई कर्मी बता कर उनके खाते में मजदूरी की रकम जमा हुई थी। फिलहाल पुलिस इस मामले में अधिकृत रूप से कुछ नहीं बता रही है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि पुलिस मुख्यालय और प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश पर मामले की जांच कराई जा रही है।

जोगसर थानेदार मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट एसपी को देंगे, जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। आराेप है कि मेयर सीमा साहा के घर पर काम करने वाले मजदूर उनके पति जिला परिषद अध्यक्ष अनंत साह उर्फ टुनटुन साह के पेट्राेल पंप और अन्य प्रतिष्ठानाें में काम कर रहे थे। जबकि उनके वेतन का भुगतान निगम कर रहा था।

निगम काे हर माह 54,756 रुपए की लगी चपत
सफाई कर्मचारियों के नाम पर मेयर सीमा साहा, उनके पति निवर्तमान जिला परिषद अध्यक्ष टुनटुन साह और निगम प्रशासन की मिलीभगत से घाेटाले का आराेप लगा है। निगम ने सफाई के लिए 1079 कर्मचारी रखे थे। इनमें मेयर पति टुनटुन साह के शाहकुंड स्थित पेट्रोल पम्प, बाइक शोरूम और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के 6 कर्मचारियों को वेतन निगम के सफाई कर्मियों के नाम पर मिलता रहा।

दिसंबर 2019 से अगस्त 2021 तक का वेतन निगम से दिया गया है। इससे निगम के कोष से हर माह 54,756 रुपए और सालाना 6,57,072 रुपए की चपत लगी। मामला तब सामने आया था जब निवर्तमान जिप अध्यक्ष के बाइक शोरूम में काम करने वाले कर्मचारी अनिल ने इसकी शिकायत की थी। उसने कहा था कि दिसंबर 2019 से अगस्त 2021 तक निगम ने उसके खाते में 1,62,488 रुपए डाले थे।

जिप अध्यक्ष के पेट्रोल पंप व बाइक शोरूम के कर्मी माे. अख्तर, माे. कैसर, माे. नजरूल, लाल बहादुर सिंह, दीपक सिंह को भी भुगतान किया गया था। इस मामले को लेकर निगम के 15 पार्षदों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पार्षद एकता मंच की ओर से नगर आयुक्त, डीएम व प्रमंडलीय आयुक्त काे ज्ञापन साैंपा गया था। हाईकोर्ट का भी दरवाजा पार्षदों ने खटखटाया है।

माह के अंत तक ट्रेड लाइसेंस घाेटाले की रिपाेर्ट देगी प्रशासन की टीम
नगर निगम में हुए ट्रेड लाइसेंस घाेटाले की जांच लगभग पूरी हाे चुकी है। सिर्फ फाइनल रिपाेर्ट बनाना बाकी है। जांच कर रहे एडीएम राजेश झा राजा ने बताया कि 30 अक्टूबर से पहले हम अपनी रिपाेर्ट डीएम काे साैंप देंगे। लाइसेंस का डाटा तैयार हाे चुका है, उसके अनुसार जाे मिलान किया गया है, उसमें गड़बड़ी मिली है।

जिसमें दाेषी कर्मचारी काे पहले ही निलंबित किया जा चुका है, जबकि एक कंप्यूटर ऑपरेटर काे हटाया भी गया है। अब रिपाेर्ट जारी हाेने के बाद इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। लेकिन यह फाइनल रिपाेर्ट तैयार हाेने के बाद ही तय किया जाएगा। बता दें कि दिसंबर 2020 में ट्रेड लाइसेंस घाेटाले का खुलासा हुआ था।

इसके बाद निगम प्रशासन ने अपने स्तर से जांच शुरू की थी पर बीच में ही जांच अटक गयी और काेराेना की दूसरी लहर ने इसे ठंडे बस्ते में ही डाल दिया था। जब पार्षदाें ने हल्ला-हंगामा शुरू किया ताे निगम ने दुबारा जांच कमेटी बनाई पर उसने अपनी रिपाेर्ट अब तक नहीं आयी है। अब डीएम के स्तर से जांच चल रही है।

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