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  • Surrender Done If The House Was Attached, Got 10 Years Imprisonment; ADJ 10 Court Also Imposed A Fine Of 25 Thousand Rupees

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आदेश:घर की कुर्की हुई तो किया सरेंडर,10 साल की मिली कैद; एडीजे-10 कोर्ट ने 25 हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया

भागलपुर4 महीने पहले
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  • सुल्तानगंज के दवा व्यवसायी पर हमले के मुजरिम काे मिली सजा

सुल्तानगंज के दवा व्यवसायी चेतन शंकर राजहंस पर कातिलाना हमले में मुजरिम करार सूरज कुमार मंडल को 10 साल की कठोर सजा मिली है। एडीजे-10 आनंद कुमार सिंह ने शनिवार को सूरज को विभिन्न धाराओं में 25 हजार अर्थदंड भी जमा करने को कहा है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतने का आदेश दिया।

कोर्ट ने सभी धाराओं में मिली सजा साथ-साथ चलाने को कहा है। सूरज को 15 दिसंबर को मुजरिम करार दिया गया था। इसी कांड में विशाल आनंद को फरवरी में ही इसी कोर्ट ने 10 साल की सजा दी थी। सरकार की ओर से एपीपी श्रीप्रकाश भगत और मुजरिम की ओर से संजय कुमार सिन्हा ने बहस में हिस्सा लिया।
कोर्ट से भागने के बाद भगौड़ा घाेषित किया गया था
सूरज को 19 फरवरी, 2020 को ही सजा हो जाती। उसने अन्य आरोपियों विशाल आनंद और सूरज मंडल के साथ कोर्ट में हाजिरी भी दी थी। लेकिन कड़ी सजा मिलने के भय से अदालत परिसर से भाग निकला था। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए न सिर्फ बेल तोड़ दिया बल्कि उसे भगौड़ा घोषित करते हुए कुर्की-जब्ती की कार्रवाई भी कर दी। कुछ दिन बाद सूरज ने पुलिस की दबिश से डरकर अदालत में सरेंडर कर दिया था। जहां दलील दी थी कि वह मां के इलाज में दिल्ली गया था और लॉकडाउन में फंस गया था।
सुल्तानगंज में मेडिकल की दुकान में चेतन राजहंस को गाेली मार किया था घायल
सुल्तानगंज में राजहंस मेडिकल नामक चेतन की दुकान थी। छह अक्टूबर 2017 को चेतन सुबह करीब साढ़े 8 बजे अपनी दुकान की सफाई कर रहा था। तब हमलावरों ने उसके सिर पर निशाना बनाकर गोलियां दागी थी। हत्या की नीयत से दुकान में घुसकर पिस्टल के बट से माथे पर प्रहार भी किया था। किसी तरह दुकान से बाहर आकर जब उसने चिल्लाना शुरू किया तब बदमाश भागे थे। स्थानीय लोगों ने उसे अस्पताल भेजा था, जहां उसकी जान बची थी।
27 अक्टूबर, 2012 को चेतन का हुआ था अपहरण
27 अक्टूबर 2012 को चेतन का दीपक मंडल, गिरिजा यादव समेत अन्य बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। उसके बाद से बदमाश हमेशा धमकी दिया करते थे। किसी न किसी रूप से राजहंस परिवार अपराधियों के निशाने पर रहते थे। उक्त अपहरण कांड में गवाही देने से चचेरा भाई रविशंकर राजहंस को मना किया जा रहा था। बबलू मंडल आदि बदमाशों ने धमकी दे रखी थी। बदमाशों की धमकी के बाद भी चचेरा भाई रविशंकर राजहंस ने उनकी बात नहीं मानी थी। उस दौरान उसे भी गोली मारकर 2013 में जख्मी कर दिया गया था।

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