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  • The Condition Of The Hospital Is Like Jail Time, Doctors Are Not Coming To See, How To Take Medicine Kai Is Not Telling

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हालात:अस्पताल की हालत जेल की काल काेठरी जैसी, डाॅक्टर देखने नहीं आ रहे, दवा कैसे लें-यह काेई नहीं बता रहा

भागलपुर7 महीने पहले
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  • मायागंज अस्पताल के अाइसाेलेशन वार्ड में भर्ती रिटायर सब इंस्पेक्टर ने फेसबुक पर बताई परेशानी

मैं उमाकांत सिंह काेविड पाॅजिटिव मरीज हूं। भागलपुर से बिहार पुलिस के वायरलेस सब इंस्पेक्टर पद से रिटायर हुआ हूं। मेरा इलाज मेडिकल काॅलेज अस्पताल के आइसाेलेशन वार्ड में चल रहा है। लेकिन यहां न ताे दवा खाने के बारे में बताया जाता है और न ही किसी तरह की परेशानी हाेने पर डाॅक्टर देखने आ रहे हैं। काेई सिस्टम नहीं है कि परेशानी हाेने पर किसे खबर करें।   71 साल के उमाकांत सिंह ने यह बात अपने फेसबुक वाॅल पर लिखी है। दरअसर, जब से भागलपुर में काेराेना मरीजाें की संख्या बढ़ी है, मेडिकल काॅलेज अस्पताल की व्यवस्था लड़खड़ा गयी है। इससे पहले मुंगेर के जमालपुर के 80 वर्षीय शंकर मंडल के बेटे ने भी एक वीडियाे वायरल कर यहां की कुव्यवस्था के बारे में बताया था। उसकी चार दिन तक काेराेना जांच काे अस्पताल प्रबंधन ने लटकाए रखा। आखिरकार शनिवार काे उसकी माैत हाे गई। माैत के बाद उनकी रिपाेर्ट पाॅजिटिव आई थी। इससे पहले भी एक भाजपा नेता ने अाइसाेलेशन वार्ड में हाे रही परेशानी के बारे में मंत्री से शिकायत की थी। इसके बाद उन्हें डाॅक्टर देखने आए थे।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज की हो बेहतर व्यवस्था
उमाकांत सिंह ने लिखा है कि वह 2008 में भागलपुर से ही रिटायर हुए हैं। इतने वर्षाें तक भागलपुर की सेवा करने के बाद भी आज हमारी हालत जेल की काल काेठरी में बंद हाेने जैसी है। यहां हेल्थ सिस्टम पूरी तरह खत्म हाे चुका है। उन्हाेंने गुहार लगायी है कि जवाहर लाल नेहरू मेडिकल काॅलेज अस्पताल में काेराेना मरीजाें के बेहतर तरीके से इलाज की व्यवस्था हाे। 

भर्ती हाेने के बाद अस्पताल में रात का खाना तक नहीं मिला
 उमाकांत सिंह ने बताया कि नाै जुलाई काे उन्हें सर्दी-खांसी और बुखार हुआ। सदर अस्पताल में डाॅक्टर ने काेविड टेस्ट की सलाह दी। 9 दिन बाद सैपल देने का  समय मिला। 18 काे जांच कराई ताे शाम काे रिपाेर्ट पाॅजिटिव आई। एंबुलेंस से रात साढ़े दस बजे मेडिकल काॅलेज अस्पताल के आइसाेलेशन वार्ड में भर्ती कर बाहर से गेट बंद कर दिया गया। रात का भाेजन नहीं मिला। सुबह नर्स ने आकर दवा दी, लेकिन यह नहीं बताया कि खाना कैसे है। डाॅक्टर एक बार भी देखने नहीं आए। रविवार की रात जब दरवाजा पीटा एक नर्स आयी और हालचाल लेकर चली गई।

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