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चिंता की बात:घंटाें माेबाइल पर बिताने से आंखाें पर असर, दवा या चश्मे की जरूरत वाले बच्चों की संख्या 161 % बढ़ी

भागलपुर3 दिन पहले
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  • जिले के पांच अस्पतालाें के आंकड़े से चाैंकाने वाले मामले सामने आए

काेराेनाकाल में हुए ऑनलाइन क्लास के दाैरान माेबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से शहर के बच्चाें की आंखाें पर भी असर पड़ा है। जिले के दाे सरकारी और तीन प्राइवेट क्लीनिकाें के काेराेनाकाल से पहले जनवरी 2020 और इस साल जनवरी के आंकड़े में ये चाैंकाने वाले मामले सामने आए।

इस पांचाें अस्पताल में काेरानाकाल से पहले जनवरी 2020 में आए बच्चाें में जहां 833 काे दवा या चश्मे की जरूरत पड़ी वहीं काेराेना की रफ्तार कम हाेने के बाद जनवरी 2021 में 2175 बच्चाें काे इसकी जरूरत हुई। यानी इन दाे माह की तुलना करें ताे 1342 बच्चाें यानी 161 फीसदी की वृद्धि हाे गई। इन बच्चाें में दस से तीस फीसदी तक में विजन सिंड्राेम की परेशानी सामने आई। यह सिर्फ पांच अस्पतालाें का आंकड़ा है।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि माेबाइल के लगातार इस्तेमाल से जिले के कितने बच्चे प्रभावित हुए हाेंगे। बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई व इसके बाद माेबाइल पर गेम खेलने लगते हैं। इसका ज्यादा असर पड़ रहा है। इससे माेबाइल पर उनका समय काफी बढ़ गया है।

दैनिक भास्कर के लिए मेडिकल काॅलेज अस्पताल की डाॅ. पम्मी रानी, सदर अस्पताल के डाॅ. सत्यदीप गुप्ता, निजी नर्सिंग हाेम चलाने वाले डाॅ. संजय शर्मा, डाॅ. सतीश कुमार और डाॅ. पुनीत परशुरामपुरिया ने यह खबर लिखी। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक माेबाइल के स्क्रीन काे देखने से बच्चाें की आंखाें की राेशनी कम हुई है। कई बच्चाें में आंखाें में लालीपन, सूखापन व खुजलाहट की शिकायत भी आई है।

मायागंज अस्पताल आए 30 प्रतिशत बच्चाें में आंखाें की राेशनी कम हाेने की शिकायत
मेडिकल काॅलेज अस्पताल में पिछले साल जनवरी में 195 बच्चे आंख में परेशानी के कारण दवा ली थी। जबकि इस साल जनवरी में 310 बच्चाें में आंखाें में खराबी नजर आई। उन्हें दवा दी गई। कई काे चश्मा भी चढ़ गया। अस्पताल की आई स्पेशलिस्ट डाॅ. पम्मी रानी ने बताया कि 20 से 30 प्रतिशत बच्चाें में आंखाें की राेशनी में कमी नजर आई। काेराेनाकाल में ऑनलाइन क्लास में ज्यादा माेबाइल पर समय बिताने के कारण बच्चाें के आंखाें का पावर बढ़ा है।

10 से लेकर 15 वर्ष के बच्चों में समस्या है ज्यादा
घंटाघर से मशाकचक जानेवाली सड़क पर क्लीनिक चलानेवाले आई स्पेशलिस्ट डाॅ. सतीश कुमार ने बताया कि साल भर पहले जहां पांच प्रतिशत बच्चाें में विजन सिंड्राेम मिलता था, वह अब 40 फीसदी हाे गया है। दस वर्ष से लेकर 15 वर्ष तक के बच्चाें में यह समस्या ज्यादा है है। आंखाें का लाल हाेना, सिर दर्द, आंखाें से पानी आने की शिकायत ज्यादा है। बच्चे ब्रेक टाइम में गेम खेलते हैं, इसका भी असर है।

एक्सपर्ट की सलाह

  • 20-20-20 का फार्मूला अपनाएं- यानी हर बीस सेकेंड पर एक बार स्क्रीन से नजर हटा कर बीस फीट की दूरी पर बीस सेकेंड तक देखें
  • आंखाें के पलक काे बार-बार झपकाएं। ऑनलाइन क्लास शुरू करने से पहले आंखाें में डाॅप लें ताकि इसमें सूखापन न आए।
  • अभिभावक बीच-बीच में यह जरूर चेक करें कि बच्चे माेबाइल पर पढ़ाई के दाैरान या बाद में गेम ताे नहीं खेल रहे।
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