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175 साल पुरानी परंपरा पर इस बार भी लगाया ब्रेक:गोलदारपट्टी के रामलीला का मंच सूना, लटक रहा ताला, कलाकारों ने रामायण के पात्रों के मुकुट की पूजा कर निभाई परंपरा

भागलपुर/नाथनगर20 दिन पहले
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गोलदारपट्टी के रामलीला मंच पर लगा ताला। - Dainik Bhaskar
गोलदारपट्टी के रामलीला मंच पर लगा ताला।

कोरोना की वजह से नाथनगर में दो 175 साल पुरानी रामलीला व रावण दहन की परंपरा पर दाे वर्ष से ग्रहण हुआ है। 1846 से लगातार चली आ रही परंपरा पर इस बार भी विराम लग गया है। कार्यक्रम न होने से गोलदारपट्टी स्थित रामलीला का मंच सूना है। वहां ताला लटक रहा है। जबकि रामलीला समिति के कलाकाराें के मुकुट की पूजा कर परंपरा निभाई।

इस बार जब एक प्रशासनिक अधिकारी का मौखिक आश्वासन मिला ताे रामलीला समिति ने गाेलदारपट्टी में तैयारी शुरू कर दी थी। आयाेजन की स्वीकृति के लिए ऑफिस का चक्कर भी लगाया। समिति ने करीब ढाई लाख रुपए में सट्टा भी बुक कर लिया था। लेकिन, जब प्रशासन ने काेराेना संक्रमण के बढ़ने की आशंका काे देख स्वीकृति नहीं दी, ताे समिति के सदस्याें में निराशा छा गई।

समिति के महासचिव दिलीप भगत ने बताया कि भोजपुर से आए उनके पूर्वजों ने 1846 में गोलदारपट्टी में रामायण पाठ व भजन-कीर्तन शुरू किया था। धीरे-धीरे रामलीला व रावण दहन का आयाेजन हाेने लगा। तब से अब तक भगत परिवार की सात पीढ़ी अपने पूर्वजों की संस्कृति व परंपरा को निभा रहे है। लेकिन, दो साल से कोरोना ने परंपरा रोक दी है।

रावण, मेघनाद कुंभकर्ण के पुतले जलाते थे

विजयादशमी पर हर साल सीटीएस मैदान में 35 फीट के रावण, 30 फीट के मेघनाद और 25 फीट के कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता था। समिति महासचिव ने बताया, आयोजन पर 5 लाख खर्च आता था। अध्यक्ष हरिप्रसाद भगत व संरक्षक रविंद्र भगत ने बताया, इस बार भी परंपरा को लेकर भगवान राम समेत चारों भाई के मुकुट की पूजा की।

बताया कि दुर्गा पूजा से दो दिन पहले गोलदारपट्टी के मंच पर रामलीला शुरू की जाती थी। सात पूजा से सीटीएस मैदान में रामलीला होते आ रहा था। विजयादशमी पर रावण-दहन को देखने लाखों की भीड़ उमड़ती थी। इसके के एक दिन बाद मनसकामनानाथ चौक पर भरत मिलाप देखने भी हजारों की भीड़ रहती थी।

रामलीला समिति ने मुकुट पूजन कर निभाई परंपरा।
रामलीला समिति ने मुकुट पूजन कर निभाई परंपरा।

रामलीला नहीं होने से राम और रावण दोनों हुए मायूस

गोलदारपट्टी के मंच पर होने वाली रामलीला में अजमेरीपुर बैरिया के कलाकार प्रस्तुति देते थे। दो साल से आयोजन न होने से नाटक मंडली के राम-रावण समेत अन्य पात्र कलाकारों में मायूसी है। भगवान राम पात्र निभाने वाले सुखनंदन मंडल ने बताया, इस बार भी बाढ़ में नाटक मंडली के सभी कलाकारों के घर डूब गए और लाखों की क्षति हुई।

सभी पात्रों ने महाशय ड्योढी के बाढ़ शिविर में समय गुजारा। रामलीला के आयोजक से एक लाख रुपए मिलते थे, जिसे 20 कलाकार आपस में बांटते थे। रामलीला होती तो उन्हें कुछ आर्थिक मदद मिलती।

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