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नया ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा:नालों का पानी होगा साफ, गंगा होगी निर्मल; अडानी इंटरप्राइजेज से हुआ करार, दो साल में तैयार होगा 385 करोड़ का प्लांट

भागलपुर9 दिन पहले
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साहेबगंज में 15 साल पुराना जर्जर ट्रीटमेंट प्लांट। - Dainik Bhaskar
साहेबगंज में 15 साल पुराना जर्जर ट्रीटमेंट प्लांट।

शहर का गंदा पानी अब गंगा मंे नहीं मिलेगा। साहेबगंज में नया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगेगा। इस प्लांट में न सिर्फ रोज 45 एमएलडी गंदा पानी ट्रीट होगा, बल्कि साफ होने के बाद इस पानी का सिंचाई में भी इस्तेमाल किया जाएगा। इतना ही नहीं, साफ पानी ही गंगा में भी मिलाया जाएगा। इससे गंगा दूषित होने से बचेगी और शहर में जलप्रदूषण कम होगा।

इसके लिए गुरुवार को नमामि गंगे ऑफिस दिल्ली में बुडको और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के डायरेक्टर जनरल राजीवन रंजन मिश्रा और अडानी इंटरप्राइजेज के साथ करार हुआ। साहेबगंज के पुराने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को हटाकर अब नया प्लांट 385 कराेड़ से बनेगा। इसका निर्माण जल्द शुरू होगा। यह 24 माह में पूरा होगा।

इसके बाद एजेंसी 15 साल तक इस प्लांट का ऑपरेशन और मेंटेनेंस भी करेगी। एसटीपी से निकले ट्रीटेड पानी काे खेताें में सिंचाई के लिए किसानाें को भी दिया जाएगा। एसटीपी बनने से गंगा की निर्मलता बेहतर होगी और लाेग भी जागरुक हाेंगे। 2019 में ही तत्कालीन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस याेजना का शिलान्यास किया था। बुडकाे के राज्य पीआरओ चंद्रभूषण ने बताया, जल्द ही एजेंसी भागलपुर आएगी और सर्वे के बाद काम शुरू होगा।

45 एमएलडी होगी क्षमता, 15 साल तक मेंटनेंस करेगी एजेंसी

2019 में ही याेजना का केंद्रीय मंत्री गडकरी ने किया था शिलान्यास

यह है याेजना

टीएमबीयू के पास बंद पड़े सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को चालू करने की योजना केंद्र ने 2017 में बनाई। 2018 में केंद्र व राज्य की टीम ने सर्वे किया। फिर 28 फरवरी 2019 को नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा से ऑनलाइन योजना का शिलान्यास केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया। टेंडर की प्रक्रिया वित्तीय पेच में फंस गई, जबकि काम पूरा होने का समय दिसंबर 2020 तय हुआ था। लेकिन दाे साल पहले चयनित एजेंसी से अब करार हुआ।

ये हाेगा लाभ

सैकड़ों छोटी नालियाें में केमिकल, कारखाने व नर्सिंग होम का गंदा पानी जाता है। ये नाले गंगा में गिरते हैं और गंदे पानी में शामिल कारसिनोजेनिक तत्व गंगा में घुल रही है। यह पानी केा जहरीला बना रहा है। इस प्लांट के बनने से गंगा प्रदूषण से बचेगी। लोगों को स्वच्छ पानी मिल सकेगा।

2005 से पूरी तरह प्लांट है बंद

साहेबगंज में केंद्र सरकार की मदद से 11 एमएलडी क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट 1991 में तैयार हुई थी। लेकिन 2001 के बाद प्लांट धीरे-धीरे ध्वस्त होने लगा और बाद में शहर के पांच स्थानों पर बने पंपिंग हाउस भी वर्ष 2005 में बंद हो गए। इस प्लांट में 17 वार्डो के नालाें का पानी पहुंचाया जाता था।

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