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  • There Are Only 12 Horses Out Of 27, Among Them Poonam's Eyes Are Bad, Shabnam Is Old, Saira Is Ill And Kaushalya's Mental Condition Is Not Good...

बस आठ घोड़ों से कैसे होगी दियारा में गश्ती:27 में सिर्फ 12 ही हैं घोड़े, इनमें पूनम की आंख खराब, शबनम हुई उम्रदराज, सायरा बीमार तो कौशल्या की दिमागी हालत ठीक नहीं...

भागलपुर2 महीने पहलेलेखक: राकेश पुरोहितवार
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अश्वारोही दल के घोड़े : अली बाबा, पूनम, हनी, व्हाइट शॉक्स, माधुरी, जरीना, कौशल्या, शबनम, सायरा, अयान, मैरी, संड्रेला। - Dainik Bhaskar
अश्वारोही दल के घोड़े : अली बाबा, पूनम, हनी, व्हाइट शॉक्स, माधुरी, जरीना, कौशल्या, शबनम, सायरा, अयान, मैरी, संड्रेला।

भागलपुर अश्वारोही विशेष सशस्त्र पुलिस की हालत खस्ताहाल है। यहां 27 घोड़े की क्षमता है, लेकिन 12 ही हैं। इनमें 3 अनफिट और 1 बीमार है। यानी 8 घोड़ों से पूर्व बिहार, कोसी-सीमांचल के एक दर्जन से अधिक जिलों में ड्यूटी कराई जा रही है। 12 घोड़ों में पूनम की एक आंख खराब हो चुकी है।

उसे कम दिखाई देता है। शबनम की उम्र 18 साल गई, वह रिटायरमेंट के करीब है। कौशल्या की दिमागी हालत ठीक नहीं है। वह किसी को पीठ पर सवारी करने नहीं देती। सायरा भी बीमार है। ये चारों घोड़े ज्यादातर अस्तबल में ही रहते हैं। बाकी 8 घोड़े की उम्र 15 वर्ष के भीतर है।

ये घोड़े देसी और विदेशी नस्लों के हैं। 10 साल का संड्रेला युवा है और उसकी फुर्ती के आगे हैंडलर पस्त हो जाते हैं। अली बाबा ऊंची कद-काठी के कारण वह दियारा में बालू पर तेजी से दौड़ता है। बारिश में घोड़ों को दियारा में नहीं भेजा जाता है।

घोड़ों की ऐसी स्थिति में सवाल खड़े हो रहे हैं कि बीमार व आधी से भी कम क्षमता से दियारा में गश्ती कैसे होगी? बता दें कि पीरपैंती दियारा में सोमवार को ही कलाय बोकर लौट रहे किसानों पर बदमाशों ने गोलियां चलाई थीं।

सुरक्षा के लिए पुलिस का अश्वारोही विशेष दस्ता भी मौजूद, फिर भी दियारा में बदमाशों पर लगाम लगाना बड़ी चुनौती

मॉब कंट्रोल, वीआईपी ड्यूटी और दियारा में गश्ती
बिहार में अश्वारोही पुलिस से उसका मूल काम शायद ही कराया जाता है। मॉब कंट्रोल और वीआईपी एस्कॉर्ट ये दोनों काम अश्वारोही पुलिस और उनके घोड़ों से लिया जाता है। 5 हजार की निहत्थी भीड़ को 2 घोड़े और उनके हैंडलर आसानी से तितर-बितर कर सकते हैं। लेकिन बिहार में इससे इतर दियारा में गश्ती और फसलों की सुरक्षा घोड़ों से कराई जाती है। श्रावणी मेले भी कांवरिया पथ पर घोड़ों से गश्ती कराई जाती है।

फोर्स में 20 साल तक कारगर रहता है एक स्वस्थ घोड़ा, इसके बाद कोई काम नहीं
ट्रूप प्रभारी के मुताबिक, एक स्वस्थ घोड़ा 20 साल तक कारगर रहता है। इस दौरान उससे आसानी से काम लिया जा सकता है। लेकिन 20 वर्ष के बाद घोड़े-घोड़ियों से न गश्ती कराई जाती है और न ही अन्य काम लिया जाता है। भागलपुर अश्वारोही केंद्र में कुल 72 घोड़े के रहने की व्यवस्था है, लेकिन फिलहाल 12 घोड़े ही हैं।

चाहिए 2 ट्रूप, पर हैं एक से भी कम
भागलपुर और आसपास के जिलों के दियारा इलाकों को देखते हुए यहां 2 ट्रूप (कंपनी) घोड़े की आवश्यकता है। एक ट्रूप में 27 घोड़े, 31 सिपाही, 6 साईस व एक नाई रहता है। लेकिन भागलपुर में एक ट्रूप से भी कम घोड़े हैं। जबकि पुलिसकर्मियों की तैनात पद के अनुरूप है। घोड़ों की खरीदारी न होने से कभी ट्रूप पूरा नहीं होता है।

घोड़ों को 24 घंटे में एक बार मिलता है चारा
घोड़ों को 24 घंटे मे एक बार चारा मिलता है। 15 नवंबर से 15 मार्च तक प्रति घोड़ा चार किलो जई, आधा किलो चना, एक किलो चोकर, 200 ग्राम तिसी, 50 ग्राम नमक, साढ़े 4 किलो पुआल और 14 किलो घास मिलता है। 15 मार्च से 15 नवंबर तक प्रति घोड़ा चार किलो जई घटा कर तीन किलो कर दिया जाता है। साथ ही प्रति घोड़े को मिलने वाली 200 ग्राम तिसी भी बंद कर दी जाती है। बाकी चारा वैसा ही रहता है।

आादेश मिलने पर हम डूयटी पर जाते हैं

  • 15 अगस्त को पटना में हुए राजकीय समारोह में भागलपुर अश्वारोही दल ने मुख्यमंत्री का एस्कॉर्ट किया था। इसके अलावा कुछ दिन पहले मोकामा टाल क्षेत्र में ड्यूटी लगाई गई थी, जिससे फसल लूट की घटनाएं नहीं के बराबर हुई थी। मुख्यालय से आदेश मिलने के बाद ही हम ड्यूटी पर कूच करते हैं। - परमेश्वर राम, प्रभारी
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