80 करोड़ का निवेश, 50 करोड़ का हुआ व्यापार:सुल्तानगंज के 2 हजार व्यापारियों की उम्मीदों पर फिरा पानी, 40% कम रही कांवरियों की भीड़

भागलपुर2 महीने पहलेलेखक: अनिकेत कुमार
दो साल बाद मेले की शुरुआत होने के बावजूद व्यापार पहले की तरह नहीं चमक पाया।

श्रावणी मेले की आज आखिरी सोमवारी है,मेला अंतिम चरण में है। लेकिन इस बार मेले का बाजार पूरी तरह फीका रहा। दो साल बाद मेले की शुरुआत होने के बावजूद व्यापार पहले की तरह नहीं चमक पाया। सुल्तानगंज में मेले की शुरुआत में 2 हजार व्यापारियों ने तकरीबन 80 करोड़ का निवेश कर अपने अपने दुकान लगाए थे। लेकिन 4 हफ्ते में करीब 50 करोड़ का व्यापार ही हो पाया। जिसको लेकर दैनिक भास्कर की टीम ने सुलतानगंज जाकर व्यापारियों से बातचीत की और जानने की कोशिश किया कि आखिर व्यापर मंदा होने की क्या वजह रही। पढ़िए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट...

भागलपुर स्थित सुलतानगंज जहां अजगैबीनाथ धाम से स्नान कर श्रद्धालु जल लेकर देवघर के लिए प्रस्थान करते है। जिसको लेकर आस पास के इलाके में कपरे से लेकर कांवर,खाने पीने से लेकर रंग बिरंग के करीब 2 हजार दुकानें सजती है। वहां के दुकानदार हर साल लाखों की कमाई करते है। लेकिन पिछले दो साल कोरोना की वजह से मेला नही लगा था। जिससे उनकी दुकानदारी पूरी तरह ठप रही। लेकिन इस साल 2022 में जब उन्हें सूचना मिली की इस बार फिर से श्रावणी मेला लगने जा रहा है। उनके अंदर खुशी की लहर दौड़ी, उम्मीदें जगी कि इस बार फिर से पहले की तरह अच्छी कमाई होगी।

इस साल 80 करोड़ का निवेश, बिक्री 50 करोड़

इस साल सुलतानगंज इलाके में करीब 2 हजार दुकानदारों ने करीब 80 करोड़ रुपए का निवेश किया। लेकिन सावन महीने का चौथा सप्ताह चल रहा है। अब सावन भी खत्म होने को है। लेकिन उनके बिक्री का आंकड़ा 50 करोड़ रुपए ही है। जिससे सभी दुकानदारों की पूंजी भी फंसी रह गई। उन्होंने ने जिस कमाई की उम्मीदें की थी वो पूरी नहीं हो पाई। नतीजन सभी दुकानदारों को निराशा हाथ लगी।

दैनिक भास्कर की टीम ने स्थानीय दुकानदार विष्णु देव से बातचीत की।,विष्णु देव ने बताया कि जब 2019 तक मेले लगते थे तो,विष्णु अपनी दुकान में 5 लाख रुपए की पूंजी निवेश करते थे और 6 से 7 लाख तक का व्यापर होता था। जिससे विष्णु को 1 से 2 लाख रुपए तक का फायदा होता था। लेकिन इस बार विष्णु देव ने अपनी दुकान में 5 लाख की पूंजी तो लगाई मगर 3 लाख रुपए तक का ही व्यापार हो पाया। जिससे विष्णु के 2 लाख रुपए पूंजी फंसे रह गए।

ठीक उसी तरह दूसरे व्यापारी गणेश गुप्ता ने बताया कि पहले वो अपने दुकान में 5 से 6 लाख रुपए लगाते थे। 7 से 8 लाख उनकी कमाई हो जाती थी। लेकिन इस बार 60% सामान ही बिक पाई है। गणेश ने बताया कि इस पूरे इलाके के दुकानदारों का आंकड़ा देखेंगे तो 80 करोड़ के आस पास निवेश होता है। लेकिन इस बार मुश्किल से 50 करोड़ का ही व्यापर हो पाया होगा।

वहीं तीसरे व्यापारी विनय कुमार ने बताया कि पहले कमाई अच्छी होती थी। इस बार स्थिति खराब हो गई। उन्होंने कहा कि दुकानदारों को इस बार दोहरी मार परी है। पिछली बार के मुताबिक दुकानों के किराया भी ज्यादा लग रहा है। लेकिन कमाई पिछली बार से काफी कम है।

कांवरियों की भीड़।
कांवरियों की भीड़।

क्यों मंदा रहा व्यापार?

दैनिक भास्कर ने इस साल व्यापार ढीली होने के वजह जाननी चाही तो इसका सबसे बड़ा कारण निकला कांवरियाओ की भीड़ में कमी। साल 2019 तक पूरे सावन महीने में औसतन 40 लाख से 50 लाख कांवरिया जल चढ़ाने सुल्तानगंज से देवघर जाते थे। लेकिन इस साल अभी तक 2,341,155 कांवरिया ही जल चढ़ाएं। जिसमे 2,294,713 साधारण कांवरिया और 46,442 डाक कांवरिया शामिल है। तो पहले के मुकाबले कांवरियाओ की संख्या 50% से 60% के आस पास ही रही जिसकी वजह से लोगो ने सामानों की उतनी खरीदारी नही की।

कांवरियों की संख्या में क्यों आई गिरावट?

इस साल मेले की शुरुआत होने के बावजूद कांवरियों की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिली। जिसको लेकर दैनिक भास्कर ने पर्यटन विभाग के गाइड प्रभात चंद्र ने इसके कई कारण बताए। उन्होंने बताया कि इस बार कांवरिया की संख्या कम रहने का सबसे बड़ा कारण है कि दो साल बाद मेले की शुरुआत हुई। तो लोग कही न कहीं कोरोना को लेकर थोड़े भय में है। कि इस बार का व्यवस्था कैसा होगा,लोग एक दूसरे को देख रहे हैं कि कोई जा रहा है की नही। तो इसको समझने में लोगो को थोड़ा समय लगेगा फिर शायद अगले साल से लोगो की भिड़ देखने को मिले।

तेज धूप में कांवरियों को चलने में काफी परेशानी होती है।
तेज धूप में कांवरियों को चलने में काफी परेशानी होती है।

बारिश कम होने की वजह से भी कमी भीड़

प्रभात चंद्रा ने बताया कि भीड़ के कम होने की वजह बारिश का काम होना भी है। इस बार गर्मी काफी तेज पर रही ही। लोग धूप को झेल नहीं पा रहे है। लोग बारिश होने का इंतजार कर रहे थे कि बारिश हो तो कांवर उठाने जाए।लेकिन लोगो के उम्मीद के मुताबिक बारिश उतनी नही हुई जिसकी वजह से भीड़ में कमी आई।

महंगाई में तोड़ा दम

कंवरियो की भीड़ में कमी का कारण बढ़ती महंगाई भी बनी। कोरोना काल के बाद बेरोजगारी चरम सीमा पर पहुंची। लोगो की आमदनी कम हो गई और बढ़ती महंगाई ने भी कांवर उठाने से कई लोगो के हिम्मत तोड़ दिए।