तैयारी:20 वर्षों से चिकित्सक के पदस्थापन की बाट जोह रहा आयुर्वेद औषधालय

परबत्ता2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
औषधालाय का खपरैल भवन। - Dainik Bhaskar
औषधालाय का खपरैल भवन।
  • परबत्ता के नयागांव सतखुट्‌टी स्थित औषधालय सरकारी उपेक्षा से बदहाल
  • उद्धारक की तलाश है जो आयुर्वेद का खोया हुआ सम्मान वापस दिला सके

परबत्ता प्रखंड स्थित जोरावरपुर पंचायत के नयागांव सतखुट्टी स्थित आयुर्वेदिक औषधालय को एक ऐसे उद्धारक की तलाश है जो न केवल इस अस्पताल का जीर्णोद्धार करा सके, बल्कि भारत के गौरवशाली चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को फिर से उसका खोया हुआ सम्मान वापस दिला सके। आयुर्वेद के बारे में यह माना जाता है कि इसके माध्यम से रोगों का जड़ से निदान होता है। आयुर्वेद को विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति माना गया है जो शाश्वत विज्ञान है। आयु का ज्ञान कराने वाले शास्त्र या विज्ञान को आयुर्वेद की संज्ञा दी गई है। मनुष्य जाति के लिए उपलब्ध प्राचीनतम शास्त्र ऋग्वेद में भी आयुर्वेद का जिक्र है। ऋग्वेद के अलावा अथर्ववेद में भी आयुर्वेदिक विषयक उल्लेख है तथा आयुर्वेद को अथर्थवेद का उपवेद माना जाता है।

एक वैद्य दे रहे अपनी सेवा
बताते चलें कि यह गांव विगत 25 वर्षों से स्थानीय विधायक का गृहगांव होने के कारण सत्ता का केन्द्र भी रहा हैंइन दिनों एक वैद्य शिव कुमार मिश्र उर्फ राजू लोगों की सेवा करते आ रहे हैं। बताया जाता है कि वैद्य राजू के दादा एवं पिता भी इस औषधालय में चिकित्सक के रूप में कार्यरत थे।

1927 ई में हुई थी आयुर्वेद अस्पताल की स्थापना

बताते चलें कि नयागांव सतखुट्टी स्थित आयुर्वेद अस्पताल की स्थापना 1927 ई में हुई थी। उस समय इस इलाके में इस अस्पताल की विश्वसनीयता व प्रतिष्ठा थी। परबत्ता प्रखंड के डुमड़िया बुजुर्ग निवासी सह खगड़िया जिला परिषद के प्रथम अध्यक्ष सत्यदेव मिश्र हजारी के प्रयास से इस अस्पताल को पुनर्जीवित किया गया था तथा दवा आदि की उपलब्धता सुनिश्चित किया गया था। लेकिन पुनः यह दो दशकों तक सरकार व प्रशासन की नजरों से उपेक्षित हो गया। बाद के दिनों में स्थानीय प्रतिनिधि सह नयागांव निवासी तत्कालीन जिप सदस्य शैलेश सिंह एवं पुनीता सिंह के प्रयास से तत्कालीन जिप अध्यक्ष सुशीला देवी के कार्यकाल में बीआरजीएफ की राशि से अस्पताल का जीर्णोद्धार कराया गया। इस क्रम में चहारदीवारी के साथ-साथ अस्पताल के पुराने कमरे के अतिरिक्त तीन कमरों का निर्माण कार्य किया गया। लेकिन भवन निर्माण के अलावा अन्य कोई कार्य संभव नहीं हो सका। अब आलम यह है कि इस औषधालय में भवन छोड़कर कुछ भी नहीं है।

खबरें और भी हैं...