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अनोखा उदाहरण:पति के निधन पर पत्नी मीना देवी ने दी मुखाग्नि

परबत्ताएक महीने पहले
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अगुवानी गंगा घाट पति को मुखाग्नि देतीं मीना देवी। - Dainik Bhaskar
अगुवानी गंगा घाट पति को मुखाग्नि देतीं मीना देवी।
  • निःसंतान पति ने मरने से पहले जताई थी आखिरी इच्छा, उन्हें पत्नी से दिलाई जाए मुखाग्नि

पुरुष प्रधान समाज में आज भी महिलाओं का श्मशान जाकर अंतिम क्रिया में भाग लेना भले ही वर्जित माना जाता है। लेकिन महिलाएं यह साबित करने को तत्पर हैं कि वह हर कदम पर पुरुषों के साथ बराबरी का दर्जा पाने में सक्षम हैं। हालांकि अब तक बेटियों द्वारा पिता को मुखाग्नि देने का चलन सामने आया था लेकिन शुक्रवार को एक पत्नी ने समाज के बंधन को पीछे छोड़ते हुए अपने पति को मुखाग्नि दी तथा अंतिम संस्कार किया। परबत्ता प्रखंड के सियादतपुर अगुवानी पंचायत के राका गांव निवासी कृष्णानंद मिश्र काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। कोरोना संक्रमण के इस दौर में उनके परिजनों ने पटना में उनका इलाज कराया। लेकिन उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें उनके पैतृक गांव राका लाया गया। जहां गुरुवार रात को उनका निधन हो गया। कृष्णानंद मिश्र निःसंतान थे तथा परिजनों ने बताया कि मृत्यु से पूर्व उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा जताते हुए पत्नी से मुखाग्नि लेने की बात कही थी। उनकी इस इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी पत्नी मीना देवी ने अगुवानी गंगा घाट पर दर्जनों परिजनों की मौजूदगी मे अंतिम संस्कार के लिए अपने पति को मुखाग्नि दी।

लॉकडाउन से कई संबंधी नहीं ले सके अंतिम संस्कार में भाग
मृतक के बड़े भाई तारकेश्वर मिश्र, भतीजा गिरीश चंद्र मिश्र सहित अन्य परिजनों को लॉकडाउन के कारण अंतिम संस्कार में उपस्थित होने का मौका नहीं मिल पाया। उन्होंने बताया कि कुछ रुढ़िवादी परंपराओं में हमारा समाज आज भी जकड़ा हुआ है जिससे अब बाहर निकलने की जरूरत है। कहा कि आज हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। ऐसे में समाज में ऐसी परंपराओं का अब कोई स्थान नहीं रह गया है। अंतिम संस्कार के दौरान शैलेष मिश्र, भोलानाथ मिश्र, केदार मिश्र, मदन झा, प्रभाकर मिश्र, छोटू कुमार, त्रिवेणी मिश्र व अमित झा सहित सहित अन्य लोग भी मौजूद थे।

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