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कोरोना कर्फ्यू का असर:यात्री बसें बंद होने के कारण सैकड़ों परिवारों पर आजीविका का संकट

पिपरिया2 महीने पहले
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पिपरिया। यात्री वाहनो से गुलजार रहनेवाल बस स्टेंड वीरान पड़ा है। यहाँ से सैकड़ो लोगो को रोजगार मिलता था। - Dainik Bhaskar
पिपरिया। यात्री वाहनो से गुलजार रहनेवाल बस स्टेंड वीरान पड़ा है। यहाँ से सैकड़ो लोगो को रोजगार मिलता था।
  • फल-सब्जी के ठेले लगा रहे कंडक्टर और क्लीनर

कोरोना कर्फ्यू की बढ़ती अवधि से यात्री परिवहन से जुड़े सैकड़ों परिवारों पर बेरोजगारी के बादल छा गए हैं। इन परिवारों को समझ नहीं आ रहा है कि वे आजीविका के लिए अब और कौन से उपाय करें। चार जिलों के जंक्शन पर बसे पिपरिया शहर के दोनों बस स्टैंड से छिंदवाड़ा, रायसेन, नरसिंहपुर और होशंगाबाद से होकर यात्री बसों का संचालन होता था।

न्यू बस स्टैंड से ही पिपरिया की लगभग 25 बसों का संचालन होता था। एक यात्री बस में ड्राइवर, कंडक्टर जहां रोजाना औसतन 500 रुपए प्रतिदिन कमा लेते थे, वही क्लीनर को भी लगभग 300 रुपए रोज मिल जाते थे। इनके अलावा बस संचालक का परिवार भी उसी बस पर निर्भर था। कोरोना कर्फ्यू के चलते इन सभी परिवारों की रोजी रोटी बंद हो गई है। इनके अलावा सभी बस स्टैंड और रास्ते में पड़ने वाले छोटे-छोटे गांव पर इन बसों के एजेंट और यात्रियों के लिए चाय, नाश्ता, भोजन और फुटकर सामग्री उपलब्ध कराने वाली अनेक दुकानें भी बंद हो गई हैं।

कंडेक्टर रामचंद्र वर्मा ने बताया कि बसें बंद हो जाने से बहुत सारे परिवार बेरोजगार हो गए हैं। बस में क्लीनर का काम करने वाले रिजवान खान ने बताया की सब्जी का ठेला लगा रहा हूं। रोज सुबह सब्जी का ठेला लेकर निकलता हूं। सब्जी बेचने का अनुभव ना होने के कारण अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है। कंडक्टर कल्लू ठाकुर इन दिनों फल का ठेला लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फल का ठेला लगाना अब आसान नहीं है। सभी फल बहुत महंगे हैं और दुकानें बहुत ज्यादा हो गई हैं। उन्हाेंने बताया कि अगर यात्री बसों का संचालन जल्दी ही शुरू नहीं हुआ तो अार्थिक स्थिति बहुत खराब हो जाएगी।

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