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बाल अधिकार:स्कूल में खेल मैदान नहीं था, बाल पंचायत ने सरपंच के सामने उठाई समस्या, आखिर नरेगा के तहत हुआ काम

प्रतापगढ़18 दिन पहले
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समाज में शुरू से ही ये परंपरा रही है कि खुद के अधिकारों के लिए स्वंय को ही लड़ना पड़ता है। इसी क्रम को लेकर आदिवासी समुदाय में बच्चों की पंचायत अपने हितों को लेकर, अपने अधिकारों को लेकर बात करने लगी है।

मोरवानिया कि इस बाल पंचायत ने अक्टूबर 2020 में यहां राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में खेल मैदान नहीं होने की समस्या को प्रमुखता से उठाया। बच्चों का कहना था कि स्कूल है, लेकिन खेल का मैदान नहीं है। ऐसे में बच्चे खेल गतिविधियां कहां पर करें। मैदान के अंदर चारों तरफ झाड़ियां और उबड़-खाबड़ जमीन है। खेल मैदान की इस मांग को बाल पंचायत में समुदाय के सामने रखा और उन्हें मनाया भी।

बच्चों ने अपने हितों को लेकर ग्राम विकास एंव बाल अधिकार समिति मोरवानिया के साथ बात रखी। जिसके अंतर्गत उन्होंने बताया कि राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मोरवानिया में उनके लिए खेलने के मैदान को दुरुस्त किया जाए। उन्होंने अपनी मांग को लेकर पहले बाल पंचायत की बैठक में चर्चा की एंव इसी मुद्दे को उन्होंने ग्राम विकास एवं बाल अधिकार समिति के साथ साझा किया। समिति ने ग्राम पंचायत सरपंच अंतर देवी काे समस्या से अवगत कराया।

बैठक में सभी वार्ड पंच और समिति सदस्य ने इस समस्या के निराकरण के लिए जोर दिया। जिसे सरपंच के द्वारा गंभीरता से लिया गया और इस समस्या का निवारण करने के लिए आश्वासन दिया। नवंबर 2020 में पंचायत की बैठक में ये प्रस्ताव लिया गया कि मैदान को नरेगा के अंतर्गत समतलीकरण किया जाएगा। जिस के लिए सभी सदस्यों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया। दिसंबर 2020 में नरेगा के तहत मैदान का समतलीकरण कर दिया गया और यहां से सारे झाड़ झंकार हटा दिए गए। उसके पश्चात बाल पंचायत के द्वारा इस खेल के मैदान का अवलोकन भी किया गया। बाल पंचायत में खेल मैदान को लेकर संतुष्टि जाहिर की और पंचायत का धन्यवाद दिया। हालांकि दूसरे लाॅकडाउन के बाद से बच्चे यहां पर नहीं खेल पा रहे हैं।

बाल पंचायत योगदान की हो रही सराहना
बच्चाें के विकास और सहभागिता के लिए हमें ही सोचना होगा। उनकी समस्याओं और जिज्ञासाओं को हमारे द्वारा जाने अनजाने में अनदेखा किया जाता है। जो कहीं न कहीं उनके विकास को बाधक करता है। इसलिए बच्चों के लिए बच्चों का यह प्रयास और योगदान सराहनीय है।
-मुकेश सिंघल, बाल कार्यक्रम अधिकारी, वाग्धारा, बांसवाड़ा।

जब बच्चे अपनी बातों को बड़ाें के सामने रखते हैं और उन्हें एक जिद के समान पूरा करने का आह्वान पंचायत से किया जाता है, तब विकास कार्य के लिए आगे आना की पड़ता है। मोरवानिया की यह बाल पंचायत जिले भर में आदर्श उदाहरण है।
-अंतर देवी, सरपंच, मोरवानिया।

हम आधुनिक भारत के बच्चे हैं जो अपनी बातों और अपनी समस्याओं को लेकर समुदाय का ध्यान खींचेंगे और उनके समाधान के लिए समुदाय को आगे लाएंगे। जिससे हमारा गांव बाल मित्र गांव की अाेर बढ़ेगा।
रवीना, बाल पंचायत सरपंच।

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