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होगी जांच:चांदीबाड़ी में खेत में काम करने के दौरान मिला 25 ग्राम के तांबे का सिक्का, उर्दू में अंकित हैं शब्द

पूर्णिया/पूर्णिया पूर्व6 दिन पहले
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  • एक्सपर्ट मौलवी शमसुद्दीन ने कहा- देखने से सिक्का 300 वर्ष पुराना, पूर्व में भी आगाटोला में मिला था सिक्का

पूर्णिया पूर्व प्रखंड क्षेत्र के चांदी पंचायत अंतर्गत चांदीबाड़ी गांव के समीप इतिहास से जुड़े कुछ तथ्य मिले हैं। जिसमें एक व्यक्ति को अपने खेत में काम करने के दरमियान एक तांबे का सिक्का मिला है। जिसका वजन 25 ग्राम है।उस सिक्के में उर्दू भाषा में कुछ शब्द लिखा हुआ है। वही जब एक्सपर्ट से इस विषय मे जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने यह सिक्का 300 वर्ष पुराना होने की बात कही। वहीं कुछ लोग बताते हैं कि चांदीबाड़ी गांव के समीप खेतों में कई बार मिट्टी के बने बर्तन भी मिले हैं।कहा जाता है कि पूर्व में वहां गांव हुआ करता था। इसका प्रमाण नहर बनाने के दौरान भी मिला है। जिसमें खुदाई के दौरान कई कच्ची कुंआ भी मिला था। उक्त जमीन पर खेती करने वाले किसान संतोष मेहता व दिलीप मेहता बताते हैं हमारे पूर्वज भी उक्त जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। उस समय खेती के दौरान मिट्टी के बने बर्तन का अवशेष ज्यादा मिलते थे। कुछ लोगों को तो सोना व चांदी भी बर्तन मिला था। पूर्वज लोग बताते थे की यहां कभी गांव हुआ करता था। जहां काफी संख्या में लोग घर बनाकर रहते थे। मिट्टी के ज्यादा बर्तन मिलने पर कुछ लोगों का मानना है की यहां कभी कुम्हारों की बस्तियां हुआ करती थी। वर्तमान में किसान दिलीप मेहता को अपने खेत में वर्षों पुराना सिक्का मिलने के कारण गांव में कौतूहल का विषय बना हुआ है। पूर्व में भी आगाटोला में सड़क निर्माण के दौरान खुदाई के बाद मजदूरों को तांबा का सिक्का एक एक मिट्टी के बर्तन में मिला था। एक्सपर्ट मौलवी शमसुद्दीन बताते हैं कि पूर्व में भी रानीपतरा एवं आस पास के क्षेत्र में इतिहास से जुड़े प्रमाण मिले हैं। पहले भी शाह अकबर साह के जमाने का सिक्का मिला है। यह सिक्का देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि यह उससे भी कई वर्ष पुराना है। हालांकि इसमें अरबी भाषा में कुछ लिखा हुआ है। जो घिस जाने के कारण अस्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। वहीं प्रो.कमलेश्वरी प्रसाद मेहता ने बताता की हमारे पिताजी बताते थे कि पूर्व में चांदीबाड़ी गांव के समीप घना आबादी वाला गांव हुआ करता था। वे लोग मिट्टी के बने बर्तनों का उपयोग करते थे। जिसका प्रमाण आज भी देखने को मिलता है।

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