संक्रमण तेज:जिले में 445 नए मरीजों की पहचान एक्टिव पॉजिटिव मरीज 2978 हुए

पूर्णिया6 महीने पहले
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  • 24 घंटे में 440 मरीज रिकवर, पूर्णिया के कोरोना पीड़ित महिला की भागलपुर में मौत

जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में एक बार फिर बड़ा इजाफा हुआ है। गुरुवार को जिले में 445 नए पॉजिटिव मरीज मिले हैं। इसके साथ ही जिले में एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़ कर 2978 पहुंच गई है। वहीं इन 24 घंटे में 440 नए मरीज रिकवर हुए हैं। उधर, पूर्णिया निवासी 65 साल की महिला को कोरोना होने पर 27 अप्रैल को भागलपुर मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया था। जिनकी गुरुवार की सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई।
जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार जिले में अभी तक 5168 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले हैं। जिनमें से 2178 मरीज स्वस्थ्य हो चुके हैं। जबकि 12 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। वहीं 171 मरीजों का निजी अस्पताल के साथ -साथ कोविड केयर सेंटर में इलाज चल रहा है। जिसमें से सदर अस्पताल में 25,बनमनखी में20,धमदाहा में 6 मरीज के साथ-साथ मैक्स 7 अस्पताल में 25, फातमा हॉस्पिटल में 19, गैलेक्सी हॉस्पिटल मवन 13, क्रिस्चियन मेडिकल सेंटर में 19,केके हॉस्पिटल में 6,सद्भावना हॉस्पिटल मसान 14,नवज्योति हॉस्पिटल में 5, सीमांचल इमरजेंसी हॉस्पिटल में 6 ,अल्फा हॉस्पिटल में 10,और जीवन मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल मवन 9 मरीज का इलाज चल रहा है। जिला प्रशासन से मिली जानकारी के लिए वर्तमान में जिले में कोविड पॉजिटिव मरीज के लिए कुल 385 बेड चयनित हैं। जिसमें से 214 बेड अभी भी खाली हैं।
3098 लोगों का लिया गया सैंपल, मिले 252 मरीज : स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार को जिले में 3098 लोगों का सैंपल कोविड -19 जांच के लिए लिया गया था। जिसमें से आरटी -पीसीआर के माध्यम अब 700,रैपिड एंटीजन के माध्यम से 2296 और 102 लोगों का सैंपल ट्रू नेट मशीन के माध्यम से लिया गया था। जिसमे से 252 मरीज मिले।जिसमें से पूर्णिया पूर्व में सबसे ज्यादा 80,कसबा में 30, बनमनखी में 25, रुपौली में 22,डगरुआ में 21, बीकोठी में 19, धमदाहा में 15, श्रीनगर में 16, केनगर में 12,जलालगढ़ में 6 और अमौर व बायसी में 3-3 पॉजिटिव मरीज मिले हैं।

मेरे पति को बचा लो, किसी हॉस्पिटल में बेड दिला दो, कहां लेकर जाएं इन्हें

पूर्णिया | गुलाबबाग की एक महिला की करुण व्यथा सुनकर आपकी भी आंखें भर आएंगी। कोरोना संक्रमित मरीज के परिजनों का कमोबेश हर तरफ यही हालात हैं। यदि ऑक्सीजन लेवल घटा तो उन्हें सरकारी या प्राइवेट हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन सहित बेड मिलने की थोड़ी बहुत गुंजाइश तो रहती है, लेकिन यदि पेशेंट की हालात क्रिटिकल है और उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत है तो ऐसे बेड मिलना बहुत ही मुश्किल है। गुरुवार को कुछ ऐसे ही हालात थे। गुलाबबाग की यह महिला कभी अपने रिश्तेदारों को फोन करती तो कभी अपने पति के दोस्तों को। सबसे बस एक ही रट.. भैया, मेरे पति के लिए किसी हॉस्पिटल में एक बेड दिला दो...। कहां लेकर जाएं इन्हें। दरअसल इस महिला के पति को कुछ दिन पहले सर्दी-खांसी हुई थी और फिर ये लोग नॉर्मल फ्लू समझकर अपने घर में ही इलाज करने लगे। इस बीच अचानक हालत बिगड़ने लगी और ऑक्सीजन लेवल नीचे गिरने लगा। फोन पर बदहवाश महिला की रोती-बिलखती आवाज सुनकर उनके रिश्तेदार व जान-पहचान के लोग भी रुआंसे हो जा रहे थे। इनके पास भी अपने को असहाय महसूस कर सिस्टम पर अपना गुस्सा निकालने के सिवा कोई चारा नहीं था। बेड के लिए प्राइवेट हॉस्पिटलों का चक्कर काट रहे महिला के देवर ने बताया कि किसको नहीं बोले हैं, जनप्रतिनिधि भी अपने आप को असहाय महसूस कर रहे हैं। सदर अस्पताल में वेंटिलेटर रहने के बावजूद वह ऑपरेट नहीं हो रहा। किसी अस्पताल में बेड नहीं मिलने के कारण पेशेंट को थक-हारकर कुंडी पुल के पास एक हॉस्पिटल में एडमिट कराएं हैं। यहां वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है, अब भगवान ही मालिक हैं।

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