जन संकल्प से हारेगा कोरोना:35 की उम्र...ऑक्सीजन लेवल 70 से 80, चंद फासले पर थी मौत, ख्याल आया-चलो फिर जीकर देखें और 9 दिन आईसीयू में लड़ने के बाद कोरोना को हरा दिया

रीना मिश्रा | कोरोना वॉरियर6 महीने पहले
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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की कहानियां; कोरोना से स्वस्थ हुईं रीना मिश्रा पहले खुद फिर अस्पताल पर भरोसा किया, बीमारी में थोड़ा भी विचलित नहीं हुईं, बच्चे की तरह डॉक्टरों की हर बात मानी

35 साल उम्र में जब सर्दी-जुकाम, बुखार हुआ। तो मैंने हल्के में लिया। लेकिन थोड़ा गंभीर भी हुआ, कोरोना की आशंका में तुरंत जांच कराई। रिपोर्ट निगेटिव आई। डॉक्टर से मिली तो टाइफाइड होने की बात बताई गई। टाइफाइड की दवा लेती रही। जब बीमार हुई तो मैं अपने ससुराल मुंगेर में थी। फिर मैं इलाज के लिए पूर्णिया आई। 20 अप्रैल को आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया। डॉक्टर से मिली तो डॉक्टर ने कहा कि सिटी स्कैन करवाने कहा। थोड़ा-बहुत लक्षण कोरोना का था, सांस लेने में परेशानी हो रही थी। आक्सीजन लेवल काफी कम हो गया था। मैंने तुरंत सिटी स्कैन कराया, जिसमें 70 प्रतिशत लंग्स इफेक्टेट हो चुका था। जिंदगी में मैंने इतने उतार-चढ़ाव देखे कि इस रिपोर्ट से थोड़ा सा भी विचलित नहीं हुई। पूर्णिया में इलाज के लिए अस्पतालों में बेड नहीं मिली। बाद में किसी तरह सद्भावना हॉस्पिटल के निदेशक कुशल कुमार की पहल पर अस्पताल में बेड मिली। उस वक्त मैं डर रही थी। अपने भाई से बात करती रही। फिर मुझे 20 अप्रैल को ही सद्भावना हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। मैं और डर गई। यहां तो जिंदगी मौत के बीच चंद लम्हों का ही तो फासला था। मुझे आईसीयू में भर्ती कर लाइफ सपोर्ट दिया गया। ऑक्सीजन लेवल ठीक किया। मुझे जब आईसीयू में भर्ती कराया था, उस समय मेरा ऑक्सीजन लेवल 70-80 के बीच था। फिर मैंने सोचा, अब तो ऊपर वाले के पास जाने का वक्त आ गया है। बस एक बार मुझे अंदर से पॉजिटिव होना है। देखा जाएगा... जो होना है। होगा। सबसे पहले मैंने अस्पताल पर विश्वास किया। अस्पताल में भी बेहतर इलाज हो सकता है। इसे ठाना। डॉक्टर के दी सलाह दवा परहेज आदि एक बच्चे की तरह मानी। भाई भास्कर दुबे ने काफी देखभाल की। वह पीपीई किट पहनकर मुझे खाना खिलाता रहा, कपड़े चेंज करवाता रहा। इस बीच मेरे पति रविश कुमार मिश्रा रोज मिलने आते रहे। डॉक्टर से मेरे स्वास्थ्य पर लगातार बातें करते रहे। वे मोटिवेट करते रहे अभी पूरे परिवार को को डॉक्टर (मैंने घर में ही अपने पति व सास ससुर के बीमार होने पर घरेलू उपचार करती थी समय पर दवा देती थी इस लिए मेरे पति प्यार से डॉक्टर कहते थे।) की जरूरत है। आप ठीक हो जाएंगे। आज 9 दिन बाद पूरी तरह ठीक होकर घर लौटा हूं। घर की पहली दहलीज पर कदम रखते हुए ऐसा लगा, मानो दूसरा जन्म लेकर लौट रही हूं। मेरी सभी पॉजिटिव मरीजों से अपील है, खुद को अंदर से मजबूत रखें घबराने की जरूरत नहीं, आपकी हिम्मत ही कोरोना की दवाई है। डर कोरोना है, आत्मविश्वास वैक्सीन। (शिवपुरी पूर्णिया की रीना मिश्रा कुशल गृहिणी हैं। मुंगेर में ससुराल हैं।)

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