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महापर्व छठ:नहाय-खाय के साथ छठ शुरू, आज खरना के बाद शुरू होगा निर्जला व्रत

पूर्णिया6 दिन पहले
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नहाय-खाय के दिन बुधवार को सिटी के काली मंदिर स्थित सौरा नदी में स्न्नान करने पहुंचे लोग।
  • नहाय-खाय के दिन सिटी समेत जिले के विभिन्न नदियों में स्नान को उमड़े लोग, छठ व्रत पूरा कर पाने का मांगा आशीष
  • छठ पूजा को लेकर खुश्कीबाग बाजार में खरीदारी को उमड़े लोग

नहाय खाय के साथ चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व का शुभारंभ हो गया। बुधवार को नहाय खाय को लेकर सुबह से ही शहर के सिटी स्थित काली मंदिर घाट के अलावा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की विभिन्न नदियों-घाटों में महिलाओं ने स्नान कर व्रतियों ने भगवान के सामने छठ व्रत का संकल्प लिया। साथ ही इसे पूरा करने का आशीर्वाद भी मांगा। वैसे तो मंगलवार से ही छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं ने सिटी के काली घाट नदी तट पर पहुंचना शुरू कर दिया था, लेकिन नहाय-खाय के दिन नदी में नहाने का सिलसिला दोपहर बाद तक जारी रहा। नहाय-खाय के साथ ही लोगों ने छठ महापर्व की तैयारी शुरू कर दी है। अनुष्ठान के दूसरे दिन गुरुवार को सूर्यास्त के बाद व्रती खरना करने के साथ-साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करेंगे।शुक्रवार को अस्ताचलगामी सूर्य को संध्याकालीन अर्घ्य दिया जाएगा और शनिवार को उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही पर्व का समापन हो जाएगा। नहाय खाय में कद्दू का विशेष महत्व होने की वजह से हर घर में इसका एक व्यंजन बना। इसके बाद व्रती खरना पूजन की तैयारी में जुट गए ।

छठ पूजा को लेकर खुश्कीबाग़ बाजार में उमड़ी लोगों की भीड़।
छठ पूजा को लेकर खुश्कीबाग़ बाजार में उमड़ी लोगों की भीड़।

न कोई पंडित और न कोई जात-पात, भक्ति का विराट रूप लोकपर्व छठ
लोक पर्व छठ कठिन तपस्या है। इस पर्व में न किसी पंडित की जरूरत होती है और न किसी विधि-विधान की। इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें जात-पात का कोई भेदभाव नहीं दिखता है। पर्व के दौरान छठी माता के साथ सूर्य की आराधना होती है। पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली सभी सामग्री भी प्राकृतिक होती है। उल्लास से लबरेज इस पर्व में सेवा और भक्ति भाव का विराट रूप दिखता है। इस पर्व में न सिर्फ हिन्दू समुदाय के लोग बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोगों की भी बड़ी आस्था रहती है।

खरना आज, खीर पूरी का भोग लगा कर व्रती करेंगी उपवास
लोक आस्था का महापर्व छठ अनुष्ठान के दूसरे दिन यानी खरना को सूर्यास्त के बाद को व्रती खरना पूजन करेंगे। मिट्टी के नये चूल्हे पर दूध, गुड़ व चावल से खीर और पूरी का प्रसाद बनाया जाएगा। व्रती पूरे दिन उपवास रखकर सूर्यास्त के बाद छठी मइया की पूजा करेंगे। छठी मइया को केले के पत्ते पर प्रसाद चढ़ाया जाएगा। पूजा समाप्त होने के बाद व्रती व परिजन छठी मइया को प्रणाम कर आशीर्वाद लेंगे। इसके बाद व्रती अपने सगे-संबंधियों के साथ प्रसाद ग्रहण करेंगे।

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