लापरवाही:बिना डॉक्टर के चार पार्टनर मिलकर एक माह से चला रहे थे हॉस्पिटल, बाहर से आते थे डॉक्टर

रवि रौशन मनीष | पूर्णिया2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
कप्तानपाड़ा स्थित जीवन निधि मल्टी स्पेशियलिटी एण्ड ट्रामा सेंटर। - Dainik Bhaskar
कप्तानपाड़ा स्थित जीवन निधि मल्टी स्पेशियलिटी एण्ड ट्रामा सेंटर।
  • जीवन निधि मल्टी स्पेशियलिटी एण्ड ट्रामा सेंटर में प्रसूता की मौत के बाद चौंकानेवाले खुलासे
  • पिछले 10 दिनों में दो मौत के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग, निबंधन किया गया रद्द

कप्तानपाड़ा स्थित जीवन निधि मल्टी स्पेशियलिटी एण्ड ट्रामा सेंटर में सोमवार को हुई प्रसूता की मौत के बाद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। 10 दिनों के अंदर दो मरीज की मौत के बाद जब भास्कर की टीम मंगलवार को अस्पताल पहुंची तो वहां सन्नाटा पसरा था। पड़ताल के दौरान पता चला कि यहां कोई डॉक्टर हैं ही नहीं। बिना डॉक्टर के ही एक महीने से अस्पताल का संचालन किया जा रहा था, क्योंकि नवम्बर के पहले सप्ताह में ही इससे पहले वाले संचालनकर्ता हॉस्पिटल मकान मालिक को हैंडओवर कर चुके थे और सीएस को इसकी जानकारी दे दी थी। जरूरत पड़ने पर पैसे देकर डॉक्टर को बाहर से बुलाते थे। अब बिना किसी परमिशन के यह अस्पताल किसकी देखरेख में चल रहा था यह जांच का विषय है। हालांकि जीवन निधि मल्टी स्पेशियलिटी एण्ड ट्रामा सेंटर का निबंधन रद्द कर दिया गया है। इससे पहले जीवननिधि मल्टी स्पेशियलिटी एण्ड ट्रामा सेंटर हॉस्पीटल डॉ. निधि रानी, सोनी कुमारी व श्रवण चौधरी के द्वारा संचालित किया जा रहा था। इसमें नुकसान होने के बाद तीनों ने एक माह पूर्व हॉस्पिटल छोड़ दिया। अब नए लोग राजीव कुमार विश्वास, सुनील कुमार,सुनील कुमार नंबर-2 व संजीव कुमार के द्वारा इसे संचालित किया जा रहा है। बताया जाता है कि ये चारों पार्टनर हैं। अब यहां यह सवाल उठता है कि जब जीवननिधि हॉस्पिटल को बंद करने का लिखित आवेदन स्वास्थ्य विभाग को दिया गया था तो किसकी शह पर फर्जी तरीके से करीब एक महीने से बिना डॉक्टर के ये चारों पार्टनर बेफिक्र होकर हॉस्पिटल संचालित कर रहे थे।

डॉक्टरों से 1000-2000 में संपर्क कर बुलाते थे
निजी अस्पताल चलाने वाले चारों पार्टनर की सांठ-गांठ स्वास्थ्य विभाग व बड़े-बड़े सफेदपोश लोगों से है। यही कारण है कि इनलोगों को आसानी से मेडिकल कॉलेज में इलाजरत मरीजों की जानकारी मिल जाती थी और ये उनसे संपर्क कर उन्हें बहला-फुसलाकर अपने हॉस्पिटल में भर्ती कर लेते थे। फिर, निजी डॉक्टरों से संपर्क कर 1000-2000 रुपए में दो टाइम डॉक्टर बुलाकर मरीजों का इलाज करवाते हैं। जबकि मरीजों से लाखों रुपए की उगाई की जाती है। इससे पहले भी इसी अस्पताल में मेडिकल कालेज से मरीज को बहला-फुसला कर लाया गया था। 27 नवंबर को इसी अस्पताल में उस प्रसूता की मौत हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के द्वारा हॉस्पिटल से 72 घंटे में जवाब मांगा गया था। हॉस्पिटल प्रबंधन ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया।

आप भी आइए, सब मिलकर खदेड़ते हैं दलाल को : अधीक्षक
मेडिकल कॉलेज में दलाल की सक्रियता को लेकर जब मेडिकल कॉलेज अधीक्षक डॉ. विजय कुमार से बात की गई तो उन्होंने अपनी असमर्थता जताई। कहा-बताइए दलाल को कैसे मेडिकल कॉलेज से खदेड़ा जाए। आप भी आइए, सब मिलकर खदेड़ते हैं दलाल को। आज भी मेडिकल कालेज से दलालों को खदेड़ा गया है। अकेले दलालों को भगाना आसान नहीं है।

मकान मालिक ने दोबारा चार नए लोगों के साथ हॉस्पिटल खोलने का किया एग्रीमेंट
मकान मालिक हीरा चौधरी ने बताया कि 10 नवंबर को दूसरा हॉस्पिटल खोलने के नाम पर राजीव कुमार विश्वास, सुनील कुमार, संजीव कुमार व सुनील कुमार-2 के साथ एग्रीमेंट किया गया है। इसमें उनलोगों ने यह भी कहा था कि हॉस्पिटल का नाम बदलकर नया फार्म के नाम से अस्पताल चलाएंगे। इसके लिए मार्च तक का समय लिया था। जब एक मरीज की मौत हुई तो इन लोगों को अस्पताल बंद करने को कहा था। लेकिन, विभाग के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं होता देख इन लोगों ने कहा कि मरीज से मामला रफा-दफा हो गया है। अस्पताल के तीन पार्टनर ने फोन नहीं उठाया। एक पार्टनर राजीव कुमार विश्वास ने बताया कि मैं अस्पताल में पाटर्नर नहीं हूं। स्टाफ था, एक माह पहले ही नौकरी छोड़ चुका हूं।
कौन फर्जी तरीके से संचालित कर रहा था अस्पताल, कराई जाएगी जांच : सीएस
सिविल सर्जन डॉ. एस के वर्मा ने बताया कि संचालकों ने एक माह पूर्व ही अस्पताल छोड़ने की जानकारी दी थी। डॉ.निधि रानी ने बताया था कि अब मेरा इस अस्पताल से कोई लेना-देना नहीं है। निबंधन रद्द कर दिया गया है। लेकिन, इसका कौन फर्जी तरीके से संचालन कर रहा था इसकी जांच की जाएगी।

खबरें और भी हैं...