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अस्पताल बना खलिहान:स्वास्थ्य उप केंद्र चनका को 7 साल बाद भी डॉक्टर की तैनाती का इंतजार

निक्कू कुमार झा | चंपानगर18 दिन पहले
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चनका पंचायत के उपस्वास्थ्य केंद्र का टूटा दरवाजा। - Dainik Bhaskar
चनका पंचायत के उपस्वास्थ्य केंद्र का टूटा दरवाजा।
  • उपस्वास्थ्य केंद्र भवन के कमरे में उगे घास, मेज व कुर्सी फांक रहा धूल
  • ग्रामीण- व्यवस्था ठीक हो तो नहीं जाना पड़ेगा 3 किमी. दूर

गांव में सात वर्ष पहले जब स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाया गया, तब लोगों में इस बात की खुशी थी कि कई किमी दूर ब्लॉक के स्वास्थ्य केन्द्र पर इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा। मगर बड़ी बात यह है कि आज तक यहां डाक्टर आए ही नहीं। ग्रामीण सुमन झा बताते हैं कि केंद्र पर आजतक डाक्टर नहीं आए। इससे गांव के लोगों को बीमार होने पर कई किलोमीटर दूर श्रीनगर स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। कई गांवों के लोग गांव के झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करवाने को मजबूर हैं। यहां तक ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र पर स्वास्थ्य कर्मी कभी कभार ही आती हैं। ज्यादातर वह दूसरी जगह पर बैठकर चली जाती हैं। अगर यह उपस्वास्थ्य केंद्र सुचारू रूप से चले तो लगभग 2 हजार लोग इससे लाभान्वित होगें।
सूख रही मकई, अंदर उग आए घास
श्रीनगर प्रखंड के चनका पंचायत के वार्ड 5 में बना स्वास्थ्य केन्द्र देख रेख के अभाव में खंडहर हो गया है। अब ये भवन भूत बंगला में बदल गया है, जहां कमरों के अंदर हरी घास उग आई है। गांव के सुमन झा, रूदल विश्वास, देवी लाल महलदार, खिखरू रजक, उपेन्द्र हासदा, अमित झा, सुनिल झा, ताला मरांडी, मदन मरांडी, राजमल वर्मा कहते हैं कि जब से ये उपस्वास्थ्य केंद्र बना है, तब से कोई भी डॉक्टर यहां दर्शन देने नहीं आये हैं। इस उपस्वास्थ्य केंद्र का निर्माण सात वर्ष पूर्व किया गया था। जो अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। ना तो ढंग का दरवाजा है ना तो ढंग की खिड़की है। ना तो बैठने की जगह है। दरवाजा भी टूटा हुआ है। इससे कुत्ता, बिल्ली व कई अन्य जानवर अंदर प्रवेश कर अपना बसेरा बना लेते हैं।

इलाज को जाना पड़ता है 3 किमी. दूर

ग्रामीणों ने बताया कि यहां इलाज नहीं होने से हमलोगों को 3 किमी दूर श्रीनगर स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। उक्त केंद्र की स्थापना होते ही देहाती क्षेत्रों के मरीजों को इलाज की सुविधा उपलब्ध होने लगी। विभाग की उदासीनता कहें या जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से आज उक्त केंद्र बिल्कुल जर्जर है। भवन की स्थिति यह है कि दवा छुपाना तो दूर सिर छुपाने के लिए भी जगह नहीं है। लेकिन यहां विभाग द्वारा एक एएनएम जरूर तैनात है। जो महीने में एक बार आकर बच्चों को इंजेक्सन देकर चली जाती है। आज उक्त उप स्वास्थ्य केंद्र के प्रांगण में बड़े-बड़े जंगली घास उग आए हैं। इस दृश्य को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि माह में यह उप स्वास्थ्य केंद्र कितने दिन खुलता होगा।

व्यवस्था हो ठीक तो ग्रामीणों को मिल सके इलाज
ग्रामीण ने कहा कि लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने को लेकर सरकार ग्रामीण उपस्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण करवाती है। सरकारी आदेश के अनुसार, पांच हजार से ज्यादा आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज के लिए स्वास्थ्य उपकेंद्रों को खोला जाए और इसमें जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा कर्मचारियों को भी तैनात किया जाए। इसके बावजूद गांवों में स्थापित किए गए अधिकांश उपकेंद्र बंद हालत में पड़े हैं। अगर व्यवस्था ठीक हो जाए तो ग्रामीणों को समय पर उचित इलाज मिल सकेगा।

वैक्सीनेशन को लेकर रोज ड्यूटी देना संभव नहीं : सुरेंद्र
श्रीनगर प्रखण्ड स्वास्थ्य प्रबंधक सुरेंद्र कुमार मंडल ने बताया कि कोरोना को लेकर एएनएम को टीकाकरण करना पड़ता है। जिस कारण रोज वहां जाकर ड्यूटी देना संभव नहीं है। फिर भी एएनएम ससमय उपस्वास्थ्य केंद्र में तैनात रहती है।

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