प्रदेश और केंद्र में मंत्री की पंचायत से ग्राउंड रिपोर्ट:मंत्रीयों के गांवों की खुली पोल पट्‌टी; पंचायत चुनाव में स्थानीय लोगों ने उठाएं गंभीर मुद्दे, मूलभूत सुविधाएं भी नहीं

पूर्णियाएक महीने पहलेलेखक: ​​​​​​​मदन / मनोहर कुमार
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स्थानीय मुद्दे पर चर्चा करते सिहुली कुड़िया टोला के ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
स्थानीय मुद्दे पर चर्चा करते सिहुली कुड़िया टोला के ग्रामीण।

प्रदेश की खाद्य आपूर्ति मंत्री व धमदाहा की विधायक लेशी सिंह के गांव सरसी इस्तमबरार में जहां पहले के पंचायत चुनावों में दहशत का माहौल रहता था, इस बार यहां ऐसा नहीं दिख रहा। दो दशक पहले रंजिश में मुखिया की हत्या भी हो चुकी है। यहां के मतदाताओं ने बताया कि इस बार अब लगता है कि सही मायने में लोकतंत्र है।

पहले जहां बंदूकें गरजती थी, खून-खराबे होते थे, वहीं इस बार न तो दहशत वाला माहौल है और न ही कोई दबाव। सरसी में वोटरों के चेहरे पर शांति व सुकून के भाव दिख रहे थे। हालांकि बातचीत में मतदाताओं के इस दावे व हकीकत में थोड़ा विरोधाभास भी दिखा। वे संभल कर बात कर रहे थे और खुलकर बोलने से परहेज। 6657 वोटरों वाले अनारक्षित सरसी इस्तमबरार पंचायत के जातिगत समीकरण में राजपूत व महादलित समुदाय के वोटर की भूमिका निर्णायक मानी जाती है।

दूसरी बार मैदान में हैं वन्दना तो दो टर्म सरपंच रहे संजीव भी हैं मुखिया प्रत्याशी
सरसी से निवर्तमान मुखिया वन्दना सिंह दूसरी बार अपना भाग्य आजमा रही हैं। वहीं, दो बार सरपंच रहे संजीव कुमार मिश्रा भी मुखिया पद के उम्मीदवार हैं। राजेश सिंह, प्रशांत सिंह व तेतरी देवी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। पंचायत के कुल मतदाता 6657 में 3428 पुरूष व 3229 महिला हैं।

पीएचसी की जरूरत : पंचायत में पीएचसी नहीं रहने के कारण लोग बड़े परेशान हैं। सिहुली कुड़िया टोला के लालमोहन ऋषि, राजो ऋषि, रवींद्र ऋषि, विकास कुमार ऋषि बताते हैं कि हमें सबसे ज्यादा जरूरत अपस्ताल की है। गंभीर बीमार होने पर बनमनखी या पूर्णिया जाना पड़ता है।

मंत्री जयंत राज का गांव, कुडरो में चार मुखिया प्रत्याशी चुनाव मैदान में, सबका मुद्दा विकास; मतदाताओं को हाईटेक प्रचार से साधने का प्रयास
मंत्री जयंत राज के गांव कुडरो पंचायत में कुल 4 प्रत्याशी मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। सभी विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं। एक मुखिया प्रत्याशी दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं, जो निवर्तमान मुखिया हैं। चारों प्रत्याशियों का औसतन उम्र 45 से 50 वर्ष के बीच है। इन पर किसी प्रकार का मुकदमा दायर नहीं है। इस बार पंचायत चुनाव में डोर टू डोर के साथ- साथ सोशल मीडिया पर प्रत्याशी काफी ज्यादा एक्टिव है।

इस बार प्रत्याशियों द्वारा फेसबुक पर काफी संख्या में लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट मिल रहा है। जिनमें महिला प्रत्याशी भी शामिल है। इस बार पंचायत चुनाव में महिलाओं की भागीदारी भी काफी है। महिला प्रत्याशी के पति निवेदक के रूप में प्रचार प्रसार में जुटे हुए हैं। साथ ही पंपलेट, पोस्टर बैनर में भी महिला प्रत्याशी के साथ पति की फोटो

चार मुखिया प्रत्याशी, इनमें सामान्य वर्ग के साथ-साथ एससी-एसटी भी
कुडरो पंचायत में चार मुखिया प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। इनमें सामान्य वर्ग के साथ-साथ एससी-एसटी भी हैं। पंचायत में पिछड़ा व अति पिछड़ा 50%, सामान्य 25%, जबकि एससी एसटी 25% वोटर है। इसलिए कुडरो पंचायत में अगड़ी जाति के प्रत्याशी भी जीत का दावा कर रहे हैं। पार्टी सिंबल का चुनाव नहीं होने से सामान्य लोग चुनाव मैदान में हैं। निवर्तमान मुखिया प्रत्याशी ग्रामीण कार्य मंत्री जयंत राज कुशवाहा के रिश्तेदार हैं, जिन्हें कार्यकर्ताओं का समर्थन है।

प्रखंड प्रमुख की रेस में राजद के वरीय नेता
पंचायत चुनाव में बांका प्रखंड से राजद के जिला अध्यक्ष ने चुनाव लड़ा था, जिन्हें हार मिली है। वहीं, राजद के एक अन्य वरीय नेता ने पंचायत चुनाव में जीत हासिल की है, जो प्रखंड प्रमुख की रेस में भी शामिल हैं। वर्तमान में बांका प्रखंड प्रमुख के पद पर भी काबिज रह चुके हैं।

दुर्गा पूजा में बौंसी स्थित आवास पर आए थे मंत्री :
हाल में दुर्गा पूजा में ग्रामीण कार्य मंत्री अपने बौसी स्थित आवास पर आए थे। जहां से वह कई दुर्गा मंदिर पहुंचे थे। मंत्री जब भी आते हैं, अपने घर पर ही रुकते हैं। लेकिन राजनीतिक दखलअंदाजी कम ही रहती है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी चाैबे का गांव दरियापुर... गांव के पास है नदी, फिर भी सिंचाई भगवान भराेसे; प्रत्याशियों के दावाें-वादाें की बह रही है दरिया
केेंद्रीय मंत्री अश्विनी चाैबे के गांव दरियापुर की फिजां में चुनावी दावाें-वादाें की भी दरिया खूब बह रही है। गांव के पक्के मकानाें की दीवार हाे या दुकानाें का किनारा... उम्मीदवाराें के पाेस्टराें से पटे पड़े हैं। इन पाेस्टर-बैनर में वादे-दावे की झलक है। लेकिन वाेटराें में चुनाव काे लेकर उत्साह कम और नाराजगी ज्यादा दिख रही है।

चुनावी माहाैल पर चर्चा शुरू हाेते लाेग तल्खी भरे अंदाज में कहते हैं-गांव के पास से अंधरी नदी बहती है, फिर भी सिंचाई के लिए किसानाें काे भगवान भराेसे रहना पड़ता है। बालू के अवैध खनन से नदी काफी नीचे चली गई और खेत ऊपर हाे गया है। नदी का पानी खेताें तक नहीं पहुंच पाता है। पंचायत सरकार भवन के लिए अब तक जमीन नहीं चिह्नित की जा सकी है। बीते 15 वर्षाें से लाेग इसके लिए आस लगाए बैठे हैं।

मंत्री के भतीजे पिछली बार हार गए थे, इस बार सरपंच के लिए मैदान में
शाहकुंड प्रखंड की दरियापुर पंचायत में 12 वार्ड हैं। यहां से मुखिया की कुर्सी की चाहत लिए चार उम्मीदवार मैदान में हैं। सरपंच पद के लिए 8 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें एक मंत्री के भतीजे उज्जवल कुमार चाैबे भी हैं। पिछली बार उन्होंने मुखिया का चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे।

अगड़ी-पिछड़ी जाति के वाेटराें काे रिझाने में जुटे
दरियापुर में पंचायत चुनाव के लिए स्थानीय मुद्दे से ज्यादा जातीय समीकरण अहम है। प्रत्याशी अपने-अपने जातीय समीकरण के आधार पर अगड़ी-पिछड़ी जाति के वाेटराें काे रिझाने में लगे हैं।

प्रचार का नायाब तरीका: के सहारे कर रहे प्रचार।
प्रचार का नायाब तरीका: के सहारे कर रहे प्रचार।