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बेलाप्रसादी की घटना:विवादित जमीन को ले 3 दिन से हो रही थी पंचायत मुरसलीन ने फैसले को मानने से कर दिया था इंकार

प्रवीण कुमार | रुपौली14 दिन पहले
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जमीन विवाद में मारे गए मो. जहांगीर के परिजन रोते-बिलखते। - Dainik Bhaskar
जमीन विवाद में मारे गए मो. जहांगीर के परिजन रोते-बिलखते।
  • गोली की आवाज सुन विवाद सुलझाने आए जमीन मालिक के छोटे भाई की हत्या, फिर प्रतिशोध में दूसरे पक्ष से भी एक की हत्या
  • जनता दरबार में भी नहीं सुलझ सका था विवाद, पंचों ने अदालत में जाने की दी सलाह
  • मुरसलीन पंचायत खत्म होते ही झंझट का ताना-बाना बुनने लगा था, उसका साला कौशर भी लड़ाई के मूड में था

रुपौली के बेला प्रसादी गांव में जमीन विवाद में दो लोगों की हत्या से गांव में भय का माहौल है। मृतकों में एक झगड़ा सुलझाने आए जमीन मालिक इरशाद का भाई मो. जहांगीर (40) और दूसरे पक्ष के मो. मुरसलीन (50) हैं। ऐसा नहीं है कि वर्षों से दोनों पक्ष में चल रहे भूमि विवाद को बेला प्रसादी के ग्रामीणों ने सुलझाने का प्रयास नहीं किया। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले तीन दिनों से ग्रामीण स्तर पर मुरसलीन और इरशाद के बीच चल रहे भूमि विवाद का हल शांतिपूर्ण तरीके से निकालने के लिए पंचायती चल रही थी। पंचों ने इरशाद से कहा कि मुरसलीन गांव का दामाद है। खरीक से आकर यहां बसा है। वर्षों से कोर्ट कचहरी के चक्कर में बहुत रुपए खर्च हुआ है। इसलिए 50 हजार बतौर खर्चा दे दें। इरशाद तैयार भी हो गए। लेकिन, मुरसलीन पंचायती मानने से इंकार कर दिया। फिर दूसरे दिन पंचायत बैठी। पंचों ने इरशाद से कहा कि मुरसलीन को मात्र एक कट्ठा जमीन है। इसलिए आप अपने छह कट्ठा जमीन में से एक कट्ठा मुरसलीन को दे दें। इस बात को भी इरशाद आसानी से मान लिया। लेकिन,मुरसलीन की गिद्ध नजर इरशाद के छह कट्ठा जमीन पर थी। वह फिर पीछे हट गया। मुरसलीन पंचों के सामने एक ही रटी-रटाई बात कहने लगा कि विवादित जमीन उनकी पत्नी के दादा के नाम से ख़ातियानी है, जिसमें उनके ससुराल वालों का छह कट्ठा शेयर बनता है। इस पर सभी पंचों ने दोनों पक्षों को कोर्ट जाने की सलाह दी गई। गांव वालों ने बताया कि पंचायती खत्म होते ही मुरसलीन अपने ससुराल पक्ष के साथ मिलकर शनिवार रात से ही झंझट का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया। इसमें मुरसलीन का साला कौशर आर-पार की लड़ाई के मूड में था। दो साल पहले भी मुरसलीन व इरशाद के बीच लड़ाई हो चुकी है।

मुरसलीन के अड़ियल रवैये के कारण नहीं हुआ फैसला
कुछ दिन पहले रूपौली थाना में आयोजित जनता दरबार में भी इसे सुलह करने का प्रयास किया गया। लेकिन, मुरसलीन के अड़ियल रवैये के कारण जनता दरबार में भी मामले का निष्पादन नहीं हो सका। रूपौली थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि दोनों पक्ष का कागजात देख कर सीओ ने मामला सुलह करवाने का प्रयास किया गया। लेकिन, मुरसलीन इसे मानने से इन्कार कर दिया। अंततः दोनों पक्ष को सक्षम न्यायालय में जाने की सलाह दी गई।

दो लोगों की हत्या के बाद अस्पताल में जुटी लोगों की भीड़।
दो लोगों की हत्या के बाद अस्पताल में जुटी लोगों की भीड़।

दो पक्षों के बीच पुराना जमीन विवाद था
दो पक्ष में पुराना जमीन विवाद था। एक पक्ष का कहना था कि उसके पूर्वज के नाम से खतियानी जमीन है। इसलिए विवादित जमीन उनका है, जबकि दूसरे पक्ष के लोगों के पास केवला और अपडेट रसीद था। दोनों पक्ष को सक्षम न्यायालय में जाने कहा गया था। रविवार को हुए विवाद में गोली चली है। दो लोगों की मौत हुई है। एक पक्ष से पुलिस को फर्द बयान मिल गया है, जिस पर मामला दर्ज किया जा रहा है। दूसरे पक्ष से फर्द बयान नहीं आया है। जिस कट्टा से फायर किया गया था, पुलिस ने उसे बरामद कर लिया है। - मनोज कुमार, थानाध्यक्ष, रुपौली

क्या है पूरा जमीन विवाद
जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ है, उस जमीन का कुल रकवा एक बीघा है। इसका खतियान मुरसलीन के साला कौशर के दादा याकूब सहित तीन भाइयों के नाम दर्ज है। वर्षों पहले फरीकेन बंटवारा में उक्त एक बीघा जमीन सभी की रजामंदी से एक भाई शमसुद्दीन के हिस्से में दे दी गई। उसी बंटवारे के कागजात के आधार पर जमीन का नामान्तरण लगभग 50 वर्ष पूर्व ही शमसुद्दीन के नाम हो गया। शमसुद्दीन ने उक्त जमीन को अपनी बेटी सितारी खातून के नाम दान कर दिया। सितारी ने भी नामांतरण के बाद जमीन अपनी बेटी अंजुम आरा को दान-पत्र में रजिस्ट्री कर दी। अंजुम आरा के नाम से मालगुजारी रसीद भी कटने लगा। अब अंजुम आरा ने उक्त जमीन को अलग-अलग लोगों के हाथों टुकड़ों में बेच दी। अंजुम आरा से ही इरशाद ने भी छह कट्ठा जमीन अपनी पत्नी रेहाना के नाम खरीद की। इस बीच दस साल पहले जब मुरसलीन अपने पैतृक गांव खरीक से बेला प्रसादी बसने आया तो उसने भी अंजुम आरा से उसी प्लॉट में एक कट्ठा जमीन खरीदी और घर बनाकर रहने लगा। बताया जाता है कि जैसे ही मुरसलीन को पैर रखने की जगह मिली कि मुरसलीन ने विवाद को जन्म देना शुरू कर दिया। मुरसलीन अपने ससुराल वालों को यह कहकर भड़काने लगा कि उक्त जमीन में खतियान के हिसाब से एक बीघा का तीसरा हिस्सा उनका भी होगा। धीरे-धीरे यह बात विवाद में परिणत हो गई। दो साल पहले जब मुरसलीन को मालूम हुआ कि उसके घर के बगल की जमीन अंजुम आरा ने इरशाद की पत्नी के हाथ बेच दी है तो वह जबरन इरशाद की जमीन में घर बनाने लगा। उस वक्त भी इरशाद ने अपने परिजनों के साथ मिलकर मुरसलीन द्वारा बनाए घर और घेरा को आग के हवाले कर इसे खाली करवाया था। उसी समय से मुरसलीन और इरशाद के बीच छह कट्ठा जमीन को लेकर अघोषित जंग छिड़ गई, जो दो जान लेकर खत्म हुई।

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