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हिंदी दिवस:पूर्णिया ने हिंदी साहित्य व भाषा को समृद्ध बनाया : कुलपति

पूर्णिया4 दिन पहले
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कुलपति का स्वागत करते स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के सदस्य। - Dainik Bhaskar
कुलपति का स्वागत करते स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के सदस्य।
  • पूर्णिय विश्वविद्यालय में ज्ञान विज्ञान की माध्यम भाषा हिन्दी : अवरोध और समाधान पर सेमिनार

हिंदी दिवस के अवसर पर पूर्णिय विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के तत्वावधान में विभागीय सेमिनार किया गया।ज्ञान विज्ञान की माध्यम भाषा हिन्दी : अवरोध और समाधान पर आयोजित सेमीनार की अध्यक्षता प्रोफेसर डॉ. मिथिलेश मिश्र ने की। कुलपति प्रो. डॉ. राजनाथ यादव के संरक्षण में हिंदी दिवस 2021 और” हिंदी सम्मान समारोह” के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम में हिंदी विभाग की ओर से कथाकार चंद्रकिशोर जायसवाल को हिंदी कथा साहित्य में ग्यारह उपन्यास, एक सौ सोलह कहानियाँ, छह नाटक, चार एकांकी आदि के लिए रचनाकार सम्मान तथा पूर्णिया विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र नारायण यादव को रेणू साहित्य के गहन समीक्षा के लिए समीक्षा सम्मान से अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। पूर्णिया विश्वविद्यालय के द्वारा कथाकार चंद्रकिशोर जायसवाल व डॉ. सुरेन्द्र नारायण यादव के सम्मान पर समाजसेवी और साहित्यकार भोला नाथ आलोक दोनों साहित्यकारों को सम्मानित कर पूर्णिया विश्वविद्यालय ने सराहनीय कार्य किया है वो साधुवाद के पात्र हैं। वहीं पूर्णिया विश्वविद्यालय के हिन्दी पाठ्यक्रम में विशेष रूप से अध्ययन अध्यापन के लिए फणीश्वर नाथ रेणु के साथ साथ कथाकार चंद्रकिशोर जायसवाल को स्थान देने के लिए कुलपति प्रो. डॉ. राजनाथ यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे हिंदी साहित्य को इस क्षेत्र की महत्ता और योगदान का बोध होगा। वस्तुतः पूर्णिया अंचल ने हिंदी साहित्य और भाषा को समृद्ध किया है। हिंदी दिवस एवं सम्मान समारोह के दौरान संकाय अध्यक्ष प्रो. डॉ. मिथिलेश मिश्र ने सम्मानित रचनाकार एवं समीक्षक के कार्यों के लिए उनकी सराहना की और कहा कि उनका आशीर्वाद इस क्षेत्र को मिलता रहे। हिंदी के विकास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दी संस्कृत से ही समृद्ध होती रही है और होती रहेंगी। इसके पहले विभागाध्यक्ष डॉ. कामेश्वर पंकज ने कहा कि हिंदी खड़ी बोली अपने 200 वर्षों से अधिक के विकास काल में इतनी समृद्ध और उपादेय हो गई है कि वह ज्ञान विज्ञान की माध्यम भाषा बनने में पूरी तरह सक्षम हैं। मुख्य वक्ता के रूप में आज के सम्मानित समीक्षक और पूर्णिया विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र नारायण यादव ने समीक्षा क्रम पर विस्तार से चर्चा की और कहा हिंदी भाषा को वैश्विकता प्राप्त है और इसे समृद्ध और सक्षम करने के लिए संस्कृत को अपना स्रोत भाषा बनाना चाहिए। हिंदी दिवस के इस समारोह में अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. नयन चौधरी, डॉ, संजय कुमार दास, डॉ. आशीष कुमार के अलावा विभाग के छात्र आयुष दीपक, प्रणव, आकृति, छवि, ऋतु आदि उपस्थित थे।

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