सख्ती:जांच में खुलासा, कालाबाजारी के लिए विश्वनाथ अग्रवाल ने 167.45 टन खाद को 46 बार बेच लिया वापस, एफआईआर, लाइसेंस कैंसिल

पूर्णिया16 दिन पहले
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विश्वनाथ अग्रवाल के प्रतिष्ठान में जांच करती टीम। - Dainik Bhaskar
विश्वनाथ अग्रवाल के प्रतिष्ठान में जांच करती टीम।
  • 405 टन खाद को 102 बार बेचकर वापस लेने के मामले में कृषि विभाग ने की बड़ी कार्रवाई, पटना की टीम ने तीन दिनों तक की जांच-पड़ताल
  • बिना सक्षम प्राधिकार से अनुमति प्राप्त किए मनमाने ढंग से उर्वरकों की होलसेलर ने की बिक्री

405 टन खाद को 102 बार बेच कर वापस लेने के मामले में कृषि विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए मेसर्स विश्वनाथ अग्रवाल के विरुद्ध सदर थाने में एफआईआर दर्ज कराया है। इसके साथ ही मेसर्स विश्वनाथ अग्रवाल थोक उर्वरक की अनुज्ञप्ति रद्द कर दी गई है। बता दें कि मेसर्स विश्वनाथ अग्रवाल ने 167.45 टन खाद को 46 बार बेच कर वापस लिया था। विश्वनाथ अग्रवाल का होलसेल लाइसेंस केन्सिल करने के बाद अब वे किसी भी तरह के उर्वरक संबंधी उत्पाद की बिक्री नहीं कर पाएंगे। कृषि विभाग ने खाद के किसी भी प्रोडक्ट को बेचने पर रोक लगा दी है। इस मामले में कृषि विभाग की पटना टीम ने लगातार तीन दिनों तक पूरे मामले की जांच की थी। इसमें पाया गया कि बिना सक्षम प्राधिकार से अनुमति प्राप्त किए मनमाने ढंग से उर्वरकों की बिक्री की गई है जो उर्वरक का कृत्रिम अभाव दिखाकर निहित स्वार्थ के तहत कालाजारी के उद्देश्य से किया गया। किसान बीज भंडार ने 237.3 मैट्रिक टन उर्वरक को 56 बार व विश्वनाथ अग्रवाल ने 167.15 मैट्रिक टन खाद को 46 बार खुदरा दुकानदारों को बेचा व फिर वापस लिया था। एक-दो बार नहीं अनेकों बार लेन-देन की इस प्रक्रिया से बिक्री में अनियमितता व संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई। इसके बाद कृषि निदेशालय ने मामले की जांच का निर्देश दिया था। मामले को सिर्फ दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिला कृषि पदाधिकारी प्रकाशचंद्र मिश्रा ने सदर थाना में आवेदन दिया है। इसमें बताया गया है कि 5 जनवरी को मेसर्स विश्वनाथ अग्रवाल प्रोप्राइटर विश्वनाथ अग्रवाल के प्रतिष्ठान पर उनके बेटे राजेश गर्ग की उपस्थिति में पटना की टीम के साथ जिला कृषि विभाग के अधिकारियों की छापामारी के दौरान उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 में निहित अनियमितता पाई गई है। इसके तहत सदर थाना में कांड संख्या 13/22 दर्ज करवाया गया है। मेसर्स विश्वनाथ अग्रवाल की भंडार पंजी के आधार पर सत्यापन के क्रम में उर्वरक एवं अन्य उत्पाद में अंतर पाया गया, जो उर्वरक नियंत्रण आदेश का उल्लंघन व आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत दंडनीय है। जांच के क्रम में पाया गया कि मेसर्स विश्वनाथ अग्रवाल के द्वारा जिला स्तर से निर्गत विभिन्न उर्वरकों के उप आवंटन के पश्चात बिना सक्षम प्राधिकार से अनुमति प्राप्त किए मनमाने ढंग से उर्वरकों की बिक्री की गई है जो उर्वरक का कृत्रिम अभाव दिखाकर निहित स्वार्थ के तहत कालाबाजारी के उद्देश्य से किया गया है जो उर्वरक नियंत्रण आदेश के निहित प्रावधान का उल्लंघन है।

जांच टीम के दायरे में कई थोक व खुदरा दुकानदार भी

जिला कृषि पदाधिकारी प्रकाश चंद्र मिश्र ने बताया कि पटना जांच टीम के दायरे में कई थोक दुकानदारों के साथ खुदरा दुकानदार भी शामिल हैं जिसकी जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। गुलाबबाग के किसान खाद बीज भण्डार,नीलम ट्रेडिंग, कोशी एग्रीकल्चर सेंटर, चंद्रिका स्टोर के साथ अन्य खुदरा व थोक दुकानदारों की जांच रिपोर्ट विभाग को भेजी गई है। इसकी जांच रिपोर्ट के आधार पर पाई गई अनियमितता के आलोक में उक्त दुकानदारों पर कार्रवाई की जाएगी। पटना की जांच टीम में बिहार राज्य बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण एजेंसी बिहार के निदेशक सुनील कुमार पंकज,उप निदेशक सजय कुमार सिंह,जिला कृषि पदाधिकारी प्रकाश चंद्र मिश्रा व आत्मा निदेशक दीपक कुमार शामिल थे।

मेसर्स विश्वनाथ अग्रवाल के प्रतिष्ठान में कई तरह की अनियमितताएं मिली
मेसर्स विश्वनाथ अग्रवाल के प्रतिष्ठान में कई तरह की अनियमितताएं मिली थी। इसके आलोक में विभागीय निर्देश पर सदर थाने में विभिन्न धाराओं में प्रोप्राइटर विश्वनाथ अग्रवाल पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मेसर्स विश्वनाथ अग्रवाल के थोक उर्वरक की अनुज्ञप्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। अब इनके द्वारा किसी भी तरह के उर्वरक संबंधी उत्पाद की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। -प्रकाश चंद्र मिश्र, जिला कृषि पदाधिकारी, पूर्णिया

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