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मकर संक्रांति आज:आज से खरमास खत्म; मांगलिक कार्य होगा शुरू, तिल, गुड़, खिचड़ी खाएंगे लोग

सोहन कुमार | बनमनखी3 दिन पहले
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  • आज से दिन बड़ा तो रात छोटा होने लगेगा

मिथिलांचल समेत पूरे कोसी-सीमांचल क्षेत्र में गुरुवार को हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक मकर संक्रांति पर्व मनेगा। इसको लेकर विगत कुछ दिनों से बनमनखी अनुमंडल क्षेत्र में तैयारियां जोरों पर चल रही है।

वैसे तो यह पर्व पूरे देश में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। इस पर्व का जहां वैज्ञानिक महत्व है तो वहीं इस पर्व को मनाने के पीछे धार्मिक मान्यताएं भी हैं। कहा जाता है इस दिन सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ने लगता है जिससे दिन बड़ा तो रात छोटा होना शुरू हो जाता है। मकर संक्रांति के दिन तिल, तिलकुट, गुड़, खिचड़ी, दही-चूड़ा खाने की भी परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार तिल का सीधा संबंध शनि से है। यही वजह है कि मकर संक्रांति के दिन तिल और तिलकुट खाया जाता है। इससे शनि, राहू और केतु से संबंधित सारे दोष दूर हो जाते हैं।

मकर संक्रांति के बारे में शास्त्र-पुराण को जानें
पवित्र ग्रंथों के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, आद्यशक्ति और सूर्य की आराधना व उपासना का पर्व है। जो तन-मन-आत्मा को शांति व शक्ति प्रदान करता है। पुराणों में कहा गया है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर एक महीने के लिए जाते हैं, क्योंकि मकर राशि का स्वामी शनि है। हालांकि ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य और शनि का तालमेल संभव नहीं, लेकिन इस दिन सूर्य खुद अपने पुत्र के घर जाते हैं। इसलिए यह दिन पिता-पुत्र के संबंधों का दिन कहा गया है। यह पर्व संपूर्ण भारत में किसी न किसी रूप में आयोजित की जाती है।

मकर संक्रांति के दिन ही धरती पर भागीरथ ने लाई थी गंगा
मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही गंगा भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुई सागर में जा मिली थीं। गंगा को धरती पर लाने वाले भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस खास दिन तर्पण किया था।

उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी और धरती पर अवतरण हुई थी। इसलिये इस दिन श्रद्धालु गंगा स्नान करते है और भगवान सूर्य को जल से अर्घ्य देते है। भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए, सूर्य के मकर राशि में आने का इंतजार किया था। सूर्य के उत्तरायण होते ही अपना देह का त्याग कर परलोक सिधार गए थे।

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