कार्यक्रम:टैगोर ने जालियांवाला कांड के विरोध में अपनी नाइटहुड उपाधि लौटा दी थी

पूर्णिया2 महीने पहले
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  • बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी टैगोर को पुण्यतिथि पर किया गया याद

एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी व प्राच्य दर्शन के प्रवक्ता कविगुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि मनी। साहित्य संस्कृति की विभिन्न शाखाएं कविता, कहानी, नाटक,उपन्यास, नृत्यनाट्य,आलेख, पत्र एवं भ्रमण साहित्य, गीत, संगीत सृजन, चित्रकला में असामान्य प्रतिभा का परिचय दिये। साहित्य के क्षेत्र में गीतांजलि काव्य ग्रन्थ को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समग्र रचनावली 80 खंड में प्रकाशित की गई है। हमारे देश और बांग्लादेश की राष्ट्रीय गीत के रचयिता रवीन्द्रनाथ 1921 में निर्मम जालियांवाला हत्याकांड के विरोध में अपना नाइटहुड उपाधि तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत को लौटा दिया। उनकी दार्शनिक चिंताधारा, विज्ञान मनस्कता, आध्यात्मिक चेतना जगत आधारित है उपनिषद, लोक संस्कृति, प्राच्य पाश्चात्य जीवन दर्शन, कबीर की सूफी चेतना,लालन फ़क़ीर के वाउल दर्शन पर। उनके द्वारा रचित रवीन्द्र संगीत की संख्या 2200 से अधिक है।साहित्य से सिनेमा का निर्माण घरे बाईरे,क्षुघित पाषाण,काबुलीवाला उल्लेखनीय है। शिक्षा के क्षेत्र में रवीन्द्रनाथ द्वारा स्थापित शांतिनिकेतन विश्वभारती विश्वविद्यालय समग्र वैश्विक ज्ञान का अध्ययन केन्द्र बना।यह देश की केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। ग्रामीण विकास के लिए श्रीनिकेतन की स्थापना 1921 में किये। मैथिल कवि विद्यापति एवं वैष्णव कविता से प्रभावित होकर रवीन्द्रनाथ गीत व संगीत की रचना किया। भानुसिंहेर पदावली उनकी चर्चित अनुपम काव्यग्रंथ है। तीस से अधिक देशों का भ्रमण किया। विश्वव्यापी ख्याति फैल चुकी थी।महान वैज्ञानिक आइंसटीन से उनकी मुलाकात इस दौरान हुई। चित्रांकन के दुनिया में भी रवीन्द्रनाथ अपना अलग शैली का निर्माण किये। विश्वकवि के पुण्य दिवस हमें यह अवसर देता है हम इस महान कर्मयोगी एवं विश्व मानविकता के प्रवक्ता के जीवन दर्शन से अपने जीवन को समृद्ध करें।

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