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अजब-गजब आम:शहर में भी विश्व का सबसे महंगा आम, एक का दाम 21 हजार

पूर्णियाएक महीने पहले
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  • पूर्व विधायक अजीत सरकार की बेटी रीमा सरकार के घर में ताईयो नो तामागो आम की प्रजाति का पेड़

एक आम की कीमत 21 हजार...यह सुनकर आपको अजीब लगे, पर सच है। दुनिया का सबसे महंगा आम जापान के मियाजाकी प्रांत में मिलने वाला ताईयो नो तामागो आम है। पूर्णिया में इस नस्ल का इकलौता पेड़ 25 साल से है। शहर के भट्टा दुर्गाबाड़ी स्थित पूर्व विधायक अजीत सरकार के घर में दुनिया के इस सबसे महंगे आम का एक मात्र पेड़ है। अजीत सरकार के दामाद विकास दास ने बताया कि इस आम के पेड़ को करीब 30 साल पहले मेरे ससुर अजीत सरकार की बेटी रीमा सरकार को विदेश से आए एक शख्स ने तोहफे में दिया था। तब उन्हें इस आम के दुर्लभ होने की जानकारी नहीं थी। पर जब नेट पर सर्च किया तो इसकी जनकारी मिली। आम का रंग गहरा लाल होता है।

सबसे महंगे आम ताईयो नो तामागो दरअसल दुनिया भर में महंगे आम के लिए चर्चित मियाजाकी (miyazaki) प्रांत में होने वाले इस आम को मियाजाकी के नाम से भी जानते हैं। दुनिया के बाजार में इसकी कीमत 2.70 लाख रुपए प्रति किलो है। जबलपुर में इस आम के उगाए जाने की बात कही जा रही है। इंटरनेशनल मार्केट में इस आम की कीमत 2.70 लाख किलो के करीब है। भारत में यह एक आम 21 हजार रुपए तक में खरीदा जा चुका है।

विकास ने बताया कि यह आम का कलर ही नहीं इसका मंजर भी अलग किस्म का होता है। जब मंजर निकलता है तो यह सुनहरे रंग कलर का होता है। आम को जैसे-जैसे धूप मिलती है, यह गोल्डेन कलर का हो जाता है।

लोग इसे कॉमरेड आम भी कहते थे
विकास दास ने बताया कि ससुर पूर्व विधायक अजीत सरकार कॉमरेड थे, इसलिए लोग इस आम को कॉमरेड आम कहने लगे। हालांकि उन्होंने इस आम की रंग, महक व स्वाद से जुड़ी विशेषताएं जानी तो उन्हें पता चला कि यह जापान के मियाजाकी प्रांत में होने वाला दुनिया का सबसे महंगा आम है। जिसे माइयो नो तमागो कहते हैं। आम का रंग कच्चा रहने तक लाल माणिक नजर आता है। पकने के बाद रंग सुनहरा हो जाता है

जापान में इसे कहते हैं एग ऑफ द सन
ताईयो नो तामागो को जापानी कल्चर में एग ऑफ द सन कहते हैं, क्योंकि ये सूरज की रोशनी में तैयार होता है। लोग इसे तोहफे में देते हैं। इससे तोहफे में पाने वाले की किस्मत सूरज जैसी रौशन होती है।

इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं : डॉ.सीमा
कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ की कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीमा कुमारी ने बताया कि इस विषय में ज्यादा जानकारी नहीं है। जब तक इस पर जांच नहीं हो जाती, कुछ भी कहना सही नहीं होगा।

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