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निर्णय:हाईकोर्ट के आदेश के 2 साल बाद भी 18 रैयतों को नहीं दिया गया मुआवजा, करेंगे आंदोलन

राघोपुर5 दिन पहले
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सिमराही बाजार में बैठक करते पीड़ित रैयत।
  • भू-अर्जन विभाग की कार्यशैली से नाराज हैं रैयत, जमीन मालिकों ने कहा-
  • एनएच-57 के निर्माण के लिए एनएचएआई ने अधिग्रहीत की थी जमीन
  • व्यावसायिक जमीन की जगह आवासीय दर से रैयातों को दिया जा रहा था मुआवजा

कोर्ट के आदेश के बाद भी सिमराही बाजार से गुजरने वाले एनएच-57 में अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा नहीं मिलने से कुछ पीड़ित रैयत न्याय के लिए दर-दर की ठोेकर खाने को मजबूर हैं। शनिवार शाम पीड़ित रैयतों ने सिमराही बाजार में बैठक कर भू-अर्जन विभाग के खिलाफ आंदोलन करने का निर्णय लिया। मामला राघोपुर प्रखंड के सिमराही बाजार से जुड़ा है, जहां वर्षों पूर्व एनएच-57 के निर्माण के लिए एनएचएआई द्वारा रैयतों की जमीन अधिग्रहीत की गई थी। उक्त अधिग्रहीत भू-भाग पर एनएचएआई द्वारा सड़क बनाई गई, लेकिन भू-अर्जन विभाग की लापरवाही से रैयतों की जमीन के किस्म को परिवर्तित किया गया। इस कारण कुछ रैयत उचित मुआवजा नहीं मिलने के कारण कोर्ट में चले गए। चूंकि सिमराही बाजार जिले का पुराना बाजार रहा है, जहां पर कई दशकों से लोग अपना-अपना व्यवसायी चलाकर जीवनयापन करते आ रहे हैं। जमीन व व्यवसायी का व्यवसायिक लगान भी सरकार को देते आ रहे हैं। रैयतों का कहना है कि फिर भी भू-अर्जन विभाग द्वारा उनकी व्यवसायिक जमीन का किस्म बदलकर आवासीय दर से भुगतान किया जा रहा था। इस कारण उनलोगों ने न्याय के लिए कोर्ट की शरण में चले गए। जिला भू-अर्जन पदाधिकारी नरेंद्र मोहन झा ने बताया कि मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है।

12 अक्टूबर 2018 को रैयतों ने भू-अर्जन विभाग को सौंपा था साक्ष्य
रैयतों का कहना है कि भू-अर्जन द्वारा जब उनलोगों को अपनी अधिग्रहीत जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिला तो पहले उनलोगों के जिले की वरीय अधिकारियों का चक्कर काटा, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उसके बाद उनलोगों ने पटना हाईकोर्ट में सीडब्लूजेसी नंबर 5989/2017 दायर किया। इसमें कुल 18 रैयत शामिल हैं। वहीं मामले में पटना हाईकोर्ट ने डीएम को निर्देश दिया था कि पीड़ित रैयतों की अर्जित की गई भूमि का वर्गीकरण के लिए संबंधित रैयतों से साक्ष्य लेकर आगे की कार्यवाई कर भुगतान सुनिश्चित करें। उक्त आदेश के आलोक में डीएम के निर्देश पर रैयतों ने 12 अक्टूबर 2018 को अपना-अपना साक्ष्य भू-अर्जन विभाग को प्रस्तुत किया था।

1.23 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने का दिया था आदेश
डीएम के निर्देश पर भू-अर्जन पदाधिकारी ने परियोजना निर्देशक एनएचएआई पूर्णिया को 12 दिसंबर 2018 को पत्र लिखकर उक्त रैयतों की जमीन का किस्म सुधारने के बाद मुआवजा देने के लिए 1 करोड़ 23 लाख 22 हजार 307 रुपए उपलब्ध कराने की मांग की। इसमें उन्होंने कहा था कि पटना हाईकोर्ट द्वारा 13 सितंबर 2018 को पारित आदेश के आलोक में सुनवाई व जांच के बाद पारित आदेश के आलोक में संबंधित रैयतों का भुगतान के लिए 3जी तैयार किया गया है। रैयतों का कहना है कि डीएम के निर्देश पर तत्कालीन वीरपुर अनुमंडल पदाधिकारी सुभाष कुमार ने रैयतों को आश्वासन देकर अधिग्रहित भू-भाग से संरचना हटवा दिया। रैयतों द्वारा संरचना हटाया गया, लेकिन विभाग द्वारा मुआवजा का भुगतान नहीं किया गया। इस कारण रैयत दर-दर भटकने को मजबूर हैं। रैयतों ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद दो वर्षों के इंतजार के बाद भी मुआवजा नहीं मिले तो उनलोगों ने आंदोलन शुरू कर देंगे।

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