उदासीनता:कर्मियों की कमी से उपभोक्ता फोरम में मामलों के निदान में देरी

सहरसा10 दिन पहले
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सदस्यों के अभाव में सुनसान पड़ा जिला उपभोक्ता विवाद आयोग न्यायालय। - Dainik Bhaskar
सदस्यों के अभाव में सुनसान पड़ा जिला उपभोक्ता विवाद आयोग न्यायालय।
  • एक वर्ष से दो सदस्यों की कमी के कारण परेशानी, इस साल अब तक 76 नए मामले आए, जिसका निपटारा नहीं हुआ
  • केवल अध्यक्ष पद पर त्रिलोक नाथ पदस्थापित, जिनका कार्यकाल अप्रैल तक ही रहेगा

बीते एक वर्ष से दो सदस्यों की कमी के कारण जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में लंबित वादों की संख्या 410 हो गई है। इस साल 76 नए मामले आए जिसमें किसी का निपटारा इसीलिए नहीं हो सका है क्योंकि अध्यक्ष के अलावा दो सदस्यों का पद एक वर्ष से से रिक्त है। सहरसा में केवल अध्यक्ष पद पर त्रिलोक नाथ तिवारी पदस्थापित हैं। इनका भी कार्यकाल अप्रैल 2022 तक ही रहेगा। ऐसे में अगर सदस्यों की नियुक्ति नहीं होती है तो आयोग में वादों की संख्या बढ़ती ही जाएगी। उपभोक्ताओं को न्याय मिलने की आस अभी कुछ महीनों के इंतजार बाद ही पूरी होगी। अब सदस्यों का कार्यकाल 4 वर्षों का ही होगा। नियुक्त होने वाले सदस्यों के मानदेय को भी सरकार ने बढ़ा दी है। पहले लगभग 30 हजार मानदेय पर काम करने वाले सदस्य को अब डिप्टी सेक्रेट्री का रैंक दिया गया है। सदस्यों का मानदेय 60 हजार से अधिक कर दिया है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। आने वाले महीनों में संभवत: सदस्यों की नियुक्ति हो जाएगी। इसके बाद लंबित मामलों की सुनवाई की जाएगी।

विभागीय आंकड़ा के अनुसार बैंक से जुड़े 109 मामले लंबित
लंबित वादों की सूची में विभिन्न इंश्योरेंस कंपनियां, फाइनांस कंपनी सहारा इंडिया, निजी असप्ताल, बिजली विभाग से जुड़े मामले सबसे अधिक हैं। विभागीय आंकड़ा के अनुसार बैंक से जुड़े 109 मामले, मेडिकल से जुड़े 17 मामले, बिजली विभाग से जुड़े 82, बीमा कंपनियों से जुड़े 62 मामले, मिसलेनियस 73 के अलावा, रेल, एयरलाइन, पोस्टल, डिफेक्टिव, शिक्षा, रोड ट्रांसपोर्ट से जुड़े कई दर्जन मामले सुनवाई के लिए लंबित है।

आने वाले समय में मिलेगा उपभोक्ताओं को फायदा
अब जिला स्तर के उपभोक्ता फोरम न्यायालय(जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग) में 1 करोड़ तक के वादों की सुनवाई होगी। उपभोक्तओं से जुड़े मामले देश में किसी भी शहरों से जुड़ा क्यों न हो उससे संबंधी वाद उपभोक्ता अपने गृह जिले के आयोग में दायर कर सकते हैं। कई संसोधन आने के बाद न्याय पाने का दायरा अब काफी बढ़ गया है। आने वाले समय में उपभोक्ताओं को फायदा होगा।

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