असुविधा:डोमारहीवासी को नहीं है मेनरोड तक पहुंचने का रास्ता

नयानगर16 दिन पहले
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बस्ती को जोड़ने वाली चचरी पुल। - Dainik Bhaskar
बस्ती को जोड़ने वाली चचरी पुल।
  • बरसात के दिनों में चचरी पुल के सहारे करते हैं आवागमन, हादसे की रहती है आशंका

उदाकिशुनगंज प्रखंड अंतर्गत शाहजादपुर पंचायत का डोमारही एक ऐसा गांव है, जहां आज भी सौ से अधिक परिवारों के लोग सड़क, पुल जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। बच्चों के शिक्षा के लिए यहां एक भी सरकारी विद्यालय नहीं है। इस गांव के लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने की रास्ता नहीं होने के कारण काफी परेशानी होती है। प्रखंड मुख्यालय से तकरीबन 18 किलोमीटर दूर यह गांव आज तक रास्ते से महरूम है। शादी-ब्याह में भी कुछ दूरी तय कर मुख्य सड़क पर गाड़ी पर बैठने को मजबूर रहते हैं। इतना ही नहीं बरसात और बाढ़ के समय में बांस के बने चचरी पुल के रास्ते पर आवागमन को मजबूर रहते हैं। इस रास्ते को देख आसानी से समझा जा सकता है कि गांव के बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं किस तरह परेशानी झेलने के लिए मजबूर हैं। अधिकांश आबादी महादलित परिवार की है। बरसात के समय में तो सबसे ज्यादा समस्या तब होती है जब लोग बीमार पड़ते हैं। खेत के रास्ते पर बीमार शख्स को खाट पर डालकर निकालना भी मुश्किल हो जाता है। लोग किसी तरह लोग पैदल मरीज को लेकर मुख्य सड़क पर पहुंचते हैं, इसके बाद मरीजों को अस्पताल ले जाया जाता है। डोमारही गांव शाहजादपुर और बैजनाथपुर सड़क से पश्चिम नदी किनारे बसा हुआ है। जहां से मुख्य सड़क की दूरी पांच सौ मीटर है। लेकिन टोले से सड़क तक संपर्क पथ जोड़ने की ओर कोई भी जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे हैं। गांव के दशरथ ऋषिदेव, राजेन्द्र ऋषिदेव, संजू देवी, अचार देवी, पिंकी देवी, रिंकू देवी, राजमणि देवी, जानकी देवी, तारा देवी, पुलट ऋषिदेव, फूलचंद ऋषिदेव, अनिल मंडल, बेचन मंडल, प्रेम मंडल, प्रमोद, बहादुर ऋषिदेव, विनोद ऋषिदेव, जनार्धन ऋषिदेव, संख्या देवी, जगदीश ऋषिदेव, बबलू ऋषिदेव सहित अन्य लोग बताते हैं कि गांव में सरकार की एक भी योजना का लाभ नहीं मिला है। लोग जंगली आदिवासियों के जैसा दिन काट रहा है।

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